श्रमदान से नहर की खुदाई में जुटे मजदूर

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बांदा : बांदा जिले में मनरेगा के तहत काम नहीं मिलने पर करतल क्षेत्र की घरार नदी की श्रमदान से खोदाई करने वाले मजदूर अपनी इस मेहनत पर जिला प्रशासन द्वारा ठप्पा लगाए जाने के बाद अब नरैनी क्षेत्र के नौगवां गांव के मजरा माऊ सिंह के पुरवा में लगभग समतल हो चुकी नहर की खुदाई में जुट गए हैं। मजदूरों के अनुसार, सिंचाई विभाग की लापरवाही से नहर लगभग समतल हो चुकी है, जिससे उसके अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पाता और उनकी खेती बंजर होती जा रही है।
नरैनी क्षेत्र के नौगवां गांव के मजरा माऊ सिंह के पुरवा में नहर की खोदाई में श्रमदान (मुफ्त मेहनत) कर रहे मजदूर श्यामलाल ने रविवार बताया कि गुढ़ा कलां गांव से दिवली गांव तक जाने वाली इस छोटी नहर की सफाई कई वर्षों से नहीं हुई, जिससे अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पाता, परिणाम स्वरूप उनके उपजाऊ खेत बंजर भूमि में बदलते जा रहे हैं। इस मजदूर ने बताया कि मनरेगा में काम न मिलने पर खाली हाथ घर में बैठे थे। सोचा, नहर की खुदाई करें, जिससे टेल तक पानी पहुंचेगा और बच्चों की भूख मिटाने के लिए अनाज पैदा होगा।
गौरतलब है कि दो हफ्ते पूर्व करतल क्षेत्र के भंवरपुर गांव के 52 मजदूरों ने मनरेगा में काम न मिलने पर करीब करीब मृत हो चुकी घरार नदी की करीब दो किलोमीटर तक खोदाई कर उसे पानी से लबालब कर दिया था। इसके बाद ग्राम्य विकास विभाग के स्थानीय अधिकारियों ने वहां जबरन ‘मनरेगा से कार्य’ होने का शिलापट गाड़ दिया है, जिससे मजदूरों और अधिकारियों के बीच सीधा टकराव है।
एक अन्य मजदूर रामस्वरूप ने बताया कि मजदूरों का हौसला बढ़ाने के लिए आस-पास के गांवों के मजदूर यहां भोजन सामग्री खुद दान कर जा रहे हैं, जिससे यहां श्रमदान कर रहीं महिलाएं नहर पटरी में ही सभी मजदूरों के लिए भोजन भी पकाती हैं। इन श्रमदानियों की टोली में दो दर्जन महिला मजदूर भी शामिल हैं।
इनमें से एक सुमित्रा ने कहा कि यदि हर खेत को पानी मिला तो फसल भी पैदा होगी, इससे मेरा मालिक (घर का मुखिया) मजदूरी करने कभी परदेश नहीं जाएगा। इस बारे में बांदा सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता शरद सिंह चौहान ने बताया कि श्रमदान से नहर खोदाई की सूचना मिलने पर शनिवार को विभाग के कर्मचारी कमलेश को कार्यस्थल भेजकर कई मजदूरों से फोन पर बात की गई है, उनका यह कार्य सराहनीय है।
उन्होंने कहा कि हमने श्रमदान कर रहे मजदूरों को मजदूरी भुगतान करने का ऑफर दिया है, लेकिन वे (मजदूर) इसके लिए राजी नहीं है।

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