स्थापत्य का अद्भुत सौन्दर्य है प्राचीन श्री श्री नागरेश्वर महादेव मंदिर

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टीम शुभजिता

कई बार हमारे पास बहुत कुछ अद्भुत होता है मगर हमें वह नजर ही नहीं आता…कोलकाता के बड़ाबाजार इलाके में कई ऐसे ऐतिहासिक स्थल हैं…जो सुन्दर हैं…मनोरम हैं…मगर हम उनको या तो जानते ही नहीं और अगर अगर जानते भी हैं तो इनके महत्व को समझ ही नहीं पाते। शुभजिता की पड़ताल में बड़ाबाजार और उसके आस – पास की जगहों को छानते हुए कई ऐसी जगहें हमें मिल रही हैं…ऐसे लोगों के बारे में पता चल रहा है जिनके अवदान को सामने लाया ही नहीं गया और आज बात एक एक ऐसे शिवालय की…..जो है तो महानगर के बीचों – बीच है मगर इंटरनेट पर इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं मिलती….।


हम बात कर रहे हैं 35, स्टैंड रोड पर स्थित श्री श्री नागरेश्वर महादेव मंदिर की। दक्षिण भारतीय शैली की याद दिलाता शिवालय बहुरंगी प्रतिमाओं और अद्भुत शिल्प का जीवन्त उदाहरण है। यह बताता है कि कोलकाता से रिश्ता हिन्दी भाषी प्रदेशों का ही नहीं बल्कि सुदूर दक्षिण भारत का भी है।
दक्षिण स्थापत्य शैली बना यह मंदिर 100 साल पुराना है…मंदिर को पंडित चन्द्रशेखर शास्त्री के पूर्वजों ने बनवाया था…जो मूलतः आन्ध्र प्रदेश से हैं। यहाँ पर शिवलिंग के अतिरिक्त माता पार्वती, बाल कृष्ण, हनुमान, गणेश जैसे कई देवी – देवताओं की मूर्तियाँ हैं मगर इस मंदिर की खूबसूरती को जो और बढ़ा देती है, वह है इसकी दीवारों पर उकेरी गयी अद्भुत प्रतिमाएँ…..मंदिर बहुत विशाल नहीं हैं मगर अपनी अप्रतिम सुन्दरता और बहुरंगी स्थापत्य शैली और इसकी बारीक कारीगरी के कारण यह सबको लुभाता है।

कोलकाता के प्राचीन शिव मंदिरों में इस मंदिर का नाम शामिल है। मंदिर का संरक्षण श्री श्री नागरेश्वरी नागरेश्वर महादेव मंदिर मैनेजिंग ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। चन्द्रशेखर शास्त्री खुद यहाँ पिछले 35 साल से मंदिर की देखभाल और संरक्षण समेत अन्य गतिविधियों से जुड़े हैं। यहाँ शिवरात्रि का त्योहार धूम-धाम से मनाया जाता है और इस बार भी वैसा ही उल्लास रहा है।

कहते हैं कि ज्ञान एक महासमुद्र की तरह है और इसी महासमुद्र की तरह है यह संसार…जिसका छोटा सा कण है हमारा – आपका शहर जिसे संवारने और बगैर पक्षपात के इतिहास को सामने लाने और विकसित करने की जिम्मेदारी सरकार या प्रशासन की ही नहीं….हम सबकी है….तो अगर आपको ऐसे ही खूबसूरत टुकड़े मिलें तो उनको सहेजिए और जानकारी हम तक पहुँचा दीजिए…हम इन रत्नों को बिखेरकर संसार को और सुन्दर बनाने में यह छोटा सा प्रयास अपनी शक्ति भर करते रहेंगे…।

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