स्वामी विवेकान्द के विचारों के प्रसार के लिए 18 हजार किमी की यात्रा पर हैं दिव्यांग थंगराजा

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कोलकाता : कन्याकुमारी के विवेकानंद शिला स्मारक के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 101 दिनों की भारत परिक्रमा (11सितंबर से 20 दिसम्बर तक) को संपूर्ण करने के लिए निकले दिव्यांग व कर्मठ कार्यकर्ता आर.थंगराजा। ‘एक भारत-विजयी भारत’ अभियान के तहत स्कूटी से कन्याकुमारी से भारत के प्रत्येक राज्य की राजधानी से होते हुए कुल 18 हजार किलोमीटर की भारत परिक्रमा आरम्भ की है। महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख-लेह, असम, अरूणाचल, झारखंड होते हुए कोलकाता से ओडिशा की ओर प्रस्थान किया है। अभी तक वे 15,120 km तक की यात्रा तय कर चुके हैं।  सेंट्रल पार्क में कार्यकर्ताओं ने एक छोटे कार्यक्रम का आयोजन कर उन्हें विदाई दी।  उन्होंने समाज के सभी वर्गों को सन्देश दिया कि स्वामी विवेकानंद के विचार घर-घर पहुँचे, कन्याकुमारी स्थित विवेकानंद शिला स्मारक की प्रेरणास्पद कथा जन-जन तक पहुंचे, दिव्यांग भी यदि दृढ़ निश्चय कर लें तो वे भी हर कार्य को करने में समर्थ हो सकते हैं। यह यात्रा कन्याकुमारी में स्थित विवेकानंद शिला स्मारक के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में  गत 11 सितम्बर को शुरू की गयी थी जो 20 दिसम्बर को कन्याकुमारी में ही समाप्त होगी। इस दौरान उनके द्वारा विद्यालयों और महाविद्यालयों में स्वामी विवेकानंद व विवेकानंद शिला स्मारक के बारे में लोगों को बताया जाएगा। थंगराजा इससे पहले भी चार यात्राएं कर चुके हैं, जिनमें उन्होंने ट्रायसाइकिल से कन्याकमारी से चेन्नई , कन्याकुमारी से कोलकाता की यात्रा की है. जबकि मोटर साइकिल से उन्होंने कन्याकुमारी से दार्जिलिंग, व  कन्याकुमारी से अमरावती की यात्रा की है। थंगराजा ने इलेक्ट्रनिक व कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है और विवेकानन्द केन्द्र, कन्याकुमारी में रेलवे सूचना केन्द्र में कार्यरत हैं। स्वामी विवेकानन्द की 150वीं जयन्ती पर उन्होंने 2013 में कन्याकुमारी से चेन्नई की 1100 किमी और कन्याकुमारी से कोलकाता  तक ट्राइसाइकिल से 2850 किमी से पूरी की।

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