5 दिनों में डॉक्टरों के लिए बनाया ‘इंफेक्शन फ्री नल’!

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फ़िलहाल, खुद को कोरोना वायरस से बचाने के लिए और यह ज्यादा ना फैले, इसके लिए हम जो उपाय कर सकते हैं वो है – अपने हाथों को अच्छी तरह से धोते रहना। डॉक्टरों का कहना है कि लोगों को अपने हाथ 20 सेकंड्स तक धोना चाहिए। लेकिन इस प्रक्रिया में भी कई समस्याएं हैं जैसे पानी बर्बाद होना और हाथ धोने के बाद फिर से उसी नल को बंद करना, जिसे आपने गंदे हाथों से छुआ था। इस तरह से डॉक्टरों, नर्स, साफ़-सफाई वाले और एम्बुलेंस ड्राईवरों के लिए Covid-19 के मरीज़ों को संभालना मुश्किल है। इस स्थिति को देखते हुए, लेह में दोमखार गाँव के एक इनोवेटर, तमचोस ग्युरमेत ने एक ‘इंफेक्शन फ्री नल’ बनाया है। इससे लोगों को नल खोलने या फिर बंद करने के लिए अपने हाथों का इस्तेमाल करने की ज़रूरत नहीं पड़ती है। उन्हें बस अपने हाथ धोने हैं बाकी किसी जगह को छूने की ज़रूरत उन्हें नहीं है।तमचोस ने द बेटर इंडिया को बताया कि यह मशीन स्टील की बनी है और इसमें उन्होंने नीचे की तरफ दो बटन लगाए हैं, जिन्हें आप पैरों से दबा सकते हैं। जब आप दाएं तरफ के बटन को दबाते हैं तो आपके हाथ में लिक्विड सोप आएगा और बाएं तरफ के बटन को दबाने पर नल से पानी आता है। “डॉक्टरों ने कहा है कि आपको अपने हाथ 20 सेकंड्स तक धोने हैं। इतने समय में काफी पानी बर्बाद हो सकता है। इसलिए इस सिस्टम को मैंने इस तरह से बनाया है कि पानी का बहाव बहुत ज्यादा न हो और आपके हाथ भी धुल जाएं। पानी तभी आएगा जब आप नीचे के बटन को अच्छे से दबाएंगे। जैसे ही आप इस बटन को छोड़ेंगे, पानी आना बंद हो जाएगा,” उन्होंने आगे कहा।

हाथ धोते समय लोगों को लगता है कि अब साबुन वाले हाथों से कैसे नल बंद करें और इस वजह से पानी बहता ही रहता है। तमचोस का कहना है कि उनका सिस्टम लगभग 80% पानी बचाता है, जो हाथ धोते समय 20 सेकंड्स में बर्बाद हो जाता है। इस डिवाइस को खुद ऑपरेट करना पड़ता है और पानी के लिए इसके अंदर एक इंसुलेटेड टैंक रखा गया है।“इसमें लगा टैंक इंसुलेटेड ठंडे इलाकों के लिए सही है। हमारे यहाँ लोग हर सुबह पानी ठंडा होने की वजह से बहुत जल्दी-जल्दी हाथ धोते हैं। लेकिन, इस मशीन में एक इंसुलेटेड टैंक है जिसमें हम गर्म पानी भी डाल सकते हैं ताकि लोग अपने हाथ अच्छी तरह से धोएं,” उन्होंने बताया। लोग इस डिवाइस का कनेक्शन अपने घर के किसी भी नल से कर सकते हैं या फिर ज़रूरत के हिसाब से इस टैंक को भर सकते हैं। टैंक की क्षमता 20 लीटर पानी की है।

तमचोस आगे कहते हैं कि इस डिवाइस को बनाने के लिए सभी मटेरियल एक लोकल हार्डवेयर की दुकान, मैकेनिकल स्पेयर पार्ट्स की दुकान और स्क्रैपयार्ड से लिया गया है। पैर से दबाने के लिए जो बटन बनाए गए हैं उनमें टाटा ट्रक के पार्ट्स इस्तेमाल हुए हैं। इस टाटा ट्रक गाड़ी को बचपन में वे ‘पागल गाड़ी’ कहते थे। डिवाइस की बॉडी बनाने के लिए वह एक स्टील फैब्रिकेशन दुकान में गये और इसमें उन्हें कई दिन लगे। उन्होंने 5 दिनों में इस डिवाइस को बनाकर तैयार किया है और इसके लिए हर दिन वह सुबह साढ़े सात बजे से रात के साढ़े सात बजे तक काम करते थे।फिलहाल, यह मशीन लेह के सोनम नोरबू मेमोरियल अस्पताल के स्टाफ के लिए रखी गई है। पिछले कई दिनों से उन्हें कई नागरिकों, होटलों, एयरपोर्ट अथॉरिटी, डिफेंस संगठनों, और कारगिल के सरकारी अस्पताल से (जहाँ मरीज़ों को आइसोलेशन में रखा गया है)  इस मशीन के लिए ऑर्डर मिले हैं।

इस मशीन का वजन 70 किलोग्राम है लेकिन भविष्य में वह जो भी मशीन बनाएंगे, उनका वजन इससे कम होगा।

वह बताते हैं कि उनके पास इतना समय नहीं था कि वह इस डिवाइस को और भी एडवांस्ड तरीके से बना पाएं, क्योंकि वह जल्द से जल्द मेडिकल स्टाफ को यह देना चाहते थे। नहीं तो, वह इस डिवाइस में सीधा नल से कनेक्शन और तापमान नियंत्रित करने का सिस्टम लगाते। “निजी तौर पर मुझे इस डिवाइस को बनाने की प्रेरणा इस बात से मिली कि हम वायरस से लड़ रहे हैं और इसे हम देख भी नहीं सकते। इस महामारी के आते ही लेह में सबकुछ लॉकडाउन हो गया था और मैं एक एडवांस्ड लेवल के डिवाइस के लिए सभी मटेरियल इकट्ठा नहीं कर पाया,” उन्होंने कहा।

अस्पतालों में काम कर रहे डॉक्टरों और उनके सहायकों की चिंता ने तमचोस को बहुत प्रभावित किया और वह उनके लिए कुछ करना चाहते थे। जब वह इस इनोवेशन पर काम कर रहे थे तभी उन्हें खबर मिली कि एक डॉक्टर भी संक्रमित हो गये हैं। वह कहते हैं कि उनका यह इनोवेशन कोई बड़ी बात नहीं है।

“मैं कहता हूँ कि यह कोई असाधारण बात नहीं है। मैंने सिर्फ जान बचाने की कोशिश की है। मैं सिर्फ एक इंसान हूँ और अकेले ज्यादा कुछ नहीं कर सकता। लेकिन अगर हम सभी साथ आ जाएं तो बहुत कुछ कर सकते हैं। लोग मास्क, सैनिटाइज़र और वेंटिलेटर जैसे अन्य महत्वपूर्ण उपकरण बाँट रहे हैं। आप देख सकते हैं कि ये लोग कितना बड़ा बदलाव ला रहे हैं। इसलिए, हम सभी को एक साथ आना होगा। यहां तक ​​कि एक मास्क भी एक जीवन बचा सकता है। इसी तरह, मेरा डिवाइस कुछ हद तक उनकी मदद कर सकता है जो सबसे आगे खड़े होकर काम कर रहे हैं,” उन्होंने अंत में कहा।

मूल लेख: रिनचेन नोरबू वांगचुक

(साभार – द बेटर इंडिया)

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