सहचन की पत्तियों से चॉकलेट औऱ स्नैक्स बना रहे हैं पुणे के प्रमोद

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भारत के ज्यादातर राज्यों में सहजन की खेती बड़े पैमाने पर होती है। सेहत के लिहाज से सहजन की अहमियत काफी ज्यादा है। इसमें कई तरह के मल्टी विटामिन, प्रोटीन, एमीनो एसिड्स मौजूद होते हैं। देश में पिछले कुछ सालों से हेल्थ सप्लीमेंट्स के रूप में इसकी माँग बढ़ी है। कई स्टार्टअप सहजन की प्रोसेसिंग कर नए स्वास्थ्यप्रद उत्पाद बना रहे हैं। महाराष्ट्र के पुणे में रहने वाले प्रमोद पानसरे भी इसी का बिजनेस कर रहे हैं। वे पिछले दो साल से सहजन की पत्तियों और हल्दी की मदद से चॉकलेट, चिक्कियां, खाखरा, स्नैक्स तैयार कर देशभर में मार्केटिंग कर रहे हैं। फिलहाल वे हर महीने तीन लाख रुपए का बिजनेस कर रहे हैं।
30 साल के प्रमोद एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं। खेती उनके परिवार में होती रही है। 2012 में फूड टेक्नोलॉजी से बीटेक करने के बाद उन्होंने नौकरी के बजाय खुद का काम शुरू करने का फैसला किया। कुछ साल उन्होंने खजूर का बिजनेस किया। हालांकि इसमें उतनी आमदनी नहीं हुई और उन्हें काम बंद करना पड़ा। चूंकि घर-परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ती जा रही थीं, परिवार में कोई और कमाने वाला नहीं था, इसलिए न चाहते हुए भी प्रमोद एक फूड कंपनी में काम करने लगे। करीब 3 साल तक उन्होंने वहां काम किया। इस दौरान अलग-अलग फूड प्रोडक्ट के बारे में उन्हें जानकारी मिली। उसकी प्रक्रिया को भी समझने में मदद मिली।

