18 मद्रास रेजिमेंट कैप्टन आशुतोष कुमार को मरणोपरान्त शौर्य चक्र

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नयी दिल्‍ली : सेना की 18 मद्रास रेजिमेंट के कैप्टन आशुतोष कुमार को मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है। अपने साथी सैनिकों की जान बचाने और आतंकियों को मौत के घाट उतारने के लिए उन्‍हें यह सम्‍मान मिला है। आशुतोष पिछले साल नवंबर में जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन के दौरान अपनी यूनिट की पलटन ‘घातक’ का नेतृत्व कर रहे थे।नवंबर 2020 में कैप्टन आशुतोष कुमार की यूनिट 18 मद्रास रेज‍िमेंट को नियंत्रण रेखा (एलओसी) के करीब जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में तैनात किया गया था। यूनिट के सैनिक नियमित रूप से आतंकवाद विरोधी अभियानों में लगे हुए थे। तब नियंत्रण रेखा अत्यधिक सक्रिय और अस्थिर बनी हुई थी। युद्धविराम उल्लंघन कई बार और बिना किसी चेतावनी के होता था।
कुपवाड़ा जिले के माछिल सेक्टर में अग्रिम चौकियों को चलाने के अलावा कैप्टन आशुतोष कुमार की इकाई ने घुसपैठ की कोशिशों को रोकने के लिए भी अभियान चलाया हुआ था। कारण है कि इसके एओआर (एरिया ऑफ ऑपरेशन) में सीमा पार से आतंकवादियों की घुसपैठ को रोकना शामिल था।
8 नवंबर 2020 को एलओसी से लगभग 3.5 किमी की दूरी पर घुसपैठ विरोधी बाधा प्रणाली के नजदीक बीएसएफ के गश्ती दल की ओर से लगभग 1 बजे घुसपैठ की एक ऐसी कोशिश की सूचना दी गई थी। जैसे ही गोलीबारी तेज हुई 18 मद्रास के सैनिक घुसपैठियों से निपटने के लिए पहुंच गए।
कैप्टन आशुतोष कुमार ने अपनी टीम के साथ घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करने और आतंकवादियों को जवाब देने के लिए मोर्चा संभाल लिया। आतंकवादियों के साथ संपर्क लगभग 4 बजे टूट गया था, लेकिन लगभग 10.20 बजे फिर से स्थापित हो गया था। घुसपैठियों को विभिन्न निगरानी उपकरणों से ट्रैक किया जा रहा था।
कैप्टन आशुतोष कुमार ने संभावित बचने के रास्तों को बंद करने के लिए अपने सैनिकों को चतुराई से तैनात किया था। भीषण गोलीबारी में तीन आतंकवादियों को ढेर कर दिया गया था। हालांकि, इस गोलीबारी के दौरान कैप्टन आशुतोष कुमार और उनके चार साथियों को गोलियां लगीं और वे गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में कैप्टन आशुतोष कुमार और दो और सैनिकों हवलदार प्रवीण कुमार और राइफलमैन रियादा महेश्वर ने दम तोड़ दिया और शहीद हो गए। कैप्टन आशुतोष कुमार एक बहादुर सैनिक और बेहतरीन अधिकारी थे। उन्‍होंने 24 साल की उम्र में अपने कर्तव्य के मार्ग में आगे बढ़कर नेतृत्व किया और देश के लिए अपने जीवन को न्यौछावर कर दिया।
बिहार के लाल ने बढ़ाया देश का मान
कैप्टन आशुतोष कुमार का जन्म 15 अक्टूबर 1996 को हुआ था। वह बिहार के मधेपुरा जिले के परमपुर गांव के रहने वाले थे। उनके पिता का नाम रवींद्र यादव और माता का गीता देवी है। कैप्टन आशुतोष की दो बहनें खुशबू और अंशु हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा ओडिशा के सैनिक स्कूल भुवनेश्वर से की। सैनिक स्कूल में पढ़ते हुए उनका सेना के प्रति झुकाव बढ़ा। वहीं से उनके भविष्य के सैन्य जीवन की नींव पड़ी।
सेना में शामिल होने का उनका संकल्प उम्र के साथ बढ़ता गया। स्कूल खत्म होने के बाद उनका चयन एनडीए में हो गया। बाद में वह आईएमए देहरादून गए। जून 2018 में 21 साल की उम्र में लेफ्टिनेंट के रूप में उनकी नियुक्ति हुई। उन्होंने मद्रास रेजिमेंट के 18 मद्रास में कमीशन प्राप्त किया। यह एक इंफैंट्री रेजिमेंट है जो अपने निडर सैनिकों और कई युद्ध कारनामों के लिए जानी जाती है। एक युवा लेफ्टिनेंट के रूप में उन्हें अपने पहले तैनाती के रूप में जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में तैनात किया गया था। वह जल्द ही एक शानदार अधिकारी के तौर पर उभरे।
आशुतोष के साथ इन छह को मिला सम्‍मान
पिछले साल जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में बहादुरी दिखाने के लिए आशुतोष सहित छह शूरवीरों को शौर्य चक्र सम्‍मान मिला है। इनमें आशुतोष को अकेले मरणोपरांत यह सम्‍मान दिया गया है। उनके अलावा मेजर अरुण कुमार पांडे, मेजर रवि कुमार चौधरी, कैप्टन विकास खत्री, राइफलमैन मुकेश कुमार और सिपाही नीरज अहलावत को यह प्रतिष्ठित सम्‍मान मिला है।

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