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मेहरबाई टाटा…जिन्होंने अपना बेशकीमती हीरा बेचकर टाटा कम्पनी को डूबने से बचाया

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टाटा समूह का नाम आज सारी दुनिया जानती है…पर कोई समूह एक दिन में नहीं बनता,,उसके पीछे बड़ी तपस्या होती है औऱ त्याग होता है। आप कंगूरों को देखते हैं, नींव की ईंट का त्याग अक्सर भुला दिया जाता है। टाटा समूह की सफलता के पीछे भी एक ऐसी ही महिला का त्याग है जिन्होंने कम्पनी को सम्भालने के लिए अपने गहने तक बेच दिये थे। हम बात कर रहे हैं, लेडी मेहरबाई टाटा की, जो महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक स्मरणीय नाम हैं पर हम अक्सर उनको याद करना भूल जाते हैं। बाल विवाह उन्मूलन से लेकर महिला मताधिकार तक और लड़कियों की शिक्षा से लेकर पर्दा प्रथा तक को हटाने के लिए जानी जाती हैं मेहरबाई टाटा। आज हम बात करेंगे उनकी दूरदर्शिता की जिसने टाटा को डूबने से बचाया। दरअसल, हरीश भट्ट की एक किताब आई है टाटा स्टोरीज, जिसमें इस बारे में बात की गयी है।
मेहरबाई जमशेद जी टाटा के बड़े बेटे सर दोराब जी टाटा की पत्नी थीं। सर दोराबजी टाटा ने अपनी पत्नी लेडी मेहरबाई के लिए लंदन के व्यापारियों से 245.35 कैरेट जुबली हीरा खरीदा था जो कि कोहिनूर (105.6 कैरेट, कट) से दोगुना बड़ा है। 1900 के दशक में इसकी कीमत लगभग 1,00,000 पाउंड थी। यह बेशकीमती हार लेडी मेहरबाई के लिए इतना खास था कि वह इसे खास मौकों पर पहनने के लिए रख दिया था लेकिन हालात साल 1924 में हालात ने कुछ यूं करवट ली कि लेडी मेहरबाई ने इसे बेचने का फैसला ले लिया। हुआ यूं कि उस समय टाटा स्टील के सामने नकदी की कमी हो गयी। हालत यह थी कि कम्पनी के कर्मचारियों को वेतन देने तक के लिए पैसे नहीं बचे थे। उस वक्त लेडी मेहरबाई के लिए कंपनी के कर्मचारी और कम्पनी को बचाना ज्यादा सही लगा और उन्होंने जुबली डायमंड सहित अपनी पूरी निजी संपत्ति इम्पीरियल बैंक में गिरवी रख दी। इससे वह टाटा स्टील के लिए फंड जुटाना चाहती थीं। लंबे समय के बाद, कम्पनी ने रिटर्न देना शुरू किया और स्थिति में सुधार हुआ। भट ने कहा कि गहन संघर्ष के उस समय में एक भी कार्यकर्ता की छंटनी नहीं की गयी थी.
टाटा समूह के अनुसार, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट की स्थापना के लिए सर दोराबजी टाटा की मृत्यु के बाद जुबली हीरा बेचा गया था। लेडी मेहरबाई टाटा उन लोगों में से एक थीं, जिनसे 1929 में पारित शारदा अधिनियम या बाल विवाह प्रतिबंध अधिनियम के लिए परामर्श किया गया था। उन्होंने भारत के साथ-साथ विदेशों में भी इसके लिए सक्रिय रूप से प्रचार किया। वह राष्ट्रीय महिला परिषद और अखिल भारतीय महिला सम्मेलन का भी हिस्सा थीं। 29 नवंबर, 1927 को लेडी मेहरबाई ने मिशिगन में हिंदू विवाह विधेयक के लिए एक मामला बनाया। उन्होंने 1930 में अखिल भारतीय महिला सम्मेलन में महिलाओं के लिए समान राजनीतिक स्थिति की माँग की। लेडी मेहरबाई टाटा भारत में भारतीय महिला लीग संघ की अध्यक्ष और बॉम्बे प्रेसीडेंसी महिला परिषद की संस्थापकों में से एक थीं.लेडी मेहरबाई के नेतृत्व में भारत को अंतरराष्ट्रीय महिला परिषद में शामिल किया गया था।
सर दोराबजी टाटा पार्क की रजत जयंती और लेडी मेहरबाई टाटा की जयंती के अवसर पर, टीवी नरेंद्रन, सीईओ और एमडी, टाटा स्टील द्वारा जमशेदपुर के लोगों के लिए पार्क को फिर से तैयार किया गया। 2020 तक पट्टिका का अनावरण और डायमंड स्ट्रक्चर और मंडप को रोशन किया। इस अवसर पर, रूचि नरेंद्रन ने लेडी मेहरबाई टाटा की प्रतिमा का अनावरण किया। 2.5 एकड़ में फैले, अपग्रेड इस पार्क में अब सर दोराबजी की पत्नी, लेडी मेहरबाई टाटा और एक शानदार स्टील ट्यूबलर संरचना और मंडप की प्रतिमा शामिल है, जिसके माध्यम से प्रसिद्ध “जुबली डायमंड” की विरासत को स्टील में अमर कर दिया गया है।
लेडी मेहरबाई की मूर्ति पार्क के दक्षिणी छोर पर खड़ी है, सीधे सर दोराबजी की प्रतिमा के सामने है। 1900 के दशक की शुरुआत में “जुबली डायमंड” टाटा की कहानी का हिस्सा बन गया था जब प्रथम विश्व युद्ध के बाद की गंभीर वित्तीय कठिनाइयों से टिस्को को खींचने के लिए डायमंड को सर दोराबजी टाटा और उनकी पत्नी की पूरी व्यक्तिगत संपत्ति के साथ गिरवी रख दिया गया था।

