वेतन में देरी और कारोबार में सुस्ती के कारण देश में बढ़ रहे लोन डिफॉल्टर

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पेटीएम फंडेड फाइनेंस टेक फर्म क्रेडिटमेट ने यह सर्वे किया है
40 बैंकों के दो लाख से अधिक कर्जों का विश्लेषण हुआ
एक सर्वे के मुताबिक यदि व्यक्तिगत कर्जदार समय पर अपने लोन की किस्त नहीं चुका पा रहे हैं तो उसकी सबसे बड़ी वजह वेतन मिलने में होनी वाली देरी है। इसके अलावा कारोबार में संकट की वजह से भी वे लोन नहीं चुका पा रहे हैं। एक सर्वे में यह निष्कर्ष सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार 36 फीसदी लोग देर से वेतन मिलने के चलते बैंक का भुगतान समय पर नहीं कर सके। वहीं, 29 फीसदी मामले ऐसे हैं, जिनमें कारोबारी सुस्ती बैंक रिपेमेंट में देरी की वजह बनीं। यह सर्वेक्षण ऐसे समय आया है जबकि कुछ माह पहले जारी आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार देश में बेरोजगारी की दर चार दशक के उच्चस्तर पर पहुंच गयी है। कॉरपोरेट लोन की मांग कम होने की वजह से बैंक अपने बही खाते को आगे बढ़ाने के लिए काफी हद तक रिटेल लोन पर निर्भर हैं। पेटीएम फंडेड फाइनेंस टेक फर्म क्रेडिटमेट की रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा सुस्ती की वजह से देशभर में ऋण वसूली प्रभावित हो रही है। यह रिपोर्ट पिछले छह माह के दौरान 30 राज्यों में एनबीएफसी सहित 40 बैंकों के दो लाख से अधिक ऋणों के विश्लेषण पर आधारित है। लोन के भुगतान में देरी की सबसे प्रमुख वजह वेतन मिलने में होने वाली देरी को माना गया है।

82% कर्ज चूक के मामले पुरुषों से जुड़े हैं
सर्वे में एक रोचक तथ्य सामने आया है। महिलाओं की तुलना में लोन नहीं चुकाने के मामले पुरुषों के अधिक हैं। 82 प्रतिशत लोन चूक के मामले पुरुषों से जुड़े हैं। लोन भुगतान करने में तो महिलाएं आगे हैं साथ ही बकाए का भुगतान करने में भी महिलाएं आगे हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाएं 11 प्रतिशत अधिक तेजी से बकाया का भुगतान करती हैं। शहरों की बात की जाए तो मुंबई, अहमदाबाद और सूरत में लोन भुगतान की दर सबसे बेहतर है। इस मामले में दिल्ली, बेंगलुरु और पुणे की स्थिति काफी खराब है। राज्यों में ऋण प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में ओड़िशा, छत्तीसगढ़, बिहार और गुजरात का प्रदर्शन सबसे अच्छा है। वहीं मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और तमिलनाडु का प्रदर्शन सबसे खराब है।

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