विश्व में लगभग 422 करोड़ लोग मधुमेह से पीड़ित

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नारायण मेमोरियल अस्पताल में मनाया गया विश्व मधुमेह दिवस

इंसुलिन के 100 साल पूरे होने पर जागरुकता अभियान

कोलकाता : मौजूदा समय में पूरे विश्व में लगभग 422 करोड़ लोग मधुमेह के साथ जिंदगी जीने को मजबूर हैं, इनमें से 77 करोड़ लोग भारत में मधुमेह से प्रभावित हैं। यह इसी रफ्तार से बढ़ती रही तो वर्ष 2045 तक मधुमेह की समस्या देश की आबादी के 76% लोगों में फैलने की आशंका है, जो दुनिया में मधुमेह की राजधानी कहलाने वाले देश चीन को पार कर जाएगी। हमे उम्मीद है कि भारत दुनिया में मधुमेह से जागरुक रहने वाला देश बन सकता है। साल 2021 इसलिए भी खास है क्योंकि इस वर्ष इंसुलिन की खोज के 100 साल भी पूरे हुए है।
डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना वायरस बीमारी (कोविड-19) के कई मरीज गंभीर मधुमेह संकट के साथ अस्पतालों में आते हैं, क्योंकि कोविड-19 संक्रमण के दौरान तनाव के कारण वे मधुमेह के मरीज बने थे। स्टेरॉयड (कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स) का उपयोग इसका एकमात्र उपचार है।
सुपर्णा सेन गुप्ता (सीईओ, नारायण मेमोरियल हॉस्पिटल) ने कहा, हमने पहले कहा था कि लॉकडाउन के प्रभाव के कारण एचबीए1सी के बिगड़ने और टाइप 2 डायबिटीज मेलिटस में संबंधित जटिलताओं से मधुमेह के मामले बढ़ सकते है। इससे बचाव के लिए सीमित और उचित तरीके से व्यायाम करना है।
डॉ. सुजीत भट्टाचार्य (एमडी, डीएनबी, एमएनएएमएस, डीएम (पीजीआई) एमआरसीपी) ने कहा, इंसुलिन लगभग 100 वर्षों से मधुमेह के इलाज के लिए उपलब्ध है, यह मधुमेह वाले लोगों के जीवन में बदलाव ला रहा है।
डॉ. इप्सिता घोष (एमडी, डीएम) ने कहा, यह देखा गया है कि इस वैश्विक महामारी के कारण देश की आबादी में पोस्ट प्रांडियल रक्त शर्करा के स्तर में 48% की वृद्धि हुई है। हमारा लक्ष्य गैर-मधुमेह व्यक्तियों में भी जोखिम का निर्धारण करना है और साथ ही उन्हें इसके दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों से अवगत कराना है।

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