प्रसिद्ध वास्तुकार, नूरू करीम, डायमंड स्ट्रक्चर और मंडप द्वारा डिज़ाइन किया गया, सर दोराबजी टाटा पार्क के समग्र रीडिज़ाइन का एक अभिन्न अंग है। पार्क के पश्चिमी छोर पर स्थित, पैवेलियन “जयंती डायमंड” की कालातीत लालित्य को कैप्चर करते हुए अपने टिकाऊ और सामंजस्यपूर्ण डिज़ाइन के लिए उधार देता है। 16 से 12 मीटर की दूरी पर, संरचना एक जटिल जाली बनाने के लिए टाटा स्ट्रक्चरुरा ट्यूबलर स्टील खोखले अनुभागों का उपयोग करके बनाया गया है। 45 मीट्रिक टन वजनी, संरचना लौकिक “हीरे” टिप पर टिकी हुई है, आकाश से मिलने के लिए जमीन से बाहर की ओर बढ़ती है।
( स्त्रोत साभार – वन इंडिया 24 लाइव, टाटा समूह की वेबसाइट. लोक आलोक न्यूज)

होगी महाभारत के रहस्यों की खोज, हस्तिनापुर में होगी खुदाई

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मेरठ : महाभारत से जुड़े रहस्यों की खोज अब आरम्भ होगी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम हस्तिनापुर में खुदाई करने जा रही है। मेरठ जिला मुख्‍यालय से 40 किलोमीटर दूर महाभारत के गवाह हस्तिनापुर एएसआई ने खुदाई की तैयारी शुरू कर दी है। महाकाव्य ‘महाभारत’ में कौरवों की राजधानी हस्तिनापुर की कथा से जुड़े रहस्‍यों को जानने के लिए एएसआई ने यह कदम उठाने का फैसला किया है। इससे पहले पिछले साल अगस्त में लगातार बारिश के बाद हस्तिनापुर टीले में तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के मिट्टी के बर्तनों की खोज की गयी थी।
एएसआई के नव-निर्मित मेरठ सर्कल के सुपरिटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट ब्रजसुंदर गडनायक के अनुसार अभी तक टीले वाले क्षेत्रों के संरक्षण और पुराने मंदिरों को नया रूप देने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। थोड़ा निर्माण भी हुआ है। सितम्बर के बाद जब मानसून खत्म हो जाएगा तब खुदाई पर गौर करेंगे। हस्तिनापुर उन पांच स्थलों में शामिल है, जिनका विकास केंद्र की ओर से प्रस्तावित किया गया है। 2020 के केंद्रीय बजट में राखीगढ़ी (हरियाणा), शिवसागर (असम), धोलावीरा (गुजरात) और आदिचल्लानूर (तमिलनाडु) के साथ हस्तिनापुर को मिसाल बनने वाली साइटों के रूप में विकसित करने के लिए चिह्नित किया गया था।
गंगा की बाढ़ में शहर बहने की आशंका
हस्तिनापुर में पहली खुदाई 1952 में हुई थी। जब आर्कियोलॉजिस्ट प्रोफेसर बीबी लाल ने निष्कर्ष निकाला कि महाभारत काल लगभग 900 ईसा पूर्व था और शहर गंगा की बाढ़ से बह गया था। दरअसल बीबी लाल अयोध्‍या में विवादित ढांचे बाबरी मस्जिद के नीचे 12 मंदिर स्तंभों की ‘खोज’ के लिए जाने जाते हैं। मोदीनगर के मुल्तानिमल मोदी कॉलेज में इतिहास के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. केके शर्मा ने कहा कि 1952 के बाद कोई ठोस विकास नहीं हुआ। फिर 2006 में हस्तिनापुर से लगभग 90 किमी दूर सिनौली में एक प्राचीन कब्रगाह की खोज और 2018 में एक तांबे के घोड़े से चलने वाले युद्ध रथ की खोज ने इस सिद्धांत को दर्शाया कि वे महाभारत काल के थे क्योंकि महाकाव्य में रथों का जिक्र किया गया है। शर्मा 2006 की सिनौली खुदाई का हिस्सा थे।

 

इतिहास के पन्नों में कहीं खो गयीं लेखनी की धनी चंपा दे भटियाणी

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प्रो. गीता दूबे

सभी सखियों को नमस्कार। सखियों, बहुत बार बड़ी और प्रतिष्ठित प्रतिभाओं के प्रकाश में कुछ प्रतिभाओं पर दुनिया की नजर‌ नहीं पड़ती और अगर पड़ती भी है तो प्रायः उंन पर सरसरी निगाह डालकर लोग आगे बढ़ जाते हैं। और जहाँ तक बात स्त्री प्रतिभाओं की है तो उनकी प्रतिभा तो घर- गृहस्थी के घेरे में बहुधा घुट कर रह जाती है। साथ ही अगर उनके पिता या पति बहुत अधिक प्रतिष्ठित या स्वनामधन्य हों तो भी स्त्री की रचनात्मकता और प्रतिभा को उस तरह से चिह्नित नहीं किया जाता। इसी सन्दर्भ में आज मैं बात कर रही हूँ, चंपा दे भटियाणी की जो पीथल नाम से प्रसिद्ध डिंगल और ब्रजभाषा के प्रख्यात कवि पृथ्वीराज राठौड़ की दूसरी पत्नी थीं। चंपादे जैसलमेर के रावल मालदेव की पौत्री और रावल हरराज की पुत्री थीं। रावल हरराज को साहित्य और कला से विशेष प्रेम था। राजस्थानी छंद शास्त्र के प्रसिद्ध ग्रंथ “पिंगल सिरोमणि” एवं श्रृंगार रस के काव्य “ढोला मारू री चौपाई के रचयिता जैन मुनि कुशललाभ उनके काव्य गुरु थे। ऐसे पिता के संरक्षण में पलने वाली बेटियों के ह्रदय में काव्य प्रेम का स्फुरण होना स्वाभाविक ही था।

रावल हरराज की बड़ी पुत्री गंगाकुंवर का विवाह बीकानेर के राजा राजसिंह तथा मंझली लीलादे का उनके छोटे भाई  पृथ्वीराज से हुआ था। लीलादे भी कविता करती थीं। लेकिन उनकी असामयिक मृत्यु के पश्चात जब शोक विह्वल हो पृथ्वीराज अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही बरतने लगे तो लीलादे से छोटी चंपादे का ब्याह पृथ्वी राज के साथ कर दिया गया। रानी चंपादे राजस्थानी और ब्रज भाषा में कविता लिखती थीं। हालांकि उनका कोई स्वतंत्र ग्रंथ तो नहीं मिलता लेकिन उनके द्वारा रचित मुक्तक अवश्य मिलते हैं जिन्हें पढ़कर उनकी प्रतिभा और रचनात्मकता का परिचय सहज ही मिल जाता है।  

