हमारी जातीय एकता की भाषा है हिंदी

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कोलकाता :   कोलकाता की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन की ओर से ‘भारतीयता के विविध आयाम और हिंदी’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का आयोजन किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भारतीय भाषा परिषद के निदेशक प्रो. शंभुनाथ ने कहा कि हिंदी भारतीय ज्ञान -परंपरा और संस्कृति की भाषा होने के कारण पूरे देश को जोड़ने का काम कृती है। बतौर मुख्य वक्ता वरिष्ठ आलोचक अजय तिवारी ने कहा कि हिंदी हमारी पहचान और अस्मिता की भाषा है।हिंदी भारत की सांस्कृतिक एकता और विविधता की पोषक है। हिंदी ने हमेशा औपनिवेशिक सत्ता के बरक्स लोकसत्ता को खड़ा किया। चर्चित युवा आलोचक वैभव सिंह ने कहा कि
हिंदी साझी संस्कृति की विरासत है।हिंदी का विकास सत्ता के गलियारों से नहीं बल्कि भारत के सामान्य जीवन की हलचलों से हुआ है। इस अवसर पर मारीशस से प्रसिद्ध लेखिका सुरीत रघुनंदन ने कैरिबियाई देशों में हिंदी की स्थिति पर विस्तार से चर्चा किया।उन्होंने कहा कि हिंदी भौगोलिक सीमाओं से परे भारतीयों को जोड़ने का काम कर रही है।कल्याणी विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर विभा कुमारी ने कहा कि हिंदी भाषा ने प्रारंभ से ही पूरे देश के बीच एक पुल की तरह काम कर रही है।हिंदी ने ही पूरे देश को एकता के सूत्र में पिरोया। इस अवसर स्वागत वक्तव्य देते हुए संस्था के संरक्षक रामनिवास द्विवेदी जी ने कहा कि हिंदी का रूप बहुत लचीला और समावेशी है। संयोजक प्रो.संजय जायसवाल ने कहा कि हिंदी को अपने जीवन और आचरण में प्राथमिकता देने की जरूरत है। कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए प्रो.कलावती कुमारी ने कहा कि हिंदी ने हमारी हीनता को दूर करते हुए स्वाभिमान से जोड़ती है।कार्यक्रम का संयोजन मधु सिंह और राहुल गौड़ ने किया।धन्यवाद ज्ञापन देते हुए संस्था के उपाध्यक्ष मृत्युंजय जी ने सभी आमंत्रित वक्ताओं के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि हिंदी भारतीयता की अवधारणा को बल प्रदान करती है।

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