नाट्योत्सव से 28वें हिंदी मेला की शुरुआत

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प्रसिद्ध रंगकर्मी उमा झुनझुनवाला को ‘माधव शुक्ल नाट्य सम्मान’

कोलकाता। आज लघु नाटक की प्रस्तुतियों से सात दिवसीय 28वाँ हिंदी मेला शुरू हो गया। इस बार नाटक में आदिवासी जीवन से जुड़ें विषयों के अलावा ‘अंधेर नगरी’ (भारतेंदु), ‘सद्गति’ (प्रेमचंद), ‘सलाम’ (ओमप्रकाश वाल्मीकि) तथा अन्य सात नाटकों की प्रस्तुति की गई। उद्घाटन समारोह में वरिष्ठ पत्रकार विश्वम्भर नेवर ने कहा कि हिंदी मेला में हिंदी मेला के आयोजकों का संकल्प ही इतने बड़े आयोजन की सफलता की वजह है। इस अवसर पर प्रसिद्ध रंगकर्मी उमा झुनझुनवाला को ‘माधव शुक्ल नाट्य सम्मान’ प्रदान किया गया। उमा झुनझुनवाला ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह पुरस्कार सामाजिक स्वीकृति है। नाटक एक बहुत चुनौतीपूर्ण कला है और हम लोगों को कलकत्ते से बड़ा प्यार मिला है। बनारस के प्रसिद्ध रंगकर्मी नरेंद्र आचार्य ने कहा कि हिन्दीत्तर प्रदेश में हिंदी मेला हिंदी के लिए गर्व है।
प्रो संजय जायसवाल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि हिंदी मेला का उद्देश्य नई पीढ़ी को मातृभाषा से प्रेम तथा उदार राष्ट्रीय संस्कृति से जोड़ना है। डॉ राजेश मिश्र ने वार्षिक विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि हिंदी मेला के इतने लंबे काल से चलते रहना लेखकों के अलावा साहित्यप्रेमियों और नौजवानों के भारी समर्थन का फल है। हिंदी मेला के संरक्षक रामनिवास द्विवेदी ने कहा कि हिंदी मेला को बड़े कर्मठ संस्कृति कर्मियों और साहित्य प्रेमियों का बल है। ऐसा मेला हिंदी प्रदेशों में भी होना चाहिए। उद्घाटन समारोह के अध्यक्ष डॉ शम्भुनाथ ने कहा कि हिंदी मेला का आयोजन तब से हो रहा है, लिटरेरी फेस्टिवल का नामोनिशान नहीं था। छोटे साधनों से आयोजित ऐसे मेलों से बड़े मूल्यों की रक्षा संभव है। हिंदी मेला भारतीय भाषाओं का आंगन है। बतौर निर्णायक पंकज देवा ने कहा कि हिंदी मेला का यह मंच नाट्य विधा को विद्यार्थियों से जोड़ रहा है। प्लाबन बसु ने कहा कि हमें नाटक कार्यशाला का आयोजन कर इन प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देना चाहिए। महेश जायसवाल ने विजयी प्रतिभागियों को भविष्य की संभावना कहा।
नाट्योत्सव का संचालन अनिता राय, नमिता जैन, लिली साहा, श्रीप्रकाश गुप्ता, पूजा गोंड, ज्योति चौरसिया ने किया। इस आयोजन में विशेष रूप से डॉ सुमिता गुप्ता, वेद प्रकाश शर्मा, धर्मेंद्र यादव, वीरू सिंह, निशा राजभर, आकांक्षा साव, हरे कृष्ण यादव सक्रिय थे। नाट्योत्सव में दर्शकों की भारी उपस्थिति थी।
इस वर्ष का शिखर सम्मान- कलाकार मंच, प्रथम- विद्यासागर विश्वविद्यालय, द्वितीय- स्टडी मिशन नाट्य दल, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता- चंदन भगत, सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री- प्रज्ञा झा, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक- पार्बती रघुनंदन, सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार- रक्षा कुमारी को मिला। धन्यवाद ज्ञापन श्रीप्रकाश गुप्ता ने दिया।

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