वह अत्यंत रूपवती एवं बुद्धिमती स्त्री थीं और कठिन परिस्थितियों को अपनी बुद्धिमत्ता और विनोदप्रियता से सरस बनाने का हुनर भी जानती थीं। जब चंपादे पृथ्वीराज के जीवन में शामिल हुईं उस समय पृथ्वीराज खिन्न और निराश ही नहीं थे बल्कि वार्धक्य की ओर भी कदम बढ़ा रहे थे। एक दिन दर्पण में अपना प्रतिबिंब निहारते हुए उन्होंने अपना एक श्वेत केश तोड़ा तभी उन्हें चंपादे की मुस्कराती छवि दर्पण में दिखाई दी और उन्होंने अपने और चंपादे के बीच के उम्र के पार्थक्य को खेद के साथ स्वीकार करते हुए कहा-

“पीथल धोता आबियाँ, बहुली लग्गी खोड़।

पूरे जोवन मदमणी, अभी मूह मरोड़।।”

चंपादे ने इस पार्थक्य को अपनी सहृदयता और बुद्धि कौशल से किस तरह पाट दिया, यह दृष्टव्य है-

“प्यारी कहे पीथल सुनों, धोलां दिस मत जोय। 

नरां माहरां दिगम्बरां, पाकां हि रस होय।।

खेड़ज पक्का घोरियां, पंथज गधधां पाव।

नरां तुरंगा वन फ़लां, पक्कां पक्कां साव।।”

अर्थात खेती प्रौढ़ बैलों से और मार्ग की दूरी पके ऊँटों के पैरों से ही तय होती है। माना जाता है कि मर्द, घोड़े और वनफलों के पकने पर ही उनमें रस संचार होता है और स्वाद उत्पन्न होता है।

चंपादे की कविता में उनके ह्दय की गहन अनुभूतियों की अभिव्यक्ति बड़ी सघनता के साथ हुई है। हालांकि उनकी कविताओं के संकलन का कोई प्रयास नहीं हुआ है लेकिन यत्र तत्र प्राप्त उनके स्फुट छंदों में उनके जीवनानुभवों का निचोड़ मिलता है। उनके पति पृथ्वीराज राजा अकबर के दरबार में रहते थे। एक बार लंबी अवधि के उपरांत जब वे बीकानेर लौटे तो रानी चंपादे ने अपनी विरह वेदना के साथ- साथ विछोह के कारण ढलते यौवन को बड़ी मार्मिकता से निम्नलिखित कविता में पिरोया-

“बहु दीहां बल्ल्हो, आयो मंदिर आज। 

कंवल देख कुमलाइया, कहोस केहई काज।।

चुगै चुगावै चंच भरि, गए निलज्जे कग्ग।

काया पर दरियाव दिल, आइज बैठे बग्ग।।”

अर्थात केश रूपी काले कौवों की खूब देखभाल की लेकिन फिर भी वे उड़ ही गए और अब उनके स्थान पर शरीर रूपी सागर में श्वेत केश रूपी बक आ बैठे हैं, अर्थात युवावस्था तो बीत गयी और शरीर में वार्धक्य ने डेरा जमा लिया है।

ब्रजभाषा में लिखे गए चंपादे के कवित्त सहजता से प्राप्त नहीं होते जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि उनकी कविताओं को सहेजा नहीं गया। चंपादे की मृत्यु भी जल्दी ही हो गयी। वह भी पृथ्वी राज की पहली रानी की तरह पृथ्वी राज को अकेला छोड़ गयीं। पृथ्वीराज ने चंपादे की मृत्यु की मर्मांतक व्यथा में डूबकर कई दोहों की रचना की, जिनमें चंपादे के रूप लावण्य का सजीव चित्रण तो है ही, पृथ्वीराज का उनके प्रति अथाह प्रेम भी प्रकट हुआ है। उनमें से कुछ दोहे यहाँ प्रस्तुत हैं-

“चंपा पमला च्यारि, साम्हां दीजै सज्जणा।

हिंडोले गलिहारि, हंसते मुंहि हरिराजउत।।

चांपा चडीज वास,मौ मन मालाहर तणी। 

सैण सुगन्धि सांस, हियै आवै हरिराजउत ।।

चांपा चमकंनेह, दांतोई अनतै दामिणी । 

अहर अनै आभेह, होमि पड़ी हरिराजउत।।

हंसौ चीतै मानसर, चकवौ चीतै भांण ।

नितहु तुनै चीतखूं, भावै जांण म जाण ।।

चख रत्ते नख रतडे, दंसड़ा खड़ा खड़ देह । 

कहै पित्थ कल्याण रो, आरिख सिघ्घी अह ।।

भाषा सेतु : गीत चतुर्वेदी की कविताओं का बांग्ला अनुवाद

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अनुवादक – रेशमी सेन शर्मा

নীমের চারা (नीम का पौधा)
এটি একটি নিমগাছের চারা,
যাকে ঝুঁকে দেখো
আরেকটু ঝুঁকে দেখো,
তো একটি প্রকান্ড নিমগাছ মনে হবে/দেখতে পাব l
আরও ঝোঁক,আরেকটু,
মাটির সঙ্গে মিশে যাও l
তুমি ওর ছায়া পাবে/ছায়ার অনুভূতি পাবে l
একটি ছোট্ট মেয়ে জল দিয়ে দিয়ে এটিকে বড় করে তুলেছে
এর সবুজ পাতাগুলিতে এমন একটি তিক্ততা আছে ,
যা মুখের ভাষা কে মিষ্টতা শেখায়
যারা উচ্চতা কে ভয় পায়
তারা এসে এর নীচতা/লঘুতা র থেকে সাহস জুটাক

नीम का पौधा
यह नीम का पौधा है
जिसे झुक कर
और झुक कर देखो
तो नीम का पेड़ लगेगा
और झुको, थोड़ा और
मिट्टी की देह बन जाओ
तुम इसकी छाँह महसूस कर सकोगे

इसे एक छोटी बच्ची ने पानी दे-देकर सींचा है
इसकी हरी पत्तियों में वह कड़ुआहट है जो
ज़ुबान को मीठे का महत्त्व समझाती है
जिन लोगों को ऊँचाई से डर लगता है
वे आएँ और इसकी लघुता से साहस पाएँ

কথা বলার আগে ,( बोलने से पहले)
বুদ্ধিমান লোকেদের মতো করে কথা বলো,
নয়তো এমন কথা বলো,
যাতে মনে হয়,যে তুমি বুদ্ধিমান l
কথা বলার আগে,
ওই তরোয়ালগুলির ব্যাপারে/কথা ভাবো,
যারা জীভ কে ক্ষত বিক্ষত করে l
এটাও ভাবো,
যে একান্ত নীরবতার মাঝে,তোমার কর্কশ স্বর,
কাউকে অস্থির করে তুলতে পারে,
বহু সমাজে,কেবল একটি বাক্যই নিয়ে আসে ঝড় l
নিজেকে খুলে দিয়োনা,
কিন্তু খুলে কথা বলো,l
নিজের বুলিকে/কথাকে এইভাবে খুলে ধরো,
যে সে তারমধ্যে মিলিয়ে যাক
সে তোমাতে মিলিয়ে যাবে,তো তুমি বেঁচে যাবে l
কথা বলার আগে অনেকবার ভাবো,
তবুও বলা হয়ে গেলে উন্মুক্ত হয়ে যাও,
তরোয়ালগুলি ভেঙে যাবে l
( बोलने से पहले)

बुद्धिमान लोगों की तरह बोलो
नहीं तो ऐसा बोलो
जिससे आभास हो कि तुम बुद्धिमान हो

बोलने से पहले
उन तलवारों के बारे में सोचो
जो जीभों को लहर-लहर चिढ़ाती हैं

यह भी सोचो
कि कर्णप्रिय सन्नाटे में तुम्हारी ख़राश
किसी को बेचैन कर सकती है
कई संसारों में सिर्फ़ एक बात से आ जाता है भूडोल

खुलो मत
लेकिन खुलकर बोलो
अपने बोलों को इस तरह खोलो
कि वह उसमें समा जाए
वह तुममें समाएगा तो तुम बच जाओगे

बोलने से पहले ख़ूब सोचो
फिर भी बोल दिया तो भिड़ जाओ बिंदास
तलवारें टूट जाएँगी

কায়া/দেহ /শরীর (काया)
তুমি এতক্ষন ধরে আঁধারের দিকে চেয়েছিলে,
যে চোখের মণির রং কালো হয়ে গেছে,
বইগুলিকে এভাবে আষ্টেপৃষ্টে জড়িয়েছো,
যে শরীর যেন কাগজ হয়ে গেছে l
বলছিলে যে,
মৃত্যু আসে তো ওইভাবেই আসুক,
যেভাবে জলের কাছে আসে,
আর জল বাষ্প হয়ে যায় l
যেভাবে বৃক্ষের কাছে আসে,
আর বৃক্ষ দরজা হয়ে যায় l
যেভাবে আগুনের কাছে আসে,
আর আগুন ছাই হয়ে যায় l
তুমি গরুর থন হয়ে যেও,
আর দুধ হয়ে ঝরে পড়ো,
বাষ্প হয়ে বড়ো বড়ো ইঞ্জিন চালিয়ো l
ভাত রেঁধো ,
যেই পথ সর্বদা বন্দ থাকার জন্য অভিশপ্ত,
সেখানে দরজা হয়ে খুলো l
অসুস্থ মায়ের পালঙ্কের তলায় রাখা বাসন ছাই ঘষে মেজো
একটি দেশলাই কাঠি জ্বালিয়ো
আর সেটিকে অনেক্ষন ধরে দেখতে থেকো l

काया

तुम इतनी देर तक घूरते रहे अंधेरे को
कि तुम्हारी पुतलियों का रंग काला हो गया
किताबों को ओढा इस तरह
कि शरीर कागज़ हो गया

कहते रहे मौत आए तो इस तरह
जैसे पानी को आती है
वह बदल जाता है भाप में
आती है पेड़ को
वह दरवाज़ा बन जाता है
जैसे आती है आग को
वह राख बन जाती है

तुम गाय का थान बन जाना
दूध बनकर बरसना
भाप बनकर चलाना बड़े-बड़े इंजन
भात पकाना
जिस रास्ते को हमेशा बंद रहने का शाप मिला
उस पर दरवाज़ा बनकर खुलना
राख से मांजना बीमार माँ की पलंग के नीचे रखे बासन

तुम एक तीली जलाना
उसे देर तक घूरना

তাদের ব্যাপারে,যাদের আমি চিনিনা,
(उनके बारे में,जिन्हे मैं नहीं जानता)

আমি অনেক্ষন অবধি জেগে থাকি,
কখনো কখনো সকাল অবধি,
ঘরে পায়চারি করতে থাকি,
মেঝেতে ধূপধুপ আওয়াজ হয় l
যা নীচের ফ্ল্যাটে শোনা যায় ,
কেউ সেটা শুনে তার লয় তে ঘুমায় l
আমার জেগে থাকার ফলে/জাগরণে কেউ শান্তিতে ঘুমোতে পারে
তার ভয়,বিশ্বাস আর অন্ধকার , আমার কাছে অজ্ঞাত/অপরিচিত,
তার তৃষ্ণা আর চেষ্টাগুলিও আমার কাছে অজ্ঞাত /অপরিচিত,
তার কাশির আওয়াজে আমার ভেতরটা কেঁপে ওঠে ,
তার প্রতিটি গতি র সাথে আমার জড়তা নড়ে বসে l
কিছু জিনিষকে আটকানো যায়না,
যেমন কিছু শব্দ,বাক্য,বিচার আর রং,
কিছু হাসি কিছু রোদন,
প্রেম ও অভিমানের কিছু পৃথক মুহূর্ত,
যাদের আমরা বিশেষ চিনিনা,
তাদের চেনার প্রয়াসে,
চেনা মানুষগুলির আরও নিকটে চলে/পৌঁছে যাই,
আশেপাশে তাদের মতোই যেন কিছু খুঁজতে থাকি l
আর মনের ভেতর পুষে রাখিl
তাদের চিনে ফেলার,
এক বিনম্র ভ্রম l
उनके बारे में,जिन्हे मैं नहीं जानता

मैं जागता हूँ देर तक
कई बार सुबह तक
कमरे में करता हूं चहलक़दमी
फ़र्श पर होती है धप्-धप् की ध्वनि
जो नीचे के फ्लैट में गूँजती है
कोई सुनता है और उसकी लय पर सोता है
मेरी जाग से किसी को मिलती है सुकून की नींद

