26 दिसम्बर से आरम्भ होगा 25वाँ हिन्दी मेला

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अहिंसा, भाईचारा और स्त्री का आत्मसम्मान है मुख्य संदेश

कोलकाता :  सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा हिंदी मेला 26  दिसम्बर से आरम्भ होगा। हिन्दी मेले  का यह 25वां साल है, रजत जयंती वर्ष। कोलकाता में यह हिन्दी की सांस्कृतिक और साहित्यिक पहचान बन चुका है। इसका आयोजन सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा राजाबाजार के फेडरेशन हाल में होता आ रहा है। देश के दूसरे नगरों में हिन्दी मेला बड़ी आशा से देखा जाता है। यह चिंता व्यक्त होती है कि हिन्दीभाषियों में कलाओं और साहित्य के प्रति रुचि कैसे जाग्रत की जाए। सस्ती फिल्मों और पॉप गानों से जो सांस्कृतिक प्रदूषण फैला है, उसका जवाब है हिन्दी मेला। इसमें आधुनिक कविताओं के आधार पर गायन, आवृत्ति, नृत्य आदि के आयोजन होते हैं। इसके अलावा नाटक, लोक गीत, हिंदी क्विज आदि की प्रतियोगिताएँ होती हैं। इनमें सैकड़ों युवा और विद्यार्थी भाग लेते हैं। हिन्दी मेला ने  हिन्दी  भाषियों में सांस्कृतिक आत्मविश्‍वास बढ़ाया है।
हिन्दी मेला के 25वें साल में युवा प्रतिभागियों के लिए 1 लाख रुपये के पुरस्कार और स्मृति चिह्न हैं। यह कार्यक्रम सात दिन 26 दिसंबर 2019 से 1 जनवरी 2020 तक चलेगा। यह नए वर्ष का नए तरह से अभिनंदन करेगा। लखनऊ से जानेमाने ग़ज़ल गायक हरिओम का प्रदर्शन शनिवार 28 दिसंबर को होगा। पटना की ‘हिरावल’ की टीम रविवार को छायावादी संगीत प्रस्तुत करेगी। यह रवींद्र संगीत की तरह छायावादी संगीत को लोकप्रिय बनाने की कोशिश है। इसी दिन कबीर के पदों पर आधारित नृत्य बनारस की प्रसिद्ध नृत्यांगना प्रशस्ति तिवारी प्रस्तुत करेंगी।
हिन्दी मेला की इस बार केंद्रीय थीम ‘छायावाद के सौ साल’ है। सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन के संयुक्त महासचिव प्रो.संजय जायसवाल ने बताया कि धर्मांधता, यौन-उत्पीड़न और हिंसा के माहौल में छायावाद पर चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण है कि इसने धार्मिक भाईचारे, अहिंसा, स्त्री-आत्म सम्मान और मानवतावाद का संदेश दिया था। देश के विभिन्न नगरों से आकर विद्वान प्रसाद, निराला, पंत और महादेवी के कृतित्व पर विशेष रूप से चर्चा करेंगे। प्रो.संजय जायसवाल का कहना है कि कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना, हुगली, मिदनापुर और बर्दवान से ही नहीं इस बार उत्तर बंगाल से भी कई युवा प्रतिभागी आ रहे हैं। हिन्दी मेला युवाओं का उच्च संस्कृति के लिए अभियान है। देश में शांति, सौहार्द और मानव-अधिकारों की स्थापना हिन्दी मेला का लक्ष्य है। 25 सालों से लगातार चलता आया हिन्दी मेला इस बार गांधी के सत्य और अहिंसा का संदेश पहुँचाना चाहता है, क्योंकि देश अभूतपूर्व संकट में है। छायावाद गांधी के आदर्शों की ही साहित्यिक प्रतिध्वनि रहा है। हिन्दी मेला के आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को डॉ.शंभुनाथ, रामनिवास द्विवेदी, मृत्युंजय, राजेश मिश्र और सुशील पांडेय ने भी संबोधित किया।
25वें मेले में दिए जाने वाले पुरस्कारों की घोषणा
हिन्दी  मेले में इस बार 2019 का नाटक के लिए माधव शुक्ल नाट्य सम्मान ‘रंगशिल्पी’ के सुशील कांति को, प्रो.कल्याणमल लोढ़ा शिक्षक सम्मान भोगेंद्र झा को तथा युगल किशोर सुकुल पत्रकारिता सम्मान अजय विद्यार्थी को प्रदान किया जाएगा।

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