सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में हुआ नेशनल एचीवमेंट सर्वे

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सहेलियों से मिलकर उत्साहित हुईं छात्राएँ

कोलकाता : सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में हाल ही में नेशनल एचीवमेंट सर्वे यानी राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण सम्पन्न हुआ। यह सर्वेक्षण 5वीं कक्षा की छात्राओं के लिए हुआ। इसमें कुल 119 छात्राओं में से 104 छात्राओं ने भाग लिया। इस दौरान कोविड सम्बन्धी सभी नियमों का पालन किया गया और स्कूल के बाहर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मी सक्रिय रहे। छात्राओं में भी उत्साह देखा गया। इस अवसर पर प्रिंसिपल, शिक्षिकाओं और छात्राओं ने अपने अनुभव साझा किये –


कोइली दे (प्रिंसिपल, सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल) –  स्कूल में इतने लम्बे समय के बाद छात्राओं को देखना एक अद्भुत अनुभव था। ऐसा लगा जैसे कि स्कूल की इमारत में जान आ गयी। सर्वे सुरक्षा सम्बन्धी सभी नियमों का पालन करते हुए बहुत अच्छी तरह सम्पन्न हुआ। यह भावुक करने वाला दिन था।


विदिशा पांजा (हेडमिस्ट्रेस) – डेढ़ साल बाद पाँचवीं कक्षा की छात्राएँ स्कूल आयीं। छात्राओं को देखना एक अच्छा अनुभव रहा। सर्वे में 91 प्रतिशत छात्राओं ने भाग लिया। कोविड -19 सम्बन्धी सभी नियमों का पालन किया गया। कुल मिलाकर यह अनुभव बहुत अच्छा रहा।


डियाना बनर्जी ( शिक्षिका, अंग्रेजी एवं इतिहास) – बच्चों को लगभग 2 साल के बाद स्कूल में देख पाना, यह बहुत अलग अनुभव था। बच्चियाँ बहुत उत्साहित लग रही थीं। नेशनल सर्वे का भी उनका यह पहला अनुभव था। उनको थोड़ा संशय था पर वे दिलचस्पी ले रही थीं। सम्बन्धित सेक्शन की शिक्षिकाओं को भी सर्वे में भाग लेना था। शिक्षिका के रूम में हमें शिक्षण पद्धति और संसाधनों को लेकर जानकारी देनी थी।


पूनम धवन (शिक्षिका, गणित एवं ईवीएस) – 2 साल के बाद अपने सामने छात्राओं को स्कूल में देख पाना एक आनन्ददायक अनुभव रहा। स्कूल ने सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करने पर हमेशा जोर दिया। नेशनल सर्वे में भाग लेने के लिए बच्चियाँ बहुत उत्साहित थीं। सभी शिक्षिकाओं और कर्मचारियों ने कोविड -19 का टीका लगवा लिया है। मैंने भी सर्वे में भाग लिया और मुझे शिक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी देनी थी।


मंजीत कौर (शिक्षिका, हिन्दी) – 2 साल के लम्बे समय के बाद स्कूल आकर छात्राएँ बहुत उत्साहित थीं। स्कूल ने सुरक्षा सम्बन्धी नियमों का पर्याप्त ध्यान रखा। भीड़ को नियंत्रित करने की व्यवस्था की गयी। चयनित छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ सर्वेक्षण में भाग लिया। मैंने भी अपनी शिक्षण पद्धति की जानकारी दी।


अरित्रि नन्दी (छात्रा)- मुझे सर्वे बहुत ही आसान लगा। अंग्रेजी और मैथेमेटिक्स (गणित) का पेपर सबसे आसान था। मुझे सबसे अच्छा लगा कि मैं इतने लम्बे समय के बाद अपनी सहेलियों के पास बैठने का अवसर पा सकी। हालांकि हमें एक दूसरे के पास जाने की अनुमति नहीं थी लेकिन उनको अपने सामने देखना ही मुझे खुशी से भर गया।

 

ओजस्वी थलादि (छात्रा) – सर्वे के पहले हम सब नर्वस थे। मैं नर्वस थी पर उत्साहित भी थी पर जब प्रश्नपत्र देखा तो यह अद्भुत था। कुछ प्रश्नों को छोड़कर सारे प्रश्नों के उत्तर आते थे। अपनी सहेलियों से इतने लम्बे समय बाद मिलना मुझे बहुत अच्छा लगा।

 

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