हाईवे के बीच आ रहा 134 साल पुराना मंदिर, नींव समेत किया जाएगा स्थानांतरित

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नयी दिल्ली । लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन बनाने का काम चल रहा है। इस हाईवे पर कछियानी खेड़ा के एक 134 साल हनुमान मंदिर बीच में आ रहा है। अब इस मंदिर को अत्याधुनिक तकनीक से हाईवे पर पीछे की ओर खिसकाया जाएगा। इसके लिए एनएचएआई ने एक कंपनी से अनुबंध किया है। इंजीनियर मशीनों और जैक के जरिए पूरे मंदिर परिसर को इस तरह हटाएंगे कि मंदिर और वहां लगे विशाल पेड़ का मूलस्वरूप यथावत बना रहे। ऐसा करने में करीब 2 महीने का समय लगेगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये काम किस तरह किया जाता है। मंदिर ही नहीं मकानों को भी एक जगह से दूसरी जगह पर उठाकर रखवाया जा सकता है। आखिर इस काम को कौन से लोग करते हैं और इसमें कितना खर्च आता है। चलिए आपको बताते हैं।
इस तरह एक जगह से दूसरी जगह स्थानांतरित की जाती हैं इमारत
इस तरह के काम अभी देश में कुछ प्राइवेट कंपनियां कर रही हैं। इसमें आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है। इस काम में सावधानी बेहद जरूरी है। ये काफी धैर्य का काम है। इसमें जैक के जरिए पहले बिल्डिंग को ऊपर उठाया जाता है। इसमें 20 दिन से लेकर एक महीने तक का समय लग जाता है। इसके बाद जाकर बिल्डिंग तीन से चार फीट ऊपर उठ पाती है। बिल्डिंग को नींव सहित उठाया जाता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि इससे बिल्डिंग की मजबूती पर कोई असर नहीं पड़ता है। बिल्डिंग को ऊपर उठाने के बाद उसे मशीनों की मदद से धीरे-धीरे खिसकाया जाता है।
कितना आता है खर्च
इस काम को करने में खर्च काफी कम आता है। अगर आप मकान या बिल्डिंग को गिराकर दूसरी जगह बनवाएंगे तो खर्चा काफी आता है। इस तरह से अगर आप मकान को शिफ्ट कराते हैं तो खर्चा काफी कम आता है। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, जो प्राइवेट कंपनियां इस काम का ठेका लेती हैं वो मकान को कितनी दूर शिफ्ट करना है उस हिसाब से रुपये चार्ज करती हैं। एक्सपर्ट बताते हैं कि कंपनियां पुराने मकान को एक से तीन फीट तक लिफ्ट करने के लिए करीब 200 से 250 रुपये प्रति वर्गफीट के हिसाब से ठेका लेती हैं। इससे ऊपर मकान लिफ्ट कराने पर प्रति वर्गफीट 50 रुपए फीट के हिसाब से अतिरिक्त चार्ज देना होता है।
चार-पांच मंजिला मकान भी हो सकता है लिफ्ट
एक्सपर्टस के मुताबिक, अगर मकान का नीचे का लैंटर मजबूत हो और दीवारें दो ईंट की चौड़ाई की हों तो चार-पांच मंजिला मकान भी अधिकतम पांच-छह फीट तक शिफ्ट व लिफ्ट किया जा सकता है। खुले में बने मकान को लिफ्ट करने में आसानी होती है। इसमें खर्च भी कम आता है। अगर मकान को अपने स्थान से खिसकाकर अन्य जगह शिफ्ट किया जाएगा तो खर्च बहुत आता है। शिफ्टिंग में तकनीक ज्यादा इस्तेमाल होती है, खर्च बढ़ता है जो कि कभी-कभी मकान की लागत से ज्यादा हो सकता है। इसलिए उसे ज्यादा दूर तक शिफ्ट नहीं कराया जाता।
ऐसे लिफ्ट किया जाता है मकान
इसमें सबसे पहले मकान को खाली कराकर अंदर के फर्श को खोदा जाता है और नींवों को साइड से उखाड़कर दासे की पटिया के नीचे लोहे के एंगल फंसाए जाते हैं। इसके बाद समूचे एंगलों को वेल्डिंग करके एक समान बेस तैयार किया जाता है और उसके नीचे जैक लगाए जाते है। मकान के साइज के हिसाब से जैक लगाए जाते हैं। सामान्य साइज के मकान में 200 से 300 जैक लगाए जाते हैं। इसके बाद इन्हें एक साथ आधा-आधा इंच उठाना शुरू किया जाता है। जैक के लीवर को उठाने के लिए मजदूर भी लगाए जाते हैं। इन मजदूरों को हेड मिस्त्री कमांड देता है। ये मजदूर कमांड मिलने के बाद एक साथ सभी जेक को आधा-आधा इंच ऊपर उठाते हैं। जब सभी जैक आधा इंच ऊपर आ जाते हैं तब दोबारा से फिर एक-एक करके सभी जैक लीवर के सहारे आधा इंच उठाए जाते हैं। यह प्रक्रिया दिन भर चलती है।

(साभार – नवभारत टाइम्स)

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