साहित्य,सिनेमा और संस्कृति पर वेब संगोष्ठी का आयोजन

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कोलकाता : कोलकाता के सुप्रतिष्ठित कॉलेज खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज के हिंदी विभाग तथा आइक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में ‘हिंदी साहित्य एवं सिनेमा का अंतर्द्वंद्व’ विषय पर एक राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुबीर कुमार दत्त के स्वागत भाषण से हुआ। अतिथि एवं श्रोताओं का स्वागत करते हुए उन्होंने  साहित्य और सिनेमा के संबंध को उजागर किया । हिंदी विभाग और आईक्यूएसी के संयुक्त तत्त्वावधान में हुए इस कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि साहित्य और सिनेमा का सम्बंध काफी गहरा है। साहित्य के माध्यम से सिनेमा जीवन को नई दिशा देने का काम करता है। दिल्ली से जुड़े वरिष्ठ लेखक प्रो.जवरीमल्ल पारख ने बीज वक्तव्य दिया। अपने वक्तव्य में उन्होंने हिंदी सिनेमा के इतिहास पर चर्चा करते हुए  साहित्य और सिनेमा के शिल्पगत भेद की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि साहित्य और सिनेमा दोनों हमारी चेतना को उद्वेलित करते हैं, एक शब्दों के माध्यम से और एक दृश्यों के माध्यम से।उन्होंने साहित्यिक कृतियों में उपस्थित मूल्यों को सिनेमा के द्वारा व्यापक स्तर तक पहुँचाने की बात पर भी  बल दिया। प्रख्यात कवि एवं गीतकार देवमणि पांडेय ने सिनेमा में प्रयुक्त गीतों एवं गीतकारों की विडम्बनापूर्ण चिंताओं की ओर दर्शकों का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने साहित्यिक कृतियों और साहित्यिक कृतियों पर बनी फिल्मों को मूल्यपरक मानते हुए कहा कि हिंदी सिनेमा में संगीतबद्ध फिल्मों की एक लंबी परम्परा रही है। साथ ही साथ उन्होंने धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और साम्प्रदायिकता जैसे साहित्यिक विषयों पर आधारित फिल्मों की चर्चा की। कल्याणी विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं युवा आलोचक डॉ. हिमांशु ने कहा साहित्य और संस्कृति को सिनेमा और अन्य कला माध्यमों से जोड़ने की जरूरत है। सिनेमा में साहित्य की तरह सामंती और पूंजीवादी व्यवस्था के  बरक्स प्रतिरोध की क्षमता है। प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक श्री प्रहलाद अग्रवाल भारतीय ज्ञान परम्परा को नाटक के साथ-साथ सिनेमा में भी देखने की बात करते हैं। वे सिनेमा को कला के साथ व्यावसायिकता से जोड़ने की बात करते हैं। वे पार्श्व संगीत को सिनेमा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. शुभ्रा उपाध्याय ने कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए कहा कि सिनेमा और साहित्य एक दूसरे के पूरक हैं। सिनेमा  समाज और संस्कृति को कई स्तरों पर प्रभावित करता है और उनसे प्रेरणा भी लेता है। इस अवसर पर देश-विदेश से भारी संख्या में साहित्य-संस्कृति और सिनेमा प्रेमी जुड़े थें। अतिथि परिचय एवं तकनीकी सहयोग विभाग की शिक्षिका प्रो. मधु सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो. राहुल गौड़ ने दिया।

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