शुभजिता युवा प्रतिभा सम्मान – प्रतिभागी – प्रियंका सिंह

0
113

 शिक्षण संस्थान – कलकत्ता विश्वविद्यालय

प्रतियोगिता – निबन्ध

विषय – हमारे तटरक्षक

हमारे तटरक्षक

विश्व में भारतवर्ष एकता का दर्पण है।भिन्न भिन्न जातियों, भाषाओं और संस्कृति के लोग एकता की जड़ों को कायम रखने में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। किसी देश के विकास में देश के नौसेना महत्वपूर्ण कड़ी है,उन के लिए परिचय की आवश्यकता नहीं। उन नौसेनाओं को “देश के रक्षक” या यूं कहें देश की आत्मा कहा जाता है,उन नौसेना में एक शक्ति ‘तटरक्षक’ है।जैसा कि उसके शाब्दिक अर्थ से पता लगता है ‘किनारों के रक्षक’ । कहीं न कहीं सभी देशों को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने का माध्यम समुद्र भी है जो प्राकृतिक वरदान है। पश्चिम में अरब सागर, पूर्व में बंगाल की खाड़ी एवं दक्षिण में हिंद महासागर लगी हुई है,इन्हीं समुद्री-पथो की सुरक्षा,गहरे समुद्र में लूट-पात , ऊर्जा सुरक्षा, आंतकवाद आदि से देश की रक्षा की तटरक्षक करते हैं। इसलिए समुद्र क्षेत्र से भारत की रक्षा के लिए तटरक्षक कानून सन्1978 में लागू किया गया, साथ ही साथ 18अगस्त 1978 में भारतीय तटरक्षक की स्थापना की गयी। जलीय क्षेत्र तथा विशिष्ट आर्थिक क्षेत्रों की निगरानी करने के साथ तटरक्षक का यह दायित्व रहता है कि वह बल के कार्यों में खोज तथा बचाव करने के अलावा अपने इलाके और व्यापार की रक्षा करें। तटरक्षक की की क्षमता रहती है कि वह मित्रता का साथ बढाकर और अंतरराष्ट्रीय सहयोग करके देश को सुरक्षित रखें, समुद्री वातावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने साथ ही साथ राष्ट्रीय हितों का ध्यान रखें।


एक बात स्पष्ट हो जाती है कि सभी तटरक्षक देशभक्त होने के साथ-साथ देश के विकास के लिए कार्यरत भी है। तटरक्षक के कमान तटरक्षक महानिदेशक है। इनका मुख्यालय नयी दिल्ली में है। इनके पास सबसे महत्वपूर्ण शक्ति इनकी एकाग्रता है जिसके कारण आने वाले खतरों का सामना बलपूर्वक करते हैं। हमारे तटरक्षक के कर्त्तव्यों के अलावा कुछ बुनियादी कार्य भी है जैसे-१.प्राकृतिक और कृत्रिम दीपों और समुद्रों की रक्षा,२.भारत के समुद्री कानूनों को लागू करना,३.मछुआरों को सुरक्षा प्रदान करना और ४.युद्ध के समय नौसेना की सहायता।
यदि कहा जाए हमारे तटरक्षक औपचारिक और अनौपचारिक रूप से देश के स्तंभों में से एक स्तंभ है तो अनायास प्रतीत जान नहीं पड़ता क्योंकि वह कर्त्तव्यों का पालन करते हुए जनता जैसे व्यापारों मछुआरों और क्षेत्रिय इलाकों की जिम्मेदारी उन्ही के कंधों पर है।
अगर तटरक्षक बलों की उद्देश्यों की बात करें,तो देश में आने वाले आंतकवाद,जो समुद्री मार्ग के जरिए भारत को अपना निशाना बनाते हैं उनके लक्ष्यों को असफल करना साथ ही साथ समुद्र तट के मार्गों को सुरक्षित रखते हुए देश की उन्नति में अपना सहयोग देना यह उनका सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण लक्ष्य या उद्देश्य कहा जा सकता है। वह इस लक्ष्य के पूर्ति के लिए अपने प्राणों का बलिदान भी करने में संकोच नहीं करते, साथ वहअपने घर परिवार से दूर रहकर देश की सुरक्षा,स्वाभिमान,और अपने कर्त्तव्यों का पालन करने के लिए कभी पीछे नहीं हटते।
एक बात में कहा जाए तो हमारे तटरक्षक बल देश का अभिमान है। जिसके सहारे हम आप अपने घरों में खुशियां मनाते हैं और सुरक्षित भी है, ऐसे देश के वीरों के लिए दिल में सम्मान हो और भारतवर्ष के निवासी होने के नाते अपने अपने कर्त्तव्यों का पालन करें। हमारे तटरक्षक के सम्मान के लिए कुछ पंक्तियां..
“इसके कर्मी है देश रक्षक
निभाते हैं अपना कर्त्तव्य
इन्हें ना चाहिए कोई तख्ताज
केवल देश करे इनका सम्मान
प्रेम और बलिदान है
इनकी रग- रग में
इसलिए ये कहलाते हैं
देशभक्त”।।।।।।।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

2 × 5 =