प्रमोद कहते हैं कि सहजन सेहत के लिए फायदेमंद होता है, ये तो मुझे पहले से पता था, लेकिन काम के दौरान मुझे जानकारी मिली कि इससे प्रोडक्ट बनाकर फूड सप्लीमेंट्स के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। सबसे बड़ी बात कि इसके लिए हमें कहीं दूर जाने की भी जरूरत नहीं थी। हमारे आसपास ही भरपूर मात्रा में सहजन के प्लांट उपलब्ध हैं।
इसके बाद प्रमोद ने अपने घर पर ही इसे आजमाना शुरू किया। उन्होंने सहजन की पत्तियां और फलियों को सुखाकर एक पाउडर तैयार किया। फिर इसे लैब टेस्ट में भेजा, जहां पता चला कि इसमें हेल्थ के लिए जरूरी लगभग सभी न्यूट्रिशन भरपूर मात्रा में मौजूद हैं। उन्होंने खुद के खाने में भी इसका इस्तेमाल करना शुरू किया। कुछ दिनों बाद उन्हें इसका असर भी देखने को मिला।
प्रमोद कहते हैं- खुद इस्तेमाल करने के बाद मुझे लगा कि इसे कॉमर्शियल लेवल पर शुरू किया जा सकता है। कई लोग हैं जिन्हें हेल्दी फूड सप्लीमेंट्स की जरूरत है और वे ऐसी चीजों को लेना भी पसंद करेंगे। इसके बाद उन्होंने सहजन के पाउडर को पैक करके कुछ लोगों को इस्तेमाल के लिए दिए। वे कहते हैं कि कुछ लोगों ने इस्तेमाल के बाद पॉजिटिव रिस्पॉन्स दिया, लेकिन ज्यादातर लोग ऐसे थे जिन्होंने घर में इसे ले जाकर रख दिया। वे रेगुलर इसका इस्तेमाल नहीं कर रहे थे। जब हमने वजह जानने की कोशिश की तो पता चला कि पाउडर के रूप में होने और इसके टेस्ट की वजह से लोग कम पसंद कर रहे हैं। इसके बाद प्रमोद ने तय किया कि इसे पाउडर के रूप में सेल करने की जगह क्यों न प्रोडक्ट के रूप में कन्वर्ट किया जाए ताकि इसकी ब्रांड वैल्यू भी हो सके और ज्यादा से ज्यादा लोग इसका इस्तेमाल भी कर सकें।
साल 2018 में प्रमोद ने अपनी नौकरी छोड़ दी। करीब एक साल उन्होंने मार्केट रिसर्च पर फोकस किया। सहजन से क्या-क्या प्रोडक्ट बनाए जा सकते हैं, उनका प्रॉसेस क्या होगा? कितने लोग उन्हें खरीदेंगे? मार्केटिंग की अप्रोच क्या होगी? इसको लेकर उन्होंने काम किया।
इसके बाद दिसंबर 2018 से उन्होंने सहजन की पत्तियों और फलियों से चिक्कियां बनानी शुरू की। वे खुद ही इसे तैयार कर स्टॉल लगाकर बेचने लगे। प्रमोद कहते हैं कि हमने अपने प्रोडक्ट की कीमत बहुत कम रखी थी। इसलिए जो लोग हमारे स्टॉल पर आते थे, उनमें से ज्यादातर लोग प्रोडक्ट खरीद लेते थे। इस तरह कुछ महीनों तक हमने मार्केटिंग की। कुछ वक्त बाद प्रमोद को एक निवेशक मिल गया। उन्होंने 15 लाख रुपए का निवेश किया और पुणे में एक ऑफिस लेकर अपना काम शुरू किया। उन्होंने खुद की कंपनी रजिस्टर की। फिर फूड लाइसेंस सहित जरूरी डॉक्युमेंट्स जुटाए और बिजनेस शुरू कर दिया। कुछ महीनों तक उनका काम बढ़िया चला। इसके बाद 2020 में कोरोना की वजह से उनका काम प्रभावित होने लगा। लॉकडाउन लगने के बाद कुछ महीने तक उनका काम न के बराबर हुआ।
प्रमोद कहते हैं कि हमारे व्यवसाय पर कोरोना का असर तो पड़ा, कुछ नुकसान भी हुआ, लेकिन एक फायदा ये भी हुआ कि इसके बाद लोग हेल्दी फूड सप्लीमेंट्स पर जोर देने लगे। इससे हमें अपने बिजनेस का दायरा बढ़ाने में काफी मदद मिली। हमारे प्रोडक्ट्स की डिमांड बढ़ गई।
वे कहते हैं कि इस साल जब कोरोना की सेकेंड वेव ने तबाही मचाई तो यह भी कहा जाने लगा कि तीसरी लहर भी आएगी और यह बच्चों को ज्यादा प्रभावित करेगी। हालांकि इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है। फिर भी लोग अपने बच्चों की हेल्थ को लेकर अवेयर हो रहे हैं। वे हेल्दी फूड सप्लीमेंट्स पर जोर दे रहे हैं, लेकिन एक दिक्कत यह है कि बच्चे इन चीजों को खाने में कम दिलचस्पी रखते हैं। इसलिए हमने तय किया कि एक हेल्दी चॉकलेट उतारी जाए।
प्रमोद ने इस साल की शुरुआत में इसको लेकर काम करना शुरू कर दिया और मई में चॉकलेट की मार्केटिंग करने लगे। अभी वे तीन फ्लेवर में चॉकलेट बना रहे हैं। जिसमें डार्क, व्हाइट और मिल्क फ्लेवर शामिल है। इसमें सहजन के साथ हल्दी, काली मिर्च जैसे इम्यून बूस्टर शामिल हैं।
प्रमोद कहते हैं कि शुरुआत में हम स्टॉल लगाकर अपने उत्पाद की मार्केटिंग करते थे। धीरे-धीरे जब हमारे प्रोडक्ट की माँग बढ़ने लगी, कुछ लोग जानने लगे तो हमने रिटेलर्स और बड़े-बड़े होलसेल डीलर्स से सम्पर्क किया। उन्होंने ट्रायल के बाद हमारा उत्पाद लेना शुरू कर दिया। इसके बाद हमने सोशल मीडिया की मदद ली और अपने प्रोडक्ट का प्रमोशन करने लगे। हमने वॉट्सऐप ग्रुप भी बनाया। कई लोग फोन के जरिए भी ऑर्डर करते हैं।
प्रमोद के मुताबिक हर महीने वे 2 टन चॉकलेट और चिक्कियां बना रहे हैं। इसके साथ ही बड़े लेवल पर खाखरा भी तैयार करते हैं। हर महीने 100 से ज्यादा उनके पास ऑर्डर आ रहे हैं। पिछले महीने उन्होंने श्रीलंका में भी अपना प्रोडक्ट भेजा था। जल्द ही वे खुद की वेबसाइट लॉन्च करने वाले हैं। साथ ही अमेजन और इंडिया मार्ट जैसे प्लेटफॉर्म पर भी वे अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग करेंगे।
प्रमोद कहते हैं कि हमारे साथ करीब 15 लोग काम करते हैं। इनमें से ज्यादातर महिलाएं हैं। सबसे पहले हम सहजन की पत्तियों को सुखाते हैं। फिर उसका पाउडर तैयार करते हैं। इसके बाद उसमें शुगर फ्री गुड़, मूंगफली और ग्लूकोज मिलाकर सहजन की चिक्कियां तैयार करते हैं। इसके बाद इसकी क्वालिटी टेस्टिंग और पैकेजिंग का काम करते हैं। इसी तरह चॉकलेट तैयार करने के लिए भी हमने एक फॉर्मूला तैयार किया है। उसका हमें पेटेंट भी मिल चुका है। उस फॉर्मूले के साथ हल्दी और काली मिर्च मिलाकर मिला लेते हैं। फिर उसे एक मशीन के जरिए पिघला लिया करते हैं। इसके बाद उसकी शेपिंग और फिर पैकेजिंग का काम होता है।
ऑर्गेनिक चॉकलेट की बढ़ रही है माँग
आमतौर पर चॉकलेट को लेकर यह मान्यता रही है कि इससे सेहत को नुकसान पहुंचता है। खासकर के बच्चों को। इससे बचने के लिए हाल के कुछ सालों में ऑर्गेनिक और होममेड चॉकलेट की माँग बढ़ी है। देश में ऐसे कई स्टार्टअप हैं, जो इस तरह के उत्पाद बना रहे हैं।

(साभार – दैनिक भास्कर)

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