वसंत पंचमी के अवसर पर देवी सरस्वती की आराधना का विशेष विधान है। मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। सनातन संस्कृति के धर्मशास्त्रों में कुछ विशेष स्तुतियां और श्लोक देवी सरस्वती की आराधना के हैं। जिनका स्मरण और वाचन करने से मां शारदा की कृपा प्राप्त होती है। कुछ शास्त्रोक्त श्लोक इस प्रकार हैं।

ऋग्वेद में देवी सरस्वती के संबंध में कहा गया है –

प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु।

मां सरस्‍वती का मंत्र

मां सरस्वती की उपासना करते समय इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए

ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।

कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।

वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।

रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।

सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च

देवी सरस्वती की वंदना

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता

या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।

या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता

सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥1॥

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं

वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌।

हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्‌

वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥2॥

विद्या प्राप्ति के लिए देवी सरस्वती का मंत्र

घंटाशूलहलानि शंखमुसले चक्रं धनु: सायकं हस्ताब्जैर्दघतीं धनान्तविलसच्छीतांशु तुल्यप्रभाम्‌।

गौरीदेहसमुद्भवा त्रिनयनामांधारभूतां महापूर्वामत्र सरस्वती मनुमजे शुम्भादि दैत्यार्दिनीम्‌।।

मंत्र

विद्या: समस्तास्तव देवि भेदा: स्त्रिय: समस्ता: सकला जगत्सु।

त्वयैकया पूरितमम्बयैतत् का ते स्तुति: स्तव्यपरा परोक्ति:।।

इस मंत्र का प्रतिदिन स्फटिक या हकीक की माला से सुबह के समय 108 बार जप करें

देवी सूक्त में देवी सरस्वती का तंत्रोक्तं मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेणसंस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।