साहित्य में संवाद से ही नई प्रवृतियों का उदय संभव

कोलकाता : सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन के साहित्य संवाद – 2 कार्यक्रम में विश्वभारती विश्वविद्यालय, शांतिनिकेतन की श्रावणी दास ने त्रिलोचन की भाषा पर चर्चा करते हुए कहा कि कवि ने एक-एक शब्द का सतर्क प्रयोग किया है। कलकत्ता विश्वविद्यालय की श्रद्धांजलि सिंह ने शोध-पत्र पढ़ते हुए कहा कि आज के युग में भी स्त्रियों द्वारा अपने व्यक्तित्व निर्माण को सांस्कृतिक अपराध की तरह देखा जाता है। इसलिए जरूरी है कि स्त्रियाँ परिवार की महत्ता को समझते हुए अपने भीतर छिपे व्यक्ति को पहचाने। विद्यासागर विश्वविद्यालय के राहुल शर्मा ने कथाकार दूधनाथ सिंह को केंद्र में रखकर बताया कि 21वीं सदी का मध्यवर्ग विभाजित है और लोग अपने पड़ोसी से भी संबंध नहीं रखते। उनका संकट गहरा होता जा रहा है। कविसप्तक के अंतर्गत शिवप्रकाश दास, सुषमा त्रिपाठी, संजय राय, गीता दुबे, निर्मला तोदी, अभिज्ञात और काली प्रसाद जायसवाल ने कविता पाठ किया। आरंभ में वरिष्ठ पत्रकार राजकिशोर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा गया कि राजकिशोर ने लगातार 50 सालों तक निरंतर सार्थक और विचारोत्तेजक लेखन किया। उन्होंने राजेंद्र माथुर और प्रभाष जोशी की परम्परा को आगे बढ़ाते हुए जीवन-भर मूल्यों पर आधारित पत्रकारिता की। वे दिल्ली में बस गए थे, पर मूलतः हावड़ा के थे। उनको महेश जायसवाल, अवधेश प्रसाद सिंह, शंभुनाथ, रामनिवास द्विवेदी, दिनेश साव, सुरेश शा आदि ने श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रो संजय जायसवाल ने साहित्य संवाद का संचालन करते हुए कहा कि हम ऐसे आयोजनों से हिंदी की नई बौद्धिक संवाद जारी रखेंगे। इससे ही नई प्रवृतियों का उदय होगा। धन्यवाद ज्ञापन विमलेश त्रिपाठी ने दिया।

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