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साहित्य संवाद के तहत काव्यपाठ आयोजित

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कोलकाता : सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन की ओर से साहित्य संवाद श्रृंखला के अंतर्गत काव्यपाठ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से कवियों ने हिस्सा लिया। चर्चित कवि विजयबहादुर सिंह ने कहा कि यह आयोजन नई प्रतिभाओं का मंच है। उन्होंने’ अर्द्धसत्य का संगीत’ कविता के जरिए सत्ता के त्रिशूल की बर्बरता का जिक्र किया। वे अपनी कविताओं में आदमियत और प्रतिरोध की बातें कहते हैं। मुम्बई से डॉ. विनोद प्रकाश गुप्ता ने ‘हुआ जो इश्क हमको वो यकीनन दफअतन होगा, तुम्हारे देश में कुछ तो मुहब्बत का चलन होगा’ का पाठ कर समां बांध दिया। राज्यवर्धन की कविताओं में धरती और लोकतंत्र को बचाने की बेचैनी दिखी। निर्मला तोदी ने अपनी कविताओं में जीवन के कई रूपों का कोलाज प्रस्तुत किया। शहंशाह आलम (पटना) ने ‘फफूंद’ और ‘भाषा’ कविता के माध्यम से तत्कालीन व्यवस्था पर प्रहार किया। राजकिशोर राजन (पटना) ने प्रेमचंद के गोदान की आयरनी पर अच्छी कविता का पाठ किया। शशि कुमार शर्मा (वर्द्धमान विश्वविद्यालय) ने पर्यावरण और स्त्री की अवस्था पर केंद्रित कविताओं का पाठ किया। कलावती कुमारी (आर. बी. सी. सांध्य कॉलेज) ने प्रेम, लोकतंत्र और स्त्री विमर्श की कविताओं को प्रस्तुत किया। नागेंद्र पंडित (आई. वो. सी. एल.) ने एक पिता के मन के आकाश को ऊंचाई दिया। अक्षत डिमरी  (आईआईटी खड़गपुर) ने ‘कोयल पर लगे बंधन, गीत कौवे गा रहे हैं’ की गीतात्मक प्रस्तुति दी। सूर्यदेव राय ने देश की वर्तमान स्थिति और प्रेम पर प्रभावी कविताएं सुनाई। पार्वती पंडित (काजी नजरुल विश्वविद्यालय) ने धर्म और राजनीति संबंधी कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ आलोचक डॉ. शंभुनाथ ने कहा कि यदि हमारा कविता से लगाव है तो इसका अर्थ है कि हमारा लगाव जीवन से है। कविता हमें अहिंसक बनाती है। स्वागत वक्तव्य देते हुए प्रो. संजय जायसवाल ने कहा कि साहित्य संवाद का यह आयोजन सृजनात्मकता की पहल है। इस अवसर पर रामनिवास द्विवेदी, उदयभानु दुबे, अल्पना नायक, श्रीकांत द्विवेदी, जयराम पासवान, आदित्य गिरि,रामप्रवेश रजक,ज्योतिमय बाग सहित भारी संख्या में साहित्य और संस्कृति प्रेमी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन राहुल गौड़ किया। तकनीकी सहयोग मधु सिंह,उत्तम ठाकुर और रूपेश यादव ने दिया।