मैं नहीं जानता उसके भय, विश्वास और अंधकार को
उसकी तड़प और कोशिशों को
उसकी खाँसी से मेरे भीतर काँपता है कोई ढाँचा
उसकी करवट से डोलता है मेरा जड़त्व

कुछ चीज़ों को रोका नहीं जा सकता
जैसे कुछ शब्दों, पंक्तियों, विचारों और रंगों को
किसी हँसी किसी रुलाहट
प्यार और ग़ुस्से के पृथक क्षणों को
उन लोगों को भी जिनके बारे में हम ख़ास नहीं जानते
उन्हें जानने की कोशिश में
जाने हुए लोगों के और क़रीब आ जाते हैं
आसपास उनके जैसा खोजते हैं कुछ
और एक विनम्र भ्रांति सींचते हैं उन्हें जान चुकने की

(रेशमी विद्यार्थी हैं। प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है और अभी अनुवाद में डिप्लोमा कोर्स कर रही हैं। शुभ सृजन युवा की सदस्य रेशमी हमारी अनुवाद टीम का हिस्सा हैं।)

राज कुन्द्रा तो बॉलीवुड के घिनौने चेहरे का एक पन्ना भर हैं

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बबीता माली

डबल पी से जुड़ा कुन्द्रा के आसमान पर जाने और धराशायी होने का रिश्ता

आज बिज़नेस टाइकून राज कुंद्रा सुर्खियों में छाये हुए हैं। आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग के विवाद में फंसे राज कुंद्रा सोमवार को उस वक़्त फिर सुर्ख़ियों में आ गए जब मुंबई क्राइम ब्रांच ने उन्हें पॉर्नोग्राफी के मामले में गिरफ्तार किया। राज कुंद्रा का नाम उसलिए भी सुर्ख़ियों में है क्योंकि वो बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति हैं।

खैर मामला अभी एकदम गर्म है , यहाँ हम राज कुंद्रा के जीवन में ‘डबल पी ‘ के प्रभाव के बारे में बताने जा रहे हैं।  अब आप ये सोच रहे होंगे कि आखिर यहाँ किस डबल ‘पी’ के बारे में बात की जा रही है।  तो में यहाँ सस्पेंस ख़त्म कर आपके जेहन में उठने वाले सवाल का जवाब पेश कर रही हूँ।

राज कुंद्रा के जीवन में डबल P यानी पश्मीना शॉल और पॉर्नोग्राफी से हैं।  पश्मीना शॉल ने जहाँ राज कुंद्रा को ऊंचाई पर पहुँचाया , मालामाल बनाया तो वहीं पॉर्नोग्राफी ने उन्हें जेल पहुँचाया। एक बस कंडक्टर का बेटा बिज़नेस टाइकून बन गया और फिर अर्श से सीधे फर्श पर पहुँच गया।

पश्मीना शॉल और राज कुंद्रा का सफर

बात उस वक़्त की है जब राज कुंद्रा केवल 18 साल के थे। वो अपने  परिवार के साथ लंदन में रहते थे। उनका परिवार मिडिल क्लास परिवार था। उनके पिता बालकृष्ण की बात करें तो वे मूल रूप से लुधियाना के रहने वाले थे लेकिन करीब 50 साल पहले वो लंदन में जा बसे।  राज कुंद्रा के पिता पहले एक कॉटन फैक्ट्री में काम करते थे और उनकी माँ एक शोरूम में काम करती थी। इसके बाद उनके पिता बस कंडक्टर बने। उनकी  उस वक़्त पटरी पर आयी जब उन्होंने किराने की दुकान खोली।  इसके बाद वो एक के बाद  दूसरे व्यवसाय करने लगे।

जब उनका एक व्यवसाय मंदा होता तब वो दूसरा व्यवसाय चुन लेते। वहीं, राज को पता था बचपन से ही उनके माता – पिता राज कुंद्रा और उनकी बहनों की परवरिश के लिए काफी मेहनत किया करते थे।  इसके कारण राज कुंद्रा को रुपये की अहमियत बचपन से ही थी। जब वो 18 साल के हुए तब उनके पिता ने उन्हें दो रास्तों में से एक चुनने को कहा। उनके पिता ने राज से कहा था , या तो वो उनके रेस्टोरेंट को ज्वाइन कर ले या 6 महीने में साबित करे कि वो खुद अपने पैरों पर खड़ा हो सकते हैं ।  राज कुंद्रा ने दूसरा रास्ता चुना और अपना बैग पैक कर निकल लिए।

उस वक़्त उनके पास 2000 यूरो का क्रेडिट कार्ड था जिसकी भारतीय मुद्रा में कीमत करीब 170000 हज़ार के आसपास थी।  क्रडिट कार्ड लेकर राज कुंद्रा दुबई गए और वहां हीरे व्यवसायियों से मिले और बिज़नेस करने की सोची लेकिन वहां उनकी बात नहीं बनी।

इसके बाद वहां से वे नेपाल चले गए। नेपाल में पश्मीना शॉल काफी बिकते थे जिनकी कीमत भी बेहद कम थी। यही से राज कुंद्रा ने पश्मीना शॉल का व्यवसाय करने का मन बना लिया था और राज कुंद्रा को यकीन था कि पश्मीना शॉल का व्यवसाय उन्हें अर्श तक पहुँचा देगा।

राज कुंद्रा ने वहां से 100 पीस पश्मीना शॉल खरीदी और उसे लेकर लंदन गए। इसके बाद उन्होंने इंग्लैंड के बड़े – बड़े क्लोथिंग ब्रांड के साथ संपर्क किया और उन्हें पश्मीना शॉल दिखाई जो उन क्लोथिंग ब्रांड को बेहद पसंद आयी। इसके बाद ही राज कुंद्रा का पश्मीना शॉल का व्यवसाय शुरू हो गया।

इस व्यवसाय से वो लंदन में बिज़नेस टाइकून बन गए। इसके बाद से राज कुंद्रा को पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा।  वहीं 2009 में मॉरीशस की कंपनी की मदद से राज कुंद्रा ने आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स खरीदकर उसके मालिक बन गए।

पॉर्नोग्राफी ने कर दिया सब बर्बाद, पहुँचा दिया हवालात 

वहीं अब पॉर्नोग्राफी के मामले में राज कुंद्रा को मुंबई क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया हैं।  मुंबई क्राइम ब्रांच सूत्रों ने बताया , फरवरी 2021 में राज कुंद्रा के खिलाफ पोर्न फिल्म बनाने और फिर उसे विभिन्न ऐप के जरिये पब्लिश करने का आरोप लगाकर मामला दर्ज कराया गया था।

अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी को अक्सर महँगे तोहफे दिया करते थे कुन्द्रा

उसी मामले की जांच में एक आरोपी उमेश कामत को गिरफ्तार किया गया था।  उससे पूछताछ में राज कुंद्रा का नाम सामने आया था।  इसके बाद जांच शुरू की गयी और राज कुंद्रा के खिलाफ सबूत मिले जिसके आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा और 11  लोगों को गिरफ्तार किया गया हैं। सभी 23 जुलाई तक पुलिस हिरासत में हैं।  सूत्रों की मानें तो पिछले डेढ़ सालों से राज कुंद्रा पॉर्नोग्राफी का धंधा चला रहे थे। पिछले साल लॉक डाउन के समय उन्होंने अपन ये धंधा शुरू किया था।

आरोप है कि इस धंधे से उन्हें रोजाना 3 -4 लाख की कमाई होती थी जो बाद में बढ़कर 7 -8 लाख तक हो गई थी। अब राज कुंद्रा जेल में है। उनके साथी भी जेल की हवा खा रहे हैं।  पुलिस उनके दफ्तर में तलाशी अभियान चला रही हैं।  एक तलाशी अभियान में पुलिस को कुछ हार्डडिस्क मिली हैं जिसकी जांच की जा रही हैं।

ऐसे होता था काम 

‘हॉटशॉट ‘ नाम के ऐप के जरिये इस वीडियो को चलाया जाता था।  दरअसल , सूत्रों ने बताया , पुलिस को जाँच में पता चला मॉडल को वेब सीरीज या शार्ट फिल्म में काम दिलाने के बहाने ऑडिशन के लिए बुलाया जाता था और इसके बाद उनसे न्यूड वीडियो बनवाये जाते थे।

हालाँकि , इस मामले में एक प्रख्यात यूट्यूबर  ने भी खुलासा किया कि उसे भी हॉटशॉट के लिए राज कुंद्रा ने बुलाया था।  इसके अलावा उनकी गिरफ़्तारी के बाद कई और मॉडल ने राज पर आरोप लगाए हैं। इस ऐप के सब्सक्राइबर से मिलने वाले रुपये को मेंटेनेंस खर्च दिखाया जाता था और फिर विभिन्न अकाउंट से होते हुए राज कुंद्रा के अकाउंट में रुपये आते थे।

फिलहाल , पुलिस राज कुंद्रा के बैंक अकाउंट की जांच कर रही हैं।  बैंक से इस बारे में जानकारी मांगी गयी है।

बॉलीवुड में किसी ने जताया विरोध तो किसी ने किया समर्थन

वहीं बॉलीवुड से भी किसी ने विरोध जताया तो किसी ने राज कुंद्रा को सपोर्ट किया। हमेशा से मुखर होने वाली एक्ट्रेस कंगना रनौत भी इस मामले में चुप नहीं रही और उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी।  उन्होंने इंस्टाग्राम में पोस्ट कर कहा , इसलिए  मैं बॉलीवुड को गटर कहती हूँ।

हर चमकने वाली चीज़ सोना नहीं होती। मैं अपनी आगामी प्रोडक्शन फिल्म टीकू वेड्स शेरू के जरिये बॉलीवुड को बेनकाब करने जा रही हूँ। वहीं सिंगर मीका सिंह , ड्रामा क्वीन राखी सामंत सहित अन्य ने राज कुंद्रा का समर्थन किया हैं।

 

अनुमान : देश में 2030 तक 15 बिलियन डॉलर का होगा ओटीटी उद्योग

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कोलकाता : भारत में ओटीटी उद्योग तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि 2030 तक भारत में यह उद्योग 15 बिलियन अमरीकी डॉलर का हो जायेगा। माना जा रहा है कि मनोरंजन के पारम्परिक माध्यमों को यह क्षेत्र पीछे छोड़ देगा। 2020 वित्त वर्ष में ओटीटी बाजार 1.7 बिलियन अमरीकी डॉलर का था जिसमें ऑडियो और वीडियो, दोनों शामिल थे। घरेलू स्वतंत्र लेनदेन सलाहकार फर्म आरबीएसए एडवाइजर्स का मानना ​​है कि इस उद्योग में अगले 9 से 10 वर्षों में यूएस $ 15 बिलियन का उद्योग बनने की क्षमता है।
बेहतर नेटवर्क, डिजिटल कनेक्टिविटी और स्मार्टफोन तक पहुंच के साथ, भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म ने समवर्ती आधार पर ग्राहकों को तेजी से आकर्षित किया है। डिज्नी प्लस हॉटस्टार, अमेज़ॅन प्राइम वीडियो और नेटफ्लिक्स जैसे शीर्ष पसंदीदा के अलावा, स्पेस में कई स्थानीय और क्षेत्रीय ओटीटी खिलाड़ी, जैसे -सोनी लीव, वूट, जी 5. इरोज नाउ, एएल बाला जी. होईचोई और अड्डा टाइम्स भी लोकप्रिय हैं। राजीव शाह, एमडी और सीईओ आरबीएसए एडवाइजर्स, “कोविड -19 ने दर्शकों के मीडिया का उपभोग करने के तरीके को बदल दिया है। इस अवधि में ओटीटी को अपनाने के साथ एक निर्विवाद प्रवृत्ति सामने आई। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध पसंद की सामग्री के लिए बढ़ते बाजार और उपभोक्ता की भूख ने इसे बढ़ावा दिया। तेजी। ओटीटी उपभोक्ता अनुभव से पहले कभी नहीं प्रदान करते हैं- सामग्री का विकल्प, पहुंच में आसानी, डिवाइस/माध्यमों की पसंद (हैंड फोन, लैपटॉप, टैबलेट या टीवी स्क्रीन), उदार सेंसरशिप नीति।” शाह कोरोना और लॉकडाउन को इस सफलता का श्रेय देते हैं।
एनवी कैपिटल के सह-संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर विवेक मेनन कहते हैं, “चीन में अंतरराष्ट्रीय ओटीटी खिलाड़ियों के अत्यधिक विनियमित वातावरण को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय ओटीटी खिलाड़ियों के ग्राहक आधार को बढ़ाने के लिए भारत अमेरिका के बाद अगला गढ़ है। इसके साथ ही कॉमकास्ट के स्वामित्व वाले “पीकॉक” और एचबीओ जैसे कई अंतरराष्ट्रीय प्रवेशकर्ता भारत में अपनी पहचान बनाने के लिए बाड़ पर बैठे हैं। इस प्रवृत्ति के साथ-साथ घरेलू ओटीटी प्रदाताओं के तेजी से बढ़ने को देखते हुए, यह उद्योग आने वाले वर्षों में अपनी मजबूत विकास गति को जारी रखेगा।
सामग्री की गुणवत्ता हमेशा उपभोक्ता वृद्धि का एक महत्वपूर्ण चालक बनी रहेगी। हाल के वर्षों में, हमने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाली मूल सामग्री में भारी वृद्धि देखी है। मूल सामग्री बनाने और द्वि घातुमान देखने की सुविधा के अलावा, नेटवर्क और प्रोडक्शन हाउस ने भी लाइव इवेंट और प्रदर्शन के अधिकार प्राप्त करने में मूल्य देखना शुरू कर दिया है। भारत में दर्शकों ने हाल ही में फिल्मफेयर और स्ट्रीमिंग सोशल नेटवर्क्स को पहली बार ओटीटी पुरस्कारों के लिए शामिल होते देखा। यह भारत के मीडिया और मनोरंजन उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक घटना थी।
ओटीटी सेवाओं जैसे नेटफ्लिक्स, अमेज़ॅन, डिज़नी + हॉटस्टार और अन्य द्वारा मूल और साथ ही अधिग्रहित सामग्री में किए गए बड़े निवेश से सब्सक्रिप्शन वीडियो-ऑन-डिमांड को कुल ओटीटी राजस्व का एक बड़ा हिस्सा बनाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, ओटीटी परिदृश्य में विकास की अगली लहर टियर 2,3,4 शहरों और भारतीय भाषा बोलने वाली आबादी से आएगी।
ओटीटी उद्योग की सफलता के कारक
• भारत में दुनिया में ऑनलाइन वीडियो की प्रति व्यक्ति खपत दूसरे स्थान पर है
• दुनिया में सबसे सस्ता मोबाइल डेटा 18.5/GB (2015 – INR313/GB) पर
• ग्रामीण इंटरनेट पहुंच में वृद्धि
• भारत में स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं की संख्या खगोलीय दर से बढ़ रही है। मोबाइल ब्रॉडबैंड इंडिया ट्रैफिक इंडेक्स (एमबिट) 2021 के अनुसार, भारत में प्रति उपयोगकर्ता औसत मासिक डेटा उपयोग दिसंबर 2020 में सालाना आधार पर 20 प्रतिशत बढ़कर 13.5 जीबी हो गया, क्योंकि भारतीयों ने स्मार्टफोन पर रोजाना लगभग पांच घंटे बिताए।
• किफायती डेटा वाले स्मार्टफोन ने टियर 2, 3, 4 शहरों से 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं के जीवंत देशी वक्ताओं को भी ऑनलाइन ला दिया है और एक व्यापक अवसर पैदा किया है।
• ओटीटी परिदृश्य में विकास की अगली लहर हमारे अपने टियर 2,3,4 शहरों और भारतीय भाषा बोलने वाली आबादी से आएगी।
• पिछले कुछ वर्षों में भारतीय उपभोक्ताओं की देखने की आदतों में काफी वृद्धि हुई है। एक ओर जहां स्मार्टफोन और सोशल प्लेटफॉर्म पर शॉर्ट-फॉर्म वीडियो कंटेंट की खपत बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न ओटीटी प्लेटफॉर्म पर द्वि घातुमान शो देखना भी आम हो गया है।

बेटा केन्द्रीय राज्यमंत्री और स्वाभिमानी माता – पिता करते हैं मजदूरी

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पड़ोसियों से मिली बेटे के मंत्री बनने की खबर
कोलकाता : हाल ही में मोदी मंत्रिमण्डल का विस्तार हुआ है और कई नये चेहरे दिखे हैं। इनमें से एक चेहरा है भाजपा की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष एल मुरुगन का, जिनको राज्यमंत्री बनाया गया है। 44 वर्षीय के मुरुगन ने लंबे संघर्ष के बाद दिल्ली तक का सफर तय किया है। मगर यहाँ हम मुरुगन की नहीं बल्कि उनके पिता की बात कर रहे हैं जिनकी सादगी इन दिनों चर्चा में है। केंद्रीय राज्यमंत्री एल मुरुगन के माता-पिता राजनीति की चकाचौंध से दूर तमिलनाडु के नामक्कल जिले के कोन्नूर गांव में मजदूरी करते हैं। मुरुगन के केंद्रीय मंत्री बनने के बाद जब मीडिया उनके घर पहुंची तो उनके माता-पिता से दिल्ली से करीब 2500 किलोमीटर दूर नमाक्कल के कोन्नूर गांव में काम कर रहे थे। कड़ी धूप में 59 वर्षीय माँ एल वरुदम्मल एक खेत से खर-पतवार निकाल रही हैं। लाल साड़ी, चोली के ऊपर सफेद शर्ट पहने और सिर पर लाल गमछा लपेटे वरुदम्मल की सूरत गांव में रहने वाली किसी भी आम महिला जैसी है। पास के ही एक खेत में 68 साल के पिता लोगनाथन जमीन समतल करने में लगे हैं। दोनों को देखकर यह अंदाजा बिल्कुल नहीं होगा कि वे एक केंद्रीय मंत्री के माता-पिता हैं। मीडिया को इन दोनों से बात करने के लिए खेत के मालिक से इजाजत लेनी पड़ी।
बेटे पर नाज लेकिन खुद्दारी बरकरार
बेटा एल मुरुगन मोदी सरकार में राज्यमंत्री बना है, लेकिन मां-बाप अब भी खेतों में पसीना बहा रहे हैं। दरअसल, एल मुरुगन दलित हैं और वो अरुणथातियार समुदाय से आते हैं। गांव में उनका छोटा सा घर है। माता-पिता को जब भी काम मिलता है, वो कर लेते हैं। कभी खेतों में मजदूरी, तो भी बोझ ढोने का काम। जब पड़ोसियों से बेटे के मंत्री बनने की खबर मिली, तब भी दोनों खेत में काम कर रहे थे। बेटे के मंत्री बनने की खबर सुनने के बाद भी दोनों रुके नहीं लगातार काम करते रहे। मां-बाप को अपने बेटे की कामयाबी पर गर्व तो है, लेकिन दोनों को अपने बेटे से अलग जिंदगी पसंद है, पसीना बहाकर कमाई रोटी खाना अच्छा लगता है।
केंद्रीय मंत्री मुरुगन के पिता ने बताया कि उनका बेटा पढ़ाई में बहुत अच्छा था। शुरुआत में सरकारी स्कूल में पढ़ाई की। फिर बाद में मुरुगन ने चेन्नई के आंबेडकर लॉ कालेज से कानून की पढ़ाई की। पिता को बेटे की पढ़ाई के लिए दोस्तों में पैसे उधार लेने पड़े थे।  मुरुगन ने भाजपा की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष बनने के बाद चेन्नई में अपने माता-पिता को साथ रहने के लिए बुलाया था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद वे लौट गए। मुरुगन की मां ने कहा, ”हमलोग कभी-कभी तीन-चार दिनों के लिए चेन्नई जाते थे, लेकिन उसकी व्यस्तता में हम फिर नहीं हो पाए। इस लिए हमलोग फिर से अपने गांव कोन्नूर आए।”
बताया जा रहा है कि एल मुरुगन ने मंत्री बनने के बाद अपने माता-पिता को फोन किया था। तब इन दोनों ने उनसे पूछा था कि क्या तमिलनाडु भाजपा इकाई के अध्यक्ष पद से उनका मौजूदा पद बड़ा है। मुरुगन के माता-पिता कहने हैं, ‘हमारा बेटा बड़े पद पर पहुँच गया है। माँ-बाप के तौर पर हमारे लिए ये बड़ी उपलब्धि है।
मुरुगन के पास दो-दो मंत्रालयों का है प्रभार
केंद्रीय मंत्री मुरुगन के पास केंद्र में मत्स्य पालन, पशुपालन और सूचना तथा प्रौद्योगिकी मंत्रालय है। उन्हें दोनों विभागों में राज्य मंत्री बनाया गया है। मुरुगन ने 7 जुलाई को बाकी नए सदस्यों संग शपथ ली थी। वह इस साल विधानसभा चुनाव लड़े थे मगर डीएमके उम्मीदवार से हार गए।

सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में वेबिनार

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कोलकाता : सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल ने हाल ही में काम और जीवन के सन्तुलन पर एक वेबिनार आयोजित किया। इस मौके पर वक्ता के रूप में उपस्थित मनोचिकित्सक सलाहकार तथा जीवन प्रशिक्षक यानी कन्सल्टेंट साइक्रिआर्टिस्ट लाइफ कोच डॉ. इरा दत्ता और ऑर्थियोपैडिक स्पाइन सर्जन शुमायू दत्ता ने महामारी के दौरान शिक्षकों के वर्क फ्रॉम होम के कारण होने वाली शारीरिक तथा भावनात्मक समस्याओं पर बात की। इस वेबिनार में कोलकाता के प्रख्यात स्कूलों, लक्ष्मीपत सिंघानिया अकादमी, श्री शिक्षायतन स्कूल, बिड़ला हाई स्कूल, सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल, बिड़ला हाई स्कूल, मुकुन्दपुर, इंडस वैली वर्ल्ड स्कूल, गोखले मेमोरियल गर्ल्स स्कूल ने भाग लिया। वेबिनार में काम और जीवन के बीच सन्तुलन बनाने के तरीके विद्यार्थियों ने सीखे।

 

हेरिटेज लॉ कॉलेज, कोलकाता में पहला मूट कोर्ट आयोजित

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कोलकाता : हेरिटेज लॉ कॉलेज, कोलकाता ने पहला मूट कोर्ट कम्प्टीशन वर्चुअल माध्यम पर आयोजित किया। यह मूट कोर्ट देश के पूर्व अटार्नी जनरल पद्मविभूषण सोली जहाँगीर सोराबजी की स्मृति में आय़ोजित किया गया। प्रतियोगिता को क्रिमिनल और कॉरपोरेट लॉ के जानकार अधिवक्ता सब्यसाची बनर्जी ने सम्बोधित किया। प्रतियोगिता का विषय था ‘अग्रिम जमानत के मामले में और आपराधिक अभियोजन को रद्द करने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता 1973 के तहत उच्च न्यायालय की अंतर्निहित शक्ति से सम्बन्धित था। विद्यार्थियों को अदालतों की कार्यवाही से जुड़े व्यावहारिक मसलों की जानकारी मिली। प्रतियोगिता का समापन पुरस्कार वितरण के साथ हुआ। हेरिटेज लॉ कॉलेज, कोलकाता के प्रिंसिपल प्रो. डॉ. एस. एस, चटर्जी ने इस कार्यक्रम को विद्यार्थियों के लिए सीखने वाला अनुभव बताया।

भारत जैन महामंडल लेडीज विंग कोलकाता का ‘सुरंगों सावन’

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कोलकाता : भारत जैन महामडल लेडिज विंग कोलकाता ‘सुरंगों सावन’ जूम लहरिया थीम पर मनाया। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में डॉ. वसुन्धरा मिश्र उपस्थित थीं। सभी सदस्याओं ने शानदार प्रदर्शन किया। नाच ,गाना, कैटवाग, कविता आदि आदि। सभी सदस्याओं के सुन्दर प्रदर्शन ने सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम में प्रथम स्थान अंजू सुराणा, दूसरा नीलम दूगड़ तीसरा सुनीता सेठिया का रहा। चेयरपर्सन सरोज भसाली (डूगरगढ) ने नवकार महामन्त्र से कार्यक्रम की शुरूआत की। वाइस चेयरपर्सन अंजू सेठिया (डूगरगढ़) ने कुशलतापूर्वक संचालन किया। भाग लेने वाली सदस्याओं में सज्जन भसाली, रेशम दूगड़, सुनीता सेठिया, कांता नाहटा,कंचन बैद, नीलम दूगड़, अंजू सुराणा, ममता पीचा, सुषमा छाजेड़,रूबी गोलछा आदि शामिल थीं।