सामूहिक समृध्दि से ही होगा सतत आर्थिक विकास : डॉ. सुमन मुखर्जी 

0
147

फ्रेंच विद्यार्थियों को संबोधित किया
कोलकाता : भवानीपुर एडूकेशन सोसायटी कॉलेज के डायरेक्टर जनरल, मैनेजमेंट सलाहकार और कार्पोरेट प्रशिक्षक डॉ. सुमन मुखर्जी ने ग्रीन और सस्टेनेबिलिटी मार्केटिंग विषय पर 45 फ्रेंच विद्यार्थियों के एक समूह को संबोधित किया । पेरिस के फ्रेंच बिजनेस स्कूल ईएससीपी – ईसीओएल (ईकोल सुपिरियर दि कॉमर्स द पेरिस) से अध्ययन यात्रा पर आए स्नातकोत्तर के पैंतालीस विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर हो रही मार्केटिंग से संबंधित सामाजिक पर्यावरण और हरित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इकोले सुपिरियर दि कॉमर्स द पेरिस के मार्केटिंग और ब्रेडिंग प्रो. बेनोइट हेलब्रुन ने बताया कि वैश्विक स्तर पर किस प्रकार मार्केटिंग बिजनस के लिए विश्व के विभिन्न स्थानों की यात्रा आवश्यक है तभी युवाओं को हम विभिन्न परिस्थितियों को समझा सकते हैं।
46 वर्षों के शैक्षणिक अनुभवों से युक्त डॉ सुमन मुखर्जी ने अपने प्रारंभिक वक्तव्य में कहा कि हिंदू प्रकृति सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और धार्मिक संबंध से अधिक जुड़ी हुई है। प्रकृति को बचाने के लिए अपनी मूल जड़ों की ओर लौटने से ही प्रकृति को संरक्षित किया जा सकता है। आधुनिक बिजनेस मार्केटिंग की कला को विकसित करने के लिए परंपरागत मार्केटिंग की समस्याओं को नजरअंदाज कर उसको सुलझाने के विषय में सोचना होगा। उपभोक्ता की पारंपरिक सामाजिक और पर्यावरणीय मानसिकता को समझते हुए बाजार की स्थिति को सुदृढ़ करना होगा। समाज के जो तबका अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं उनको उचित मूल्य देना होगा इसके लिए बाजार में लचीलापन आवश्यक है तभी पूंजी बढ़ेगी ।”दि टेक्स्ट बुक ऑफ इकोनॉमी डेवलपमेंट” पुस्तक के लेखक डॉ. मुखर्जी ने “दि मदर टेरेसा इंटरनेशनल अवार्ड” द्वारा सम्मानित और 2014 में शिक्षा में सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार प्राप्त किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि समाज के पूर्ण विकास के लिए वैयक्तिक स्तर पर नहीं बल्कि सामूहिक स्तर पर समृद्धि होने से गरीबी जैसे मुद्दों से छुटकारा प्राप्त किया जा सकता है। भारतीय परिप्रेक्ष्य में डॉ. सुमन ने फ्रेंच विद्यार्थियों को निष्कर्ष रूप से आर्थिक विकास के लिए चार ” पी” प्रोडक्ट, प्राइस, प्रोमोशन और प्लेस की उपयोगिता बताई और वैश्विक स्तर पर विकास के नए आयामों जैसे एक्सेप्टेबिलिटी, एफोर्डेबिलिटी, एक्सेसबिलिटी और एवरनेस इन चार “ए” को पुनर्निर्मित करना होगा। फ्रांस ही नहीं विश्व के विभिन्न देशों और भारतीय मार्केटिंग और पर्यावरणीय परिप्रेक्ष्य को दोनों देशों के समाज की संस्कृति के सभी पहलुओं पर तुलनात्मक अध्ययन के द्वारा ही समझना होगा। फ्रेंच विद्यार्थियों के समूह की मेजबानी डॉ सुमन मुखर्जी ने की। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

seventeen − 12 =