अलीपुर चिड़ियाघर में जन्मे एनाकोंडा के 9 बच्चे

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बबीता माली

ग्रीन एनाकोंडा लाने की तैयारी में चिड़ियाघर प्रबन्धन

कोलकाता: कोलकाता में अलीपुर चिड़ियाघर बहुत ही प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। अगर कोई कोलकाता घूमने के लिए आते हैं तो वे एक बार इस चिड़ियाघर को देखने जरूर आते हैं। अलीपुर चिड़ियाघर कोलकाता के बीच में स्थित है और यहाँ पहुंचने के लिए किसी को भी कोई परेशानी नहीं होती है। अभी कोरोना महामारी चल रही हैं और उसके प्रकोप से अलीपुर चिड़ियाघर भी अछूता नहीं है।  कोरोना और लॉक डाउन के कारण मई महीने से ही फिर से अलीपुर चिड़ियाघर दर्शकों के लिए बंद है लेकिन इस लॉक डाउन में भी चिड़ियाघर में खुशियां आयी है। इस बार अलीपुर चिड़ियाघर में एनाकोंडा के 9 बच्चों ने जन्म लिया है। इन बच्चों के जन्म के साथ ही अलीपुर चिड़ियाघर में एनाकोंडा की संख्या 20 हो गई हैं। इसके कारण कोलकाता का अलीपुर चिड़ियाघर देश का दूसरा ऐसा चिड़ियाघर बन गया है जहाँ एक साथ इतने एनाकोंडा हैं।  ये सभी एनाकोंडा येलो एनाकोंडा हैं। इन बच्चों के जन्म से चिड़ियाघर प्रबंधन में ख़ुशी की लहर है।  शनिवार को इसकी खबर मीडिया को दी गई।  इसके बाद से ही अलीपुर चिड़ियाघर सुर्ख़ियों में आ गया है।

11 जुलाई को एनाकोंडा के दो जोड़े ने दिया बच्चों को जन्म 

इस मामले में अलीपुर चिड़ियाघर के निदेशक आशीष कुमार सामंत ने बताया , चिड़ियाघर में एनाकोंडा के 9 बच्चों ने जन्म लिया है जो बहुत ही ख़ुशी की बात है।  चिड़ियाघर में वर्ष 2019 में मद्रास के चिड़ियाघर से 4 एनाकोंडा मंगवाए गए थे।  पिछले वर्ष एनाकोंडा के 7 बच्चों ने जन्म लिया था।

इस बार मद्रास से लाये गए उन चार एनाकोंडा ने 11 जुलाई को 9 बच्चों को जन्म दिया। इन सभी बच्चों का वजन 100 – 150 ग्राम है (प्रति बच्चा) हैं।  इनकी लम्बाई करीब 8 फुट है।  चिड़ियाघर के निदेशक ने बताया , हमारे यहाँ एनाकोंडा के प्रजनन की सारी सुविधाएं हैं जिसके कारण ये एनाकोंडा तेजी से बच्चा पैदा कर पा रहे हैं।

सभी बच्चे स्वस्थ्य हैं। ये सभी येलो एनाकोंडा है।  येल्लो एनाकोंडा के इतने सारे बच्चों के इस चिड़ियाघर में होने से हमारा चिड़ियाघर दूसरे नंबर पर आ गया है।  उन्होंने बताया , मद्रास ज़ू में येलो एनाकोंडा की संख्या सबसे ज्यादा हैं।  अब हमारा चिड़ियाघर इस ज़ू के बाद देश का दूसरा चिड़ियाघर बन गया है जहाँ 20 येलो एनाकोंडा है।

उन्होंने बताया , इन बच्चों में कितने नर और मादा है , इसका पता नहीं चल पाया है।  इन्हें अभी छुआ नहीं गया हैं।  कुछ दिनों बाद बड़े होने पर इनकी जांच कर पता लगाया जायेगा कि इनमें कितने नर और कितना मादा एनाकोंडा हैं।  वहीं , अभी इन्हें बहार एनक्लोजर में नहीं रखा जायेगा।  लॉक डाउन हटने अपर जब चिड़ियाघर खुलेगा तब दर्शकों के लिए इन्हें बाहर एनक्लोजर में रखा जायेगा।

ग्रीन एनाकोंडा लाने की तैयारी में है अलीपुर चिड़ियाघर 

अलीपुर चिड़ियाघर के निदेशक आशीष कुमार सामंत ने बताया , जल्द ही हम ग्रीन एनाकोंडा लाने की योजना बना रहे हैं।  ग्रीन एनाकोंडा और येलो एनाकोंडा दोनों ही विदेशी प्राणी हैं।  ग्रीन एनाकोंडा , येलो एनाकोंडा की तुलना में ज्यादा एग्रेसिव होते हैं।

