श्री शिक्षायतन कॉलेज में राष्ट्रीय ई- संगोष्ठी का आयोजन

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कोलकाता : श्री शिक्षायतन कॉलेज (कोलकता) के हिन्दी विभाग द्वारा ‘लैंगिक विमर्शः साहित्य, समाज और सिनेमा’ पर राष्ट्रीय ई- संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन विभाग की अध्यापिका प्रो. अल्पना नायक ने किया। संचालन के दौरान उन्होंने कहा कि एलजीबीटी समुदाय लैंगिक भेदभाव के कारण उत्पीड़न का शिकार है। हमें यही देखना है कि साहित्य और सिनेमा उनके साथ कितना न्यायकर पा रहे हैं। बीज वक्ता के रूप में असम विश्वविद्यालय के प्रो. जय कौशल ने सिनेमा और साहित्य के माध्यम से कई महत्त्वपूर्ण बिन्दुओं पर अपनी बात रखी। उन्होनें कहा कि यह प्रश्न उठाना चाहिए कि समाज में हम जेंडर को लेकर कितने जागरूक हैं? एलजीबीटी समुदाय के लोगों को देख कर हमारी प्रतिक्रिया कैसी होती है? समाज में स्त्री, एलजीबीटी , बाईसेक्सुअल,गे आदि अधिक उत्पीड़ित होते हैं। एलजीबीटी समुदाय के प्रति सकारात्मक सोच में पश्चिम की तुलना में भारतीय समाज बहुत पीछे है। सिनेमा में प्रसिद्ध कलाकारों के द्वारा इस विषय पर रोल अदा कराने का प्रचलन बढ़ा है। साहित्य में भी इन विषयों पर सहजता से लिखा जा रहा है ताकि समाज इस समुदाय को सहज रूप में स्वीकार कर सके। दूसरी वक्ता के रूप में पाती पुरोहित ने नारीवाद की नजर से पुरुषत्व विषय पर अपनी बात रखी। उन्होनें कहा कि लैंगिक विमर्श इंटर सेक्सुअलीटी सब एक दूसरे से संबंधित हैं पर लोग इस विषय पर बात करने से कतराते हैं। इस विषय में भाषा बड़ा रोल अदा करती है। श्यामलाल कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय की अध्यापिका डॉ. सुजाता ने कहा कि कि जैविक अंतर ही स्त्री-पुरुष के अंतर का नींव है। एक सेक्स है जो जन्म से मिलता है और जेंडर समाज तय करता है। समाज में बचपन के खिलौने से स्त्री-पुरुष के बीच भेदभाव शुरु हो जाता है। । कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ लेखक प्रदीप सौरभ ने की । उन्होंने कहा समाज स्त्री और पुरुष के तालमेल के बिना नहीं चल सकता है। प्रश्नोत्तर सत्र का संचालन डॉ रचना पाण्डेय ने किया। विभाग की अध्यापिका डॉ. प्रीति सिंघी ने धन्यवाद ज्ञापित किया एवं इस संगोष्ठी की रिपोर्टिंग डॉ. रेणु चौधरी ने किया।

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