कृषि की अधिष्ठात्री देवी हैं सीता

ऋग्वेद में अकेले राम नहीं सीता का भी उल्लेख मिलता है। ऋग्वेद ने सीता को कृषि की देवी माना है। बेहतर कृषि उत्पादन और भूमि के लिए दोहन के लिए सीता की स्तुतियां भी मिलती हैं। ऋग्वेद के 10वें मंडल में ये सूक्त मिलता है जो कृषि के देवताओं की प्रार्थना के लिए लिखा गया है। वायु, इंद्र आदि के साथ सीता की भी स्तुति की गई है। काठक ग्राह्यसूत्र में भी उत्तम कृषि के लिए यज्ञ विधि दी गई है उसमें सीता के नाम का उल्लेख मिलता है तथा विधान बताया गया है कि खस आदि सुगंधित घास से सीता देवी की मूर्ति यज्ञ के लिए बनाई जाती है।ऋग्वेद में कोष की आंघष्ठात्री देवी सीता को स्तुति की गयी है। इसी प्रकार अथववेद में भी सीता का स्तवन किया गया है। सामवेद में भी सीता की स्तुति है। वैदिक साहित्य में राम का उल्लेख अनेक स्थलों पर हुआ है।

१. वह रेखा जो जमीन जोतते समय हल की फाल के धँसने से पड़ती जाती है । कूँड़ । विशेष—वेदों में सीता । कृषि की अधिष्ठात्री देवी और कई मंत्रों की देवता हैं । तैत्तिरीय ब्राह्मण में सीता ही सावित्री और पाराशर गृह्यसूत्र में इंद्रपत्नी कही गई हैं ।

२. मिथिला के राजा सीरध्वज जनक की कन्या जो श्रीरामचंद्र जी की पत्न्नी थी । विशेष—इनकी उत्पत्ति की कथा यों है कि राजा जनक ने संतति के लिये एक यज्ञ की विधि के अनुसार अपने हाथ से भूम ि जोती । जुती हुई भूमि की कूँड़ (सीता) से सीता उत्पन्न हुईं । सयानी होने पर सीता के विबाह के लिये जनक ने धनुर्यज्ञ किया, जिसमें यह प्रतिज्ञा थी कि जो कोई एक विशेष धनुष को चढ़ावे, उससे सीता का विवाह हो । अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र कुमार रामचंद्र ही उस धनुष को चढ़ा और तोड़ सके इससे उन्हीं के साथ सीता का विवाह हुआ । जब विमाता की कुटिलता के कारण रामचंद्र जी ठीक अभिषेक के समय पिता द्वारा १४ वर्षों के लिये वन में भेज दिए गए, तब पतिपरायण सती सीता भी उनके साथ बन में गईं और वहाँ उनकी सेवा करती रहीं । वन में ही लंका का राजा रावण उन्हें हर ले गया, जिसपर राम ने बंदरों की भारी सेना लेकर लंका पर चढ़ाई की और राक्षसराज रावण को मारकर वे सीता को लेकर १४ वर्ष पूरे होने पर फिर अयोध्या आए और राजसिंहासन पर बैठे । जिस प्रकार महाराज रामचंद्र विष्णु के अवतार माने जाते हैं, उसी प्रकार सीता देवी भी लक्ष्मी का अवतार मानी जाती हैं और भक्तजन राम के साथ बराबर इनका नाम भी जपते हैं । भारतवर्ष में सीता देवी सतियों में शिरोमणि मानी जाती हैं । जब राम ने लोकमर्यादा के अनुसार सीता की अग्नि- परीक्षा की थी, तब स्वयं अग्निदेव ने सीता को लेकर राम को सौंपा था । पर्या॰—वैदेही । जानकी । मैथिली । भूमिसंभवा । अयोनिजा । यौ॰—सीता की मचिया=एक प्रकार का गोदना जो स्त्रियाँ हाथ में गुदाती हैं । सीता की रसोई=(१) एक प्रकार का गोदना । (२) बच्चों के खेलने के लिये रसोई के छोटे छोटे बरतन । सीता की पँजीरी=कर्पूरवल्ली नाम की लता ।

३. वह भूमि जिसपर राजा की खेती होती हो । राजा की निज की भूमि । सीर ।

४. दाक्षायणी देवी का एक रूप या नाम ।

५. आकाशगंगा की उन चार धाराओं में से एक जो मेरु पर्वत पर गिरने के उपरांत हो जाती है । विशेष—पुराणों के अनुसार यह नदी या धारा भद्राश्व वर्ष या द्विप में मानी गई है ।

६. मदिरा ।

७. ककहो का पौधा ।

८. पातालगारुड़ी लता ।

९. एक पर्णवृत्त जिसके प्रत्येक चरण में रगण, तगण, मगण, यगण और रगण होते हैं । उ॰—जन्म बीता जात सीता अंत रीता बावरे ! राम सीता राम सीता राम सीता गाव रे । छंजः॰, पृ॰ २०७ ।

१०. सीताध्यक्ष के द्वारा एकत्र किया हुआ अनाज ।

११. जैनों के अनुसार विदेह की एक नदी का नाम ।

१३. हल से जुती हुई भूमि (को॰) ।

१४. कृषि । खेती (को॰) ।

१५. इंद्र की पत्नी (को॰) ।

१६. उमा का नाम (को) ।

१७. लक्षमी का नाम (को॰) ।

(साभार – विक्षनरी)

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