सखी वसंत आया……

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कोलकाता :  निराला को याद करते हुए अर्चना संस्था कोलकाता की ओर से सूर्य कांत त्रिपाठी निराला जी की कविताओं की आवृत्ति और गीतों का गायन जूम ऑनलाइन पर किया गया। वसंतपंचमी के दिन निराला का जन्म 21फरवरी 1899 बंगाल के महिषादल रियासत मेदिनीपुर में वसंत पंचमी के दिन हुआ था।  छायावाद के चार स्तंभों में निराला हिंदी जगत में कवि, निबंधकार, उपन्यासकार , कहानीकार आदि साहित्यिक विषयों के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं।इस अवसर पर “अर्चना” की कई सदस्याओं ने निराला की कई रचनाओं का गायन किया।  हिम्मत चौरडिया, मृदुला कोठारी, इंदू चांडक, सुशीला चनानी, शशि कंकानी, संगीता चौधरी, बनेचंद मालू, भारती मेहता, नौरतनमल भंडारी, , डॉ वसुंधरा मिश्र, उषा श्राफ आदि ने भाग लिया। सखि वसंत आया-हिम्मत चौरडिया , स्नेह निर्झर बह गया-विद्या भंडारी , अभी न होगा मेरा अंत-सुशीला चनानी , गीत गाने दो मुझे-भारती मेहता ,केशर की कली की पिचकारी-इंदु चांडक और राम की शक्ति पूजा की आवृत्ति “होगी जय होगी जय पुरुषोत्तम नवीन” डॉ वसुंधरा मिश्र द्वारा की गई। वसंतोत्सव के अवसर पर स्वरचित कविताओं का भी पाठ किया गया। सुशीला चनानी की ये पंक्तियाँ बहुत पसंद की गईं – – गीजर हुए बंद /समेटी रजाई/शीत लहरों की हुई विदाई। नौरतन भंडारी की रचना” कह दे सारी अनकही बातें” , शशि कंकानी का मधुर गीत कृष्ण, बनेचंद मालू की रचनाएं, वसंत और बहार हैं दोनों जुडवा बहने, पंक्तियां श्रोताओं को पसंद आई। “ऋतुराज वसंत” और” वसंत की अनुभूति” सुनाई। संगीता चौधरी ने “चले आओ हम बेकरार हैं” , उषा सराफ ने बालमुकुंद गुप्त की वसंत विषयक कविता, शशि कंकानी ने” देखो आई वसंत बहार /कोयलिया कुहुक उठी”, भारती मेहता (अहमदाबाद) ने निराला के गीत की प्रस्तुति दी । विद्या भंडारी ने संचालन करते हुए निराला की प्रसिद्ध रचना “वर दे वीणा वादिनी वर दे “से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने।

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