ग्रीन एनाकोंडा की लम्बाई 30 फुट होती हैं तो वहीं येलो एनाकोंडा की लम्बाई 20 – 22 फुट तक होती है। उन्होंने कहा , ग्रीन एनाकोंडा मैसूर और नंदन कानन में है।  अगर हम ग्रीन एनाकोंडा ले आते है तो हमारा चिड़ियाघर तीसरे नंबर पर होगा।

मल्लेश्वरम के सरकारी स्कूल में बच्चे कोडिंग में निपुण, स्कूल बनेगा सैटेलाइट

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बेंगलुरू : बेंगलुरू का मल्लेश्वरम सरकारी बॉयज हाई स्कूल एक मिसाल है, इसीलिए इसे 75 सैटेलाइट बनाने के लिए चुना गया है। ये सैटेलाइट अगले साल आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर लॉन्च होंगे। स्कूल प्रिसिंपल लीला जीपी इसकी सबसे बड़ी वजह यहाँ की हाईटेक अटल टिंकरिंग लैब को बताती हैं। कर्नाटक में इस तरह की लैब वाले सिर्फ तीन स्कूल हैं। लीला बताती हैं कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में यहां के छात्रों के कुछ प्रोजेक्ट शीर्ष-50 में चुने गए थे। इसी वजह से स्कूल को केंद्र सरकार और नीति आयोग की ओर से अटल टिंकरिंग लैब मिली थी। यह लैब सभी बच्चों के लिए है, चाहे वो बच्चा किसी दूसरे स्कूल का क्यों न हो। यहां लगातार प्रयोग चलते हैं। लॉकडाउन के दौरान कुछ परेशानियां हुई थीं, लेकिन अब बच्चे यहां आकर कई तरह के वैज्ञानिक प्रयोगों में भाग लेते हैं। सीखते हैं। जूनियर्स को सिखाते भी हैं। इसमें आईटी कंपनी डेल तकनीकी मदद कर रही है। सॉफ्टवेयर भी दे रही है। इंडियन टेक्नोलॉजिकल कांग्रेस एसोसिएशन और इसरो लगातार स्कूल के संपर्क में हैं। स्कूल के अच्छे प्रदर्शन में शिक्षणा फाउंडेशन और सीएन अश्वत्नारायण फाउंडेशन जैसे एनजीओ का भी अहम योगदान है। इन्होंने लॉकडाउन के दौरान स्कूल के 1000 गरीब बच्चों को उच्च क्षमता वाले टैब दिए। शिक्षणा फाउंडेशन के नवीन बताते हैं कि जल्द ही स्कूल के हर पांचवें छात्र को हाई एंड लैपटॉप दिया जाएगा। फाउंडेशन के चेतन जैसे सदस्य सीधे छात्रों से जुड़कर उनको गाइड करते हैं। लैब इंचार्ज मैत्रा एसपी वो शख्स हैं, जो इस प्रोजेक्ट के चलते सालभर व्यस्त रहने वाली हैं। वे कहती हैं लोग यहां आकर बच्चों की प्रतिभा देख सकते हैं। खासतौर पर कोडिंग के संदर्भ में। यहां बच्चों में कोडिंग की समझ इंजीनियरों जैसी है।
सैटेलाइट प्रोजेक्ट में शामिल 10वीं कक्षा का अमित झारखंड के बोकारो से है। अमित की मां घरों में काम करती हैं और पिता मजदूरी। लेकिन, अमित इसी सरकारी स्कूल में रहते हुए कोडिंग में पारंगत हो चुका है। बढ़िया अंग्रेजी बोलता है। इसी तरह छात्र शिव कुमार लगातार साइंस प्रोजेक्ट से जुड़ा है। ये बच्चे कंप्यूटर इंजीनियर बनने की तैयारी अभी से शुरू कर चुके हैं। लड़कों के इस स्कूल में लड़कियों को भी दाखिला दिया जा रहा है
बेहतरीन शिक्षा सभी का हक है, इसको ध्यान में रखते हुए लड़कों के इस स्कूल में अब लड़कियों को भी प्रवेश दिया जा रहा है। सैटेलाइट प्रोजेक्ट पर 8वीं से 10वीं के बच्चे काम करेंगे। प्रोजेक्ट में लड़कियों को भी शामिल किया जाएगा।

हैदराबाद में दम्पति ने 40 लाख खर्च कर भरे 2000 सड़कों के गढ्‌डे

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लोगों ने नाम दिया ‘सड़कों का डॉक्टर’
हैदराबाद : सड़कों पर हो रहे गड्ढों की वजह से आए दिन सैकड़ों लोगों को अपनी जान गवानी पड़ती है। हैदराबाद में लोगों को ‘सड़कों का डॉक्टर’ मिल गया है। पिछले 11 सालों से यह गंगाधर और उनकी पत्नी वेंकटेश्वरी यह काम करते आ रहे हैं। गंगाधर तिलक कटनाम सेवानिवृत रेलवे इंजीनियर हैं जिनकी उम्र 73 साल है। वहीं उनकी पत्नी का नाम वेंकटेश्वरी कटनाम है जिसकी उम्र 64 साल है। इन्हें हैदराबाद की सड़कों पर जगह-जगह सड़कों के गढ्‌डे भरते हुए देखा जाता है। गंगाधर इस काम में अपनी हर महीने की पेंशन का पैसा भी खर्च करते हैं। वे अब तक 40 लाख खर्च कर 2000 गढ्‌डे भर चुके हैं। गंगाधर के अनुसार, उन्होंने ये काम रेलवे से सेवानिवृत्त होने के बाद शुरू किया। उन्होंने इस मुद्दे पर संबंधित अधिकारियों से बात भी की लेकिन जब कुछ नहीं हुआ तो खुद अपनी पत्नी के साथ इसे करने लगे। उनके काम को देखते हुए लोग उन्हें सड़कों का डॉक्टर कहते हैं। इस काम को करने से पहले गंगाधर ने 35 साल तक रेलवे में नौकरी की। उसके बाद वे इंजीनियर के तौर पर एक सॉफ्टेवयर कंपनी में काम करने लगे। इस दम्पति ने मिलकर एक संस्था की स्थापना भी की जिसे श्रमदान नाम दिया। यहां आकर कोई भी व्यक्ति सड़कों के गढ्‌डे भरने के लिए राशि दान कर सकता है।
(साभार – दैनिक भास्कर)

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता दिग्गज अभिनेत्री सुरेखा सीकरी का निधन

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मुम्बई : राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री सुरेखा सीकरी का निधन शुक्रवार सुबह हृदय गति रुकने से हो गया। वह 75 साल की थीं। मीडिया से साझा किए गए एक बयान में अदाकारा के एजेंट विवेक सिधवानी ने बताया कि दूसरे मस्तिष्काघात के बाद उन्हें स्वास्थ्य संबंधी बहुत परेशानियां हो रही थीं। सीकरी तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली रंगकर्म में अपनी पहचान बनाने वाली अभिनेत्री थीं। सीकरी को पिछले साल सितम्बर में मस्तिष्काघात हुआ था और वह कुछ दिन तक अस्पताल में भर्ती रही थीं। सीकरी ने थिएटर, फिल्म से लेकर टेलीविजन तक सभी मंचों पर अपने शानदार अभिनय की छाप छोड़ी। उन्होंने ‘तमस’, ‘मम्मो’, ‘सलीम लंगड़े पे मत रो’, ‘ज़ुबेदा’, ‘बधाई हो’ जैसी फिल्में की और धारावाहिक ‘बालिका वधू’ में भी नजर आईं। सीकरी आखिरी बार 2020 में ‘नेटफ्लिक्स’ की फिल्म ‘घोस्ट स्टोरीज़’ में नजर आई थीं। दिल्ली में जन्मी अदाकारा ने अपना बचपन उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की पहाड़ियों में गुजारा। उन्होंने उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) से अपनी स्नातक की पढ़ाई की और फिर 1968 में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में दाखिला लिया। 1971 में एनएसