विषाणु का प्रभाव

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-प्रतिमा कुमारी मिश्र

मैंने सितारों की उस रोशनी को देखा

जो आज धूमिल-सी हो गयी है।

चारों तरफ सिसकियाँ, चीख और भयावह कहर,

सुनसान ,वीरान सड़कों पर भी डर है तो ….

विषाणुओं के विषाद का

कंपकंपाने लगती है ये काया कि…

कहीं विषैले विषाणु की फुफकार न कहर ढाये

इसके कहर ने तो विश्व में भुखमरी,आर्थिक  तबाही मचा दी।

सुना था कि बाढ़ ,भूकंप और सूखा ही

भुखमरी का कारण है।

आह! कितना करुण दृश्य है,विधाता ।

इंसान,इंसान को ही देखकर डरता है..

चहारदीवारियों में बंद आत्मा

दहलीज को लाँघने से घबराता है।

हर मनुष्य के अंदर एक विवशता की चीख है..

कोई तो इस महा प्रलय से बचाओ।

कोई तो अंधकार को मिटाकर रोशनी  दो

जिससे जग हो उज्ज्वल,जग हो उज्जवल।।

५.४.२०

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