साहित्य का भविष्य नौजवानों के जुड़ने से ही सुरक्षित है- डॉ. कुसुम खेमानी

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कोलकाता। भारतीय भाषा परिषद में आयोजित 27वां हिंदी मेला नौजवानों की इतनी बड़ी उपस्थिति से सरस्वती का आंगन बन गया है। साहित्य का भविष्य नई पीढ़ी के जुड़ने से ही सुरक्षित है। मैं आज विद्यार्थियों और नौजवानों के बीच आकर बहुत गौरव का अनुभव कर रही हूँ। 27 वर्षों से आयोजित हो रहा यह हिंदी मेला कोलकाता की एक प्रमुख पहचान बन चुका है और मैं इसके साथ हृदय से जुड़ी हुई है। भारतीय भाषा परिषद की अध्यक्ष कुसुम खेमानी ने आज यह बात हिंदी मेला के दूसरे दिन कही।
हिंदी मेला के दूसरे दिन काव्य आवृत्ति प्रतियोगिता का अयोजन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों पटल पर हुआ। इसमें राज्य समेत देश के अलग-अलग संस्थानों से करीब 430 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। ‘शिशु’ वर्ग और ‘अ’ वर्ग के निर्णायक के रूप में उदय राज सिंह, मंजू श्रीवास्तव और डॉ. रामप्रवेश रजक उपस्थित थे। कवि उदय राज सिंह ने कहा कि बंगाल में कविता आवृत्ति की एक दीर्घ परम्परा है और अब हिंदी में भी यह सर्वव्यापी हो रही है। मंजू श्रीवास्तव ने कहा कि नई पीढ़ी में कविता से प्रेम मानवता से प्रेम की ओर उन्मुख करेगा और डॉ रामप्रवेश रजक ने कहा कि नई पीढ़ी के लोगों द्वारा कंठस्थ कविता का पाठ करना उनके बढ़ते आत्मविश्वास का सूचक है। वे हिंदी मेला में अच्छे संस्कार पा रहे हैं। ‘क’ वर्ग के निर्णायक के रूप में मृत्युंजय जी, अवधेश प्रसाद सिंह, डॉ इतु सिंह और पूनम सोनछात्रा जी उपस्थित थी। प्रमुख मीडिया टिप्पणीकार मृत्युंजय जी ने कहा कि हिंदी मेला कोलकाता का गौरव है और यह हिंदी की नई पीढ़ी के बौद्धिक उत्थान का काम कर रहा है।

भाषाविद अवधेश प्रसाद सिंह ने कहा कि हिंदी मेला में बच्चे शुद्ध हिंदी बोलना सीख रहे हैं जबकि घरों में वे काफी अशुद्ध हिंदी बोलते हैं। प्रो. इतु सिंह ने व्यापक उपस्थिति को देख कर कहा कि हिंदी मेला साहित्य के लोकप्रियकरण में बहुत सहायक हो रहा है और कवयित्री पूनम सोनछात्रा ने कहा कि मैं कॉलेज, विश्वविद्यालय और स्कूल के विद्यार्थियों की काव्य आवृत्ति को देख कर अभिभूत हूँ। मेले के प्रथम दिन आयोजित लघु नाटक मेले में इस वर्ष का सर्वश्रेष्ठ नाटक नाट्य मंजरी, विशेष पुरस्कार आर. बी. सी. सांध्य महाविधालय, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक ओमप्रकाश प्रसाद, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता प्रदीप दास, सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री मोनिका साव और सर्वश्रेष्ठ बाल अभिनेता नेहा झा को मिला। ‘शिशु’ वर्ग का शिखर सम्मान सोनल साव, हरा प्रसाद प्राइमरी स्कूल, प्रथम स्थान पनभ श्रॉफ, लक्ष्मीपत सिंघानिया अकादमी, द्वितीय स्थान ध्रुविका सोनछात्रा, डी. पी. एस., तृतीय स्थान स्वराज पाण्डेय, जनता आदर्श विद्यालय, चतुर्थ स्थान पीहू मिश्रा, हावड़ा नवज्योति, पंचम स्थान किंजल पासवान, भोलानाथ प्राथमिक विद्यालय, छठवां स्थान अंकिता गुप्ता, केंद्रीय विद्यालय, सातवां स्थान कशिश पासवान और विशेष प्रोत्साहन पुरस्कार अदिति सिंह, सेंट हेलेन्स स्कूल को मिला।

कार्यक्रम का सफल संचालन मनीषा गुप्ता, सूर्य देव रॉय, पूजा सिंह और राजेश सिंह ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन पंकज कुमार सिंह ने दिया। इसके पूर्व 26 दिसम्बर को हिन्दी मेले का उद्घाटन वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विजय बहादुर सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि यह मेला स्वाधीनता के 75वें साल का पालन मानवता के उत्सव के रूप में कर रहा है। राममोहन हाल के उषा गांगुली-अजहर आलम मंच पर उद्घाटन समारोह में उन्होंने ये बातें कहीं। हिंदी मेला का आयोजन सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन प्रतिष्ठित भारतीय भाषा परिषद के साथ मिलकर कर रहा है। आरंभ में कोरोना काल में दिवंगत लेखकों और कलाकारों के प्रति डॉ. शुभ्रा उपाध्याय ने श्रद्धांजलि अर्पित की। हिंदी मेला में शिक्षाविद प्रो. सोमा बंद्योपाध्याय को प्रो. कल्याणमल लोढ़ा शिक्षक सम्मान प्रदान किया गया। प्रो. सोमा बंद्योपाध्याय ने अपने जीवन संघर्षों के बारे में बताते हुए कहा कि मेरा जीवन हिंदी के उत्थान के लिए समर्पित है और मैं हिंदी मेला का अभिन्न अंग हूँ।

कोलकाता में हिंदी नाटक की परंपरा शुरू करने वाले माधव शुक्ल के नाम पर स्थापित नाट्य सम्मान ओम पारीक को प्रदान किया गया। अभिनंदन पत्र का पाठ अनिता राय और सुशील पांडेय ने किया एवं परिचय मधु सिंह ने दिया। मंच व्यवस्था में धनंजय प्रसाद, सपना कुमारी,जूही कर्ण, विकास जायसवाल, सुमिता गुप्ता, अनुपमा सिंह,श्रीप्रकाश गुप्ता आदि शामिल रहें।
लोढ़ा जी की सुपुत्री सुषमा सिंघवी ने कहा कि हिंदी की वीणा में मेरा भी स्वर शामिल है। विश्वंभर नेवर ने कहा कि 27 वर्षों से जारी यह मेला इससे जुड़े संस्कृति कर्मियों की भावात्मक मजबूती का उदाहरण है। यूको बैंक के महाप्रबंधक नरेश कुमार ने कहा कि हिंदी मेला ऐसी जगह है जहां से सैकड़ों नौजवान उभरकर देश की सेवा कर रहे हैं।  उद्घाटन समारोह का संचालन करते हुए प्रो. संजय जायसवाल ने कहा कि 27 दिसंबर से 1 जनवरी तक हिंदी मेला भरतीय भाषा परिषद में प्रतिदिन 11 बजे शुरू होगा। हिंदी मेला भारतीय भाषाओं और संस्कृतियों का आंगन है। मिशन के महासचिव डॉ राजेश मिश्र ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता डॉ. शंभुनाथ ने की। इस अवसर पर विशेष तौर पर उपस्थित थे रामनिवास द्विवेदी, मीरा सिन्हा, मृत्युंजय श्रीवास्तव। लघु नाटक प्रतियोगिता के निर्णायक महेश जायसवाल, मंजू श्रीवास्तव और गणेश सर्राफ शामिल रहें। इस मौके पर रंग शिल्पी की ओर से मुर्दों का गांव नाटक की अतिथि प्रस्तुति हुई।

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