स्मार्ट फ़ोन से पैदा समस्याओं को संजीदगी से उठाती फ़िल्म ‘नोमोफोबिया यंत्र’

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कोलकाता :  स्मार्ट फोन ने आधुनिक जीवन में जहां तमाम सुविधाएं प्रदान की हैं, वहीं तमाम विकृतियां भी पैदा की हैं। एक ओर इसकी गिरफ्त में आकर युवा पीढ़ी गुमराह हो रही है और फोन का सतत उपयोग एक लत बन गयी है। सुपरिचित रंगकर्मी शिव जायसवाल की नयी हिन्दी शार्ट फ़िल्म इसी समस्या को केन्द्र में रखकर बनायी गयी है। फिल्म का नाम है फ़िल्म ‘नोमोफोबिया यंत्र’। इस फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग  गत रविवार की देर शाम न्यू टाउन में की गयी। इस अवसर पर शिव जायसवाल ने कहा कि अपनी पिछली फ़िल्मों की तरह इस बार भी उन्होंने युवाओं को की समस्याओं को केन्द्र में रखा है। स्मार्ट मोबाइल फ़ोन खोने या पास ना होने पर जो चिंता होती है वह बीमारी नोमोफोबिया कहलाती है। फ़िल्मकार ने फ़ोन के चलते लोगों के सम्बंधों में आते ठंडेपन को तो उजागर किया ही है और फ़ोन के कारण युवाओं में पैदा हो रही तमाम समस्याओं व त्रासदियों से एक -एक कर पर्दा उठाया है। गैंगरेप जैसी घटना इसी क्रम में घटती है। नोमोफोबिया की कहानी भी शिव जायसवाल ने ही लिखी है और निर्देशन भी किया है। इस फ़िल्म की यह भी खा़सियत है कि इसमें कई सुपरिचत रंगकर्मियों ने अभिनय किया है। फ़िल्म के सिनेमेट्रोग्राफ़र श्रीरूप मोदक और रिक हैं। सम्पादन संजय साहा और केशव का है। फ़िल्म में अन्ना दुग्गर भट्टाचार्य, स्मित सिंह, डॉ.अभिज्ञात, रश्मि शर्मा, जयनारायण प्रसाद, शिव जायसवाल, संजीव राय, श्रीरूप मोदक, राकेश सिंह, कोमल दुबे, विशाल कुमार गुप्ता, अरुणाभ दास, सौम्यजित मजुमदार, आकाश (गोहन) जायसवाल, सुनिल यादव विकेश, श्मामली रॉय, राज बंधु, अनुराग सेठ, चंदन यादव, अभिषेक यादव, मोहित कुमार प्रसाद, राहुल चौधुरी, ऋतोश्री दास ने अपने अभिनय का जादू चलाया है। शिव जायसवाल फ़िल्म प्रोडक्शन के बैनर तले यह फि़ल्म यूट्यूब के दर्शकों के लिए भी होगी।

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