शिक्षकों को समय के साथ अपडेट होना आवश्यक : डॉ. सोमा बंद्योपाध्याय  

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कोलकाता । भारतीय संस्कृति में शिक्षकों का दर्जा श्रेष्ठतम व अतुलनीय है और बात जब नयी पीढ़ी के नव निर्माण की हो तो बिना शिक्षक के अधूरी है । इसी को मद्देनजर रखते हुए गत 1 मार्च को नई पीढ़ी तथा राइटर्स एण्ड जर्नलिस्ट एसोसिएशन ( वाजा इंडिया) कोलकाता इकाई द्वारा “नई पीढ़ी के नव निर्माण में शिक्षकों की भूमिका” नामक ई -परिचर्चा का आयोजन हुआ।
उपरोक्त परिचर्चा का संचालन डॉ. वसुंधरा मिश्रा, अध्यक्ष वाजा इंडिया महिला शाखा ,कोलकाता इकाई ने किया साथ ही स्वागत ज्ञापन शिवेंद्र प्रकाश द्विवेदी ,संस्थापक , ‘नयी पीढ़ी’ तथा संस्थापक महासचिव, वाजा इंडिया द्वारा संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में विषय प्रवेश देते हुए वाजा इंडिया, कोलकाता इकाई के अध्यक्ष तथा वरिष्ठ पत्रकार विश्वंभर नेवर (निदेशक ताजा टी.वी. व छपते-छपते) ने कहा कि आजादी के बाद शिक्षा में आए उतार-चढ़ाव के बीच आज शिक्षा की खिचड़ी बन गई है । उन्होंने कहा कि नयी पीढ़ी और वाजा इंडिया द्वारा संपन्न हो रही है यह ई-परिचर्चा हमारा ध्यान एक गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित करती है।

मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रोफेसर सोमा बंद्योपाध्याय का कहना था कि यह विषय बहुत ही महत्वपूर्ण है, हमारे भारतीय परिवेश में माता-पिता के बाद शिक्षक व गुरु का ही महत्व होता है। मेरा मानना है कि शिक्षक को समय के साथ खुद को अपडेट रखना चाहिए और साथ ही यह एक गुरु का दायित्व है कि वह विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक दायित्व बोध के प्रति भी जागरूक करें। प्रो. सोमा बंद्योपाध्याय ने आगे कहा कि आज नयी पीढ़ी के पास ज्ञान व सूचना के साधन बड़ी आसानी से उपलब्ध हैं तो यहां शिक्षकों के सामने नयी पीढ़ी की बढ़ती आकांक्षाओं की पूर्ति भी बड़ी चुनौती हो जाती है । इस मौके पर सोमा बंदोपाध्याय ने शिक्षकों से अनुरोध किया है कि वह मानव रोबोट ना तैयार कर विद्यार्थियों को व्यवहारिक शिक्षा प्रदान करें।

प्रोफेसर सोमा बंद्योपाध्याय वर्तमान में पश्चिम बंगाल प्रशिक्षण शिक्षण योजना एवं प्रबंधन विश्वविद्यालय की साथ ही डायमंड हार्बर विश्वविद्यालय की कुलपति हैं तथा यह संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति भी रह चुकी हैं।आमंत्रित वक्ता के रूप में अपना वक्तव्य रखते हुए शिक्षा सदन फॉर गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल ,हावड़ा, कोलकाता की पूर्व प्रधानाचार्य दुर्गा व्यास ने कहा कि भारतीय संस्कृति में शिक्षकों को विशेष सम्मान मिला है इसलिए एक शिक्षक का दायित्व है कि नई पीढ़ी का नव निर्माण करें । परिचर्चा के दौरान द बीएसएस स्कूल कोलकाता की हिंदी विभागाध्यक्ष प्रियंका मिश्रा ने कहा कि आज शिक्षा व शिक्षकों का व्यवसायीकरण हो रहा है । इसी तरह आमंत्रित वक्ता के तौर पर भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज पश्चिम बंगाल में कार्यरत डॉ.रेखा नारीवाल ने कहा कि आज हम मूल्य और नैतिक मूल्यों पर समझौता कर रहे हैं। यह स्थिति घातक है । कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कोलकाता के प्रतिष्ठित बिरला हाई स्कूल्स की डायरेक्टर मुक्ता नैन ने कहा कि पहले शिक्षक रोल मॉडल्स हुआ करते थे। पूर्व समय के शिक्षक स्कूल को एक जॉब नहीं बल्कि ज्ञान दान की भावना को अपना कर्तव्य समझते थे। कार्यक्रम की प्रायोजक बॉल पेन की निर्माता कंपनी  कोलेराइट’ रही जिसके डायरेक्टर अमित पॉल ने भी कार्यक्रम के अंत में अपने विचार व्यक्त किए। इस परिचर्चा में भारत के तमाम शहरों के शिक्षक ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। कोलकाता ईकाई में साहित्यकार रेणु गौरसरिया, साहित्य प्रेमी शशि कंकानी और बहुत संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। यह इ- परिचर्चा एक महत्वपूर्ण और गंभीर विषय को लेकर आयोजित हुई जिससे वर्तमान काल खंड में हमारा, देश, समाज व नई पीढ़ी उसमें अपना अक्स देख सके ।

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