Saturday, November 26, 2022
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28वां कोलकाता अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 15 दिसंबर से

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कोलकाता । 28वां कोलकाता अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (केआइएफएफ) आगामी 15 दिसंबर से शुरू होगा और 22 दिसंबर तक चलेगा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को विधानसभा में इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में केआइएफएफ का उद्घाटन समारोह आयोजित होगा। इसमें बालीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन, उनकी अभिनेत्री पत्नी जया बच्चन व सुपरस्टार शाहरुख खान मौजूद रह सकते हैं। उन्हें न्योता भेजा गया है।

पहली बार एक कैलेंडर वर्ष में दूसरी बार हो रहा आयोजन – गौरतलब है कि शाहरुख खान बंगाल के ब्रांड एम्बेस्डर भी हैं। नव नियुक्त राज्यपाल सीवी आनंद बोस को उद्घाटन समारोह में विशेष रूप से आमंत्रित किया जाएगा। गौरतलब है कि केआइएफएफ के इतिहास में पहली बार एक कैलेंडर वर्ष में इसका दूसरी बार आयोजन होने जा रहा है। कोरोना महामारी के कारण दो साल इसका आयोजन नहीं हो पाया था। 27वां संस्करण इसी साल 25 अप्रैल से शुरू हुआ था और एक मई तक चला था। उस दौरान 40 देशों की 163 फिल्में दिखाई गई थीं। अब इसी साल फिर से इसका आयोजन होने जा रहा है। कोरोना के पहले अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान नियमित रूप से इसके उद्घाटन समारोह में मौजूद रहते थे और अब फिर से दिख सकते हैं।

एयर इंडिया – एयर होस्टेज की बिंदी और चूड़ी से लेकर पुरुषों के बाल के लिए नियम जारी

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एयर इंडिया ने केबिन अटेंडेंट के लिए ग्रूमिंग गाइडलाइंस जारी की है। इसमें बिंदी की साइज से लेकर चूड़ी की संख्या भी तय की गई है। गाइडलाइन में कहा गया है कि बिंदी की साइज 0.5 सीएम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। एक से ज्यादा चूड़ी पहनने की भी इजाजत नहीं है।  क्रू के पुरुष सदस्यों की हेयरस्टाइल का भी गाइडलाइन में जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, एयर इंडिया ने ग्रूमिंग गाइडलाइंस में मेल क्रू के उन सदस्यों को, जिनके बाल कम हैं या जिन्हें गंजापन है, उन्हें क्लीन शेव्ड सिर यानी बाल्ड लुक रखने को कहा है। ऐसे क्रू के सदस्य को अपने सिर को रोजाना शेव करने को भी कहा गया है। वहीं क्रू के सदस्य बिखरे हुए बाल या लंबे उलझे बाल वाली हेयरस्टाइल भी नहीं रख सकते।

महिला क्रू सदस्यों को पर्ल इयररिंग्स यानी मोती की बालियां पहनने की अनुमति नहीं है। बिंदी विकल्प है, लेकिन उसका साइज 0.5 सीएम से ज्यादा नहीं होना चाहिए। महिला क्रू हाथों में सिर्फ एक चूड़ी पहन सकती हैं, लेकिन चूड़ी में कोई डिजाइन या स्टोन नहीं होना चाहिए। इसके अलावा महिला क्रू बालों को बांधने के लिए हाई टॉप नॉट और लो बन्स स्टाइल का इस्तेमाल नहीं कर सकती हैं। महिला क्रू बिना किसी डिजाइन वाली सिर्फ गोल्ड और डायमंड की राउंड शेप्ड इयर रिंग्स पहन सकती हैं। साड़ी और इंडो-वेस्टर्न वियर दोनों के साथ त्वचा के रंग से मेल खाने वाली शीयर काल्फ लेंथ स्टॉकिंग्स भी अनिवार्य हैं। वहीं दोनों हाथों में सिर्फ एक-एक अंगूठी पहने की अनुमति है, लेकिन इसमें शर्त यह है कि अंगूठी एक सीएम से ज्यादा चौड़ाई वाली नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा महिला क्रू सदस्यों को सिर्फ चार बॉबी पिन यूज करने की अनुमति दी गई है। मेंहदी लगाने की भी अनुमति नहीं है।

धार्मिक या काले धागे बांधने की अनुमति नहीं

गाइडलाइंस में कहा गया है कि कलाई, गर्दन और एंकल पर धार्मिक या काले धागे को बांधने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा क्रू को पब्लिक एरिया में प्लास्टिक बैग या शॉपिंग बैग ले जाने की भी अनुमति नहीं है।

रसोई – कहानी सतना के रामपुर के खुरचन की

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खुरचन… यह पढ़कर आपको लगेगा कि यह किसी चीज को जलाने के बाद खुरच-खुरचकर बनाई जाने वाली कोई मिठाई है, लेकिन ऐसा नहीं है। इसका सिर्फ नाम ही खुरचन है। यह मिठाई शुद्ध दूध की मलाई से बनाई जाती है। मलाई की कई परतें जमने से मखमली सी दिखने वाली यह मिठाई मप्र की प्रसिद्ध मिठाइयों में से एक है। बात हो रही सतना के रामपुर बाघेलान की ‘खुरचन’ की। यह मिठाई यहां 80 साल पहले अस्तित्व में आई थी। रामपुर बाघेलान के हाईवे से इस मिठाई का स्वाद प्रदेश ही नहीं देशभर में फैल चुका है। इस सप्ताह जायका में पढ़िए रामपुर बाघेलान की ‘खुरचन’ की कहानी।

बारापत्थर गांव में यादवों ने बनाना शुरू किया

कुछ समय बाद नागौद के करीबी और नेशनल हाईवे के किनारे बसे बारापत्थर गांव में कुछ यादवों ने आशियाना बनाए। वे भी मवेशी पालते थे लिहाजा दूध का इस्तेमाल उन्होंने भी खुरचन बनाने में करना शुरू कर दिया। उस वक्त वे नागौद के घरों और कुछ दुकानों में भी खुरचन पहुंचाते थे। अब भी रामपुर की ही तरह नागौद के बारापत्थर में भी नेशनल हाईवे के किनारे खुरचन की दुकानें लगती हैं।

रामपुर में शक्कर नागौद में दूध की मिठास

खुरचन की रेसिपी नागौद से रामपुर पहुंची तो उसके बनाने के तरीके में बदलाव भी हो गए। नागौद की खुरचन में शक्कर का इस्तेमाल नहीं किया जाता। रामपुर में इस पर पिसी शक्कर छिड़की जाती है। नागौद की खुरचन शुगर फ्री होती है। दूध की मिठास को ही खुरचन की मिठास के लिए इस्तेमाल किया जाता है लिहाजा नागौद में बनी खुरचन रामपुर की खुरचन के मुकाबले महंगी बिकती है। यहां इसकी कीमत 500 रुपए किलो तक है।

बड़े होटल से ज्यादा बिक्री हाईवे की दुकानों पर

खुरचन कस्बे के अन्य बड़े होटलों में भी बिकती है, लेकिन रोजाना खुरचन की उनसे कहीं ज्यादा बिक्री सड़क किनारे की छोटी-छोटी दुकानों में होती है। ये दुकानें किसी और नाम से नही बल्कि विक्रेता के सरनेम से पहचानी जाती हैं। मसलन दुकानों के नाम, पटेल खुरचन, मिश्रा खुरचन, पांडेय खुरचन वगैरह हैं। ये दुकानें उन्हीं की होती हैं जो खुद खुरचन बनाते हैं।

धीमी आंच पर पकाते हैं

दूध को एक-एक पाव की मात्रा में लोहे की कड़ाहियों में पकाया जाता है। दूध के ठंडा होने के बाद बेहद बारीकी से इसकी मलाई उतारी जाती है और उसे थाली में फैलाया जाता है। पिसी शक्कर छिड़ककर एक के ऊपर एक मलाई की परतें डाली जाती हैं।

पहले बेचने के लिए रीवा जाते थे

वीरेंद्र मिश्रा बताते हैं कि खुरचन बनाने और बेचने का काम उनके यहां तीन पीढ़ियों से हो रहा है। पहले दादी खुरचन बनाती थीं और बेचने के लिए रीवा ले जाती थीं। बाद में पिता जी ने इस काम को आगे बढ़ाया और अब वे पढ़ाई करने के बाद भी खुरचन बनाने और बेचने के काम में लग गए। उन्होंने बताया कि यहां डेढ़ सौ से अधिक दुकानदारों की आजीविका का साधन खुरचन ही है। त्योहारों के दिनों में सामान्य दिनों की अपेक्षा बिक्री भी अच्छी होती है। कई बार यहां से निकलते वक्त विदेशी सैलानी भी रुकते हैं और खुरचन ले जाते हैं।

अब रेलवे ने भी किया प्रमोट

रामपुर बाघेलान की खुरचन को अब भारतीय रेलवे ने भी प्रमोट किया है। रेलवे ने बघेलखंड की इस जायकेदार विरासत को वन स्टेशन वन प्रोडक्ट प्रोग्राम के तहत शामिल किया है। हावड़ा-मुम्बई रेल मार्ग के प्रमुख जंक्शन सतना के प्लेटफॉर्म में इसका स्टॉल लगाया गया है। स्टाल संचालक लक्ष्मी नारायण मिश्रा बताते हैं कि नेशनल हाईवे पर यात्रा करने वालों के जरिए ही खुरचन देश के अन्य स्थानों तक पहुंचती थी, अब रेल यात्रियों के माध्यम से भी इसका जायका भारत के कोने-कोने तक पहुंच रहा है।

सीवी आनंद बोस ने बंगाल के राज्यपाल के रूप में ली शपथ

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कोलकाता । कोलकाता में बुधवार 23 नवम्बर को सीवी आनंद बोस ने पश्चिम बंगाल के नए राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण किया। राज्यपाल को कोलकाता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण करने के बाद राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व अन्य नेताओं से मुलाकात की। 17 नवंबर को पश्चिम बंगाल के नए राज्यपाल नामित किए गए थे। सीवी आनंद बोस कौन हैं। तो बोस 1977 बैच के केरल कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस हैं। वह ला गणेशन की जगह लेंगे। 2011 में सेवानिवृत्त होने से पहले बोस कोलकाता में राष्ट्रीय संग्रहालय के प्रशासक के रूप में कार्य कर हे थे।

याद रहेंगी सदाबहार मुस्कान वाली तब्बसुम

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आजादी के पहले जन्मीं बॉलीवुड एक्ट्रेस तबस्सुम गत 18 नवम्बर को दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गईं। बता दें कि 78 साल की तबस्सुम ने महज 3 साल की उम्र से कैमरे के सामने एक्टिंग करना शुरू कर दिया था। इसके बाद ये सिलसिला करीब 75 सालों तक जारी रहा। हालांकि तबस्सुम फिल्मों से तो दूर थीं, लेकिन अपने फैन्स के दिल के करीब रहीं हैं। फिल्मों से ब्रेक लेने के बाद तबस्सुम टीवी के साथ सोशल मीडिया पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराती रहीं है। साथ ही यूट्यूब के जरिए आखिरी सांस तक लोगों से जुड़ी रहीं। तबस्सुम के निधन की खबर से जहां बॉलीवुड शोक में डूबा है, वहीं लोग उनकी फिल्में सुहाग, मंझधार, बारी बहन और दीदार में उनके बेहतरीन अभिनय को याद कर रहे हैं।

3 साल की उम्र से शुरू किया था अभिनय

आपको बता दें कि एक्ट्रेस तबस्सुम का जन्म 9 जुलाई 1944 में मुंबई में हुआ था। तबस्सुम के पिता अयोध्या नाथ सचदेव एक फ्रीडम फाइटर थे और शहीद भगत सिंह के साथियों में से एक थे। तबस्सुम का करियर महज 3 साल की उम्र से ही बाल कलाकार के तौर पर शुरू हो गया था। साल 1947 में नरगिस में तबस्सुम ने बाल कलाकार की भूमिका निभाई।

इसके बाद तबस्सुम ने बेजू बावरा, जोगन और दीदार जैसी कई फिल्मों में चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर काम किया। दीदार का एक मशहूर गाना ‘बचपन के दिन भुला ना देना’ में तबस्सुम ने अपने अभिनय की छाप छोड़ी थी। इसके बाद तबस्सुम ने कई फिल्मों में लीडिंग हीरोइन के तौर पर काम किया।

दूरदर्शन के शो ने दिलाई पहचान

हालांकि तबस्सुम को फिल्मों से ज्यादा दूरदर्शन पर आए उनके प्रोग्राम ‘फूल खिले हैं गुलशन गुलशन’ ने शौहरत दिलाई। इस शो को होस्ट करने के दौरान तबस्सुम को काफी पहचान मिली। तबस्सुम इसके बाद लगातार काम करती रहीं। कभी टीवी तो कभी फिल्मों में नजर आने वाली तबस्सुम भले ही आजादी के पहले पैदा हुईं थीं, लेकिन खयाल पूरी तरह आजाद थे।

यूट्यूब चैनल के ज़रिए जुड़ी रहती थी प्रशंसकों के साथ

पुराने दौर का होने के बाद भी तबस्सुम आज के दौर के सशक्त माध्यम डिजिटल दुनिया में भी पूरी तरह सक्रिय थीं। 78 साल में भी तबस्सुम इंस्टाग्राम जैसे ऐप पर भी अपनी एंट्री दर्ज कराती थी। इतना ही नहीं तबस्सम अपनी आखिरी सांस तक एक यूट्यूब चैनल चलाती रहीं जिसका नाम है तबस्सुम टाकीज। इस यूट्यूब चैनल के जरिए तबस्सुम पुरानी फिल्मों के किस्से और उनसे जुड़ी रोचक जानकारी सुनाया करती थीं।

एचआईटीके में इंडियन प्लंम्बिंग एसोसिएशन स्टूडेंट्स चैप्टर

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कोलकाता । हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कोलकाता में इंडियन प्लंम्बिंग एसोसिएशन स्टूडेंट्स चैप्टर आरम्भ किया गया । उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में इंडियन प्लंबिंग एसोसिएशन, कोलकाता चैप्टर के अध्यक्ष अभय पसारी उपस्थित थे । उनके साथ इंडियन प्लंबिंग एसोसिएशन, कोलकाता चैप्टर के सचिव समीरन बानिक और इंडियन प्लंबिंग एसोसिएशन, कोलकाता के सचिव सुदीप दास मौजूद थे । यह कार्यक्रम सिविल इंजीनियरिंग विभाग, हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी द्वारा आयोजित किया गया था।
इस अवसर पर अभय पसारी ने भारतीय प्लंबिंग एसोसिएशन द्वारा छात्रों को दी जाने वाली सहायता के बारे में बात की जिससे उन्हें भारतीय प्लंबिंग उद्योग में उपयोग की जाने वाली नवीनतम तकनीकों को जानने में मदद मिली। इस कार्यक्रम में जादवपुर विश्वविद्यालय के जल संसाधन अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर डॉ. आशीष मजुमदार भी उपस्थित थे। उन्होंने हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कोलकाता स्टूडेंट्स चैप्टर आरम्भ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समारोह में हेरिटेज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के सीईओ पी.के.अग्रवाल, एचआईटीके के प्रिंसिपल प्रो. बासव चौधरी, हेरिटेज इंस्टीट्यूट के रजिस्ट्रार डॉ. सुजीत बरुआ एवं सिविल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष प्रो. तापस साधु भी उपस्थित थे ।

 

भवानीपुर कॉलेज के खिलाड़ी बने चैंपियनशिप तुर्की 2022 में रजत और कांस्य पदक विजेता

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कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के विद्यार्थियों ने छाऊ विश्व स्तर पर तुर्की में हुए कई खेलों में अपना बेहतरीन प्रदर्शन दिया। कॉलेज के 3 खिलाड़ियों, आशुतोष कुमार झा ने 90 किग्रा में कांस्य पदक, खुशी लकड़ा- 70 किग्रा में रजत पदक और चेस बॉक्सिंग फिट श्रेणी में कांस्य पदक जीते। ऋतिक प्रसाद- चेसबॉक्सिंग फिट श्रेणी में 60 किग्रा कांस्य पदक और कांस्य पदक जीते । हमारे देश भारत के लिए चौथी विश्व शतरंज बॉक्सिंग चैंपियनशिप तुर्की  2022 में भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के खिलाड़ियों ने कुल 5 पदक जीते।इस अवसर पर भवानीपुर कॉलेज के मैनेजमेंट पदाधिकारियों, डीन प्रो दिलीप शाह और शिक्षकगणों ने शुभकामनाएं दीं। भवानीपुर कॉलेज के स्पोर्ट्स एरिना के प्रमुख रूपेश गांधी ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया और गौरव का भाव व्यक्त किया। जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

सर्दियों में चार धाम की यात्रा की व्यवस्था को तैयार उत्तराखंड सरकार

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कोलकाता । उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध तीर्थ चारधाम यात्रा ने इस साल एक रिकॉर्ड बनाया है। इस साल 46 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने चार धामों की यात्रा की। गत 19 नवंबर को श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने पर चार धाम के अधिष्ठाता देवों के शीतकालीन आसनों पर तीर्थाटन होगा । यहाँ उत्तराखंड सरकार ने श्रद्धालुओं के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए हैं । तीन धामों गंगोत्री, केदारनाथ और यमुनोत्री के कपाट क्रमश: 26 अक्टूबर और 27 अक्टूबर को बंद हो गए थे, जबकि श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट आज अगले छह महीने के लिए बंद हो गए हैं। अब, उनके पीठासीन देवता अपने शीतकालीन आवासों में चले जाएंगे जो कम ऊंचाई पर स्थित हैं। इन शीतकालीन आवासों में गंगोत्री धाम का मुखवा, यमुनोत्री का खरसाली, केदारनाथ का उखीमठ और बद्रीनाथ धाम का जोशीमठ और पांडुकेश्वर प्रमुख हैं। सरकारी अधिकारियों और स्थानीय अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठाए हैं कि चारधाम भक्तों को उनकी शीतकालीन तीर्थ यात्रा के दौरान कोई कठिनाई न हो। कोविड 19 महामारी के दो कठिन वर्षों के बाद इस बार बिना किसी प्रतिबंध के आयोजित की गई चार धाम यात्रा के लिए तीर्थयात्रियों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया था। इसके लिए पर्यटन विभाग द्वारा ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए एक मोबाइल एप बनाया गया है। पंजीकरण के सत्यापन के लिए हेमकुंड साहिब सहित चारधामों में कर्मचारियों को तैनात किया गया था। चारधाम यात्रा में तीर्थयात्रियों की संख्या का अनुमान लगाने के लिए यह प्रणाली लागू की गई थी ताकि अचानक बड़ी संख्या में तीर्थयात्री एक बार में किसी धाम पर न पहुंच सकें और उन्हें किसी भी तरह की कठिनाई से बचाया जा सके। इसके अलावा यात्रा मार्गों पर 30 से अधिक स्थानों पर कैमरे भी लगाए गए, जिससे तीर्थयात्रियों को आसानी से ट्रैक करने में मदद मिली। पर्यटन विभाग की ओर से एक टोल फ्री नंबर 1364 भी जारी किया गया था, जिसके जरिए श्रद्धालु इस नंबर पर कॉल कर धामों में बुकिंग की स्थिति से लेकर अन्य मामलों में अपनी शिकायतों का आसानी से समाधान कर सकते थे। चारधामों में श्रद्धालुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए पहली बार स्वास्थ्य विभाग ने यात्रा मार्ग के नौ स्थानों पर स्वास्थ्य जांच शुरू की है. ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ठंड और ऑक्सीजन की कमी के प्रतिकूल स्वास्थ्य प्रभावों से निपटने के लिए 30 डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया गया। इसके अलावा हृदय रोग विशेषज्ञ की भी प्रतिनियुक्ति की गई थी।
राज्य के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा, “इस वर्ष चारधाम यात्रा ने एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। रिकॉर्ड फुटफॉल ने हमें लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में आवेदन करने के लिए प्रेरित किया है। सरकार का ध्यान अब शीतकालीन चारधाम यात्रा के निर्बाध संचालन पर केंद्रित है। इस यात्रा के हिस्से के रूप में श्रद्धालुओं की सुरक्षा की जाएगी और उन्हें पर्याप्त सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन की लोकप्रियता भी बढ़ रही है। इन्हीं कारणों से हमने साहसिक पर्यटन में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए कई स्थानों को विकसित और नामित किया है। गतिविधियों।राज्य में युवाओं को हमारी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी प्रदान किए गए हैं। उन्होंने कहा, “शीतकालीन चारधाम यात्रा उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देगी और इसे सर्दियों के पर्यटकों के लिए सबसे पसंदीदा गंतव्य बनाने में मदद करेगी। शीतकालीन चारधाम को बढ़ावा देने के अलावा, हम सुनिश्चित करते हैं कि श्रद्धालु यात्रा के दौरान सुरक्षित और सुविधाजनक हों। इस वर्ष चार धाम यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों की रिकॉर्ड-तोड़ संख्या ने पिछले दो वर्षों से चल रही महामारी के कारण हुए नुकसान की भरपाई की है। उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को हर सुविधा और सेवा देने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है ।

 

युवाओं को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मरम्मत का प्रशिक्षण

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कोलकाता । समाज के कमजोर वर्ग के युवाओं के आजीविका में सुधार के लिए जीनियस कंसल्टेंट लिमिटेड (जीनियस फाउंडेशन) की एक पहल से कई युवाओं को आगे बढ़ने का रास्ता मिला। जीनियस कंसल्टेंट लिमिटेड (जीनियस फाउंडेशन) भारत की सबसे बड़ी मैनपावर आउटसोर्सिंग कंपनी में से एक है, जिसने घरेलू उपकरणों और अन्य घरेलू उपकरणों में कुशल बनाकर समाज के कमजोर वर्ग के युवाओं के लिए आजीविका में सुधार के लिए एक नेक पहल की। प्रशिक्षण कार्यक्रम को एसेंसिव एजुकेयर लिमिटेड के सहयोग से इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया (ईएसएससीआई) द्वारा निष्पादित किया गया था।
कार्यक्रम के दौरान कुल 60 उम्मीदवारों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया गया। खास बात यह है कि इन इच्छुक युवाओं में से कई युवाओं ने लॉयड, हिताची, गोदरेज, हैवेल्स आदि प्रतिष्ठित संगठनों में काम करना शुरू कर दिया है। दिलचस्प बात यह है कि उनमें से कुछ ने ग्रामीण स्तर के उद्यमियों के रूप में काम करना शुरू कर दिया है और अपने इलाके में घरेलू उपकरणों की मरम्मत सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। साथ ही ईएसएससीआई और एसेंसिव एजुकेयर लिमिटेड युवाओं को एक सफल उद्यमी बनने के लिए सहयोग प्रदान कर रहे हैं। प्रेस क्लब ऑफ कलकत्ता में कार्यक्रम के दौरान युवाओं को पाठ्यक्रम पूर्णता प्रमाण पत्र वितरित किए गए। साथ ही युवाओं को बेसिक टूल किट भी दिए गए, ताकि वे टूल किट खरीदने के लिए पैसे खर्च करने की चिंता किए बिना अपने आप काम शुरू कर सकें।
प्रमाणपत्र वितरण समारोह में जीनियस कंसल्टेंट्स लिमिटेड के मुख्य प्रबंध निदेशक वाई.पी. यादव, एसेंसिव एजुकेयर लिमिटेड की प्रबंध निदेशक सयानी चटर्जी, एसेंसिव एजुकेयर लिमिटेड के निदेशक और मुख्य परिचालन अधिकारी तन्मय दास और अन्य हस्तियों ने हिस्सा लिया।

कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज में साम्प्रदायिक सौहार्द पर सेमिनार

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कोलकाता । कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज में साम्प्रदायिक सौहार्द पर एक सेमिनार आयोजित किया गया। इस अवसर कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज की प्राचार्या डॉ. सत्या उपाध्याय ने शिक्षण संस्थानों में साम्प्रदयिक सौहार्द की आवश्यकता पर जोर दिया एवं मनुष्यता को सभी धर्मों की आत्मा बताया । उन्होंने कहा अनुशासन साम्प्रदायिक सौहार्द का सबसे महत्वपूर्ण स्तम्भ है जो अन्दर से आता है और जिसका पालन स्वप्रेरणा से ही किया जाता है । इस लिहाज से स्त्रियों की भूमिका महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि वह अपनी भूमिका का पालन सही तरीके से करें तो देश या समाज को कोई भी नहीं तोड़ सकता ।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित एनसीसी की 2 बंगाल गर्ल्स बटालियन के कमांडिग ऑफिसर कर्नल सुनीत सिंह ने साम्प्रदायिक सौहार्द एवं शिक्षण संस्थानों में एनसीसी की भूमिका पर प्रकाश डाला । उन्होंने कहा कि हमारे अन्दर एक दूसरे के धर्म के प्रति आदर और उसके प्रति समझ होनी चाहिए, जैसा सेना में होता है । उन्होंने सेना का उदाहरण देते हुए कहा सेना में सभी न सिर्फ एक दूसरे के धर्म का सम्मान करते हैं बल्कि एक दूसरे की धार्मिक गतिविधियों में भी शामिल होते हैं। इस अभ्यास के लिए जिस प्रयास की आवश्यकता पड़ती है, वह एनसीसी में सिखाया जाता है। उन्होंने छात्राओं को सोशल मीडिया की खबरों को बगैर सत्यता जाँचे आगे प्रसारित न करने की सलाह भी दी । इस अवसर पर प्रधान अतिथि के रूप में उपस्थित बेथुन कॉलेज के पॉलिटिकल साइंस विभाग की सेवानिवृत्त प्राध्यापिका एवं कवयित्री डॉ. कुमकुम चट्टोपाध्याय ने एकता एवं साम्प्रदायिक सौहार्द बनाये रखने पर जोर दिया । उन्होंने कहा कि सभी प्रकार के जाति – धर्म समेत अन्य भेदभावों को समाप्त करना होगा एवं साम्प्रदायिक सौहार्द के लिए सकारात्मक संतुलन बनाना होगा। स्वागत भाषण पॉलिटिकल साइंस विभागाध्यक्ष प्रो. चन्द्रनाथ साहा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. मंद्रिता राय एवं शेख राज अली ने किया ।

 

कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज में मध्य एशिया एवं भारत के सम्बन्धों पर अन्तरराष्ट्रीय वेबिनार


कोलकाता । कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज में भारत एवं मध्य एशिया के सम्बन्धों पर एक दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया गया। कॉलेज के इतिहास विभाग द्वारा आयोजित इस वेबिनार में भारत के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक सम्बन्ध के सन्दर्भ में मध्य एशिया एवं ऐतिहासिक कालखंड की चर्चा की गयी । वेबिनार को सम्बोधित करते हुए कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज की प्राचार्या एवं सचिव डॉ. सत्या उपाध्याय ने कहा कि किसी भी देश में मनुष्य की प्रवृत्ति एक ही होती है, बस अभिव्यक्ति का तरीका अलग होता है। साहित्य एवं संस्कृति के माध्यम से मध्य एशिया एवं भारत के सम्बन्ध मजबूत हुए हैं और अनुवाद के माध्यम से साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में निकटता आई है। वेबिनार में उज्बेकिस्तान की ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरियेंटल स्टडीज के महात्मा गाँधी इंडोलॉजी सेंटर की निदेशक एवं दक्षिण एशियाई विभाग की अध्यक्ष प्रो. उल्फत मुखीबोवा ने दोनों देशों के सम्बन्धों की ऐतिहासिक यात्रा पर प्रकाश डाला । उन्होंने कहा कि दोनों ही संस्कृतियों ने एक दूसरे को प्रभावित किया है। उज्बेकी साहित्य में बीसवीं सदी के दिग्गज साहित्यकारों. जैसे – मुंशी प्रेमचंद, यशपाल की रचनाएं अनूदित होकर प्रकाशित हुईं। राजनीतिक स्तर पर भी दोनों देशों के सम्पर्क रहे हैं । भारतीय – उज्बेकी लोगों के जीवन, व्यवहार एवं आचरण में भी समानता है । इसी संस्थान के अनुवाद अध्ययन एवं अन्तरराष्ट्रीय पत्रकारिता विभाग की अध्यक्ष डॉ. नीलोफर खुजाएवा ने कहा कि हिन्दी एवं उर्दू में बहुत सी उज्बेकी रचनाओं का अनुवाद हुआ है । यह वेबिनार आभासी माध्यम पर आयोजित किया गया था । इस वेबिनार में प्रो. नन्दिनी भट्टाचार्य समेत कई अन्य शिक्षिकाओं ने विचार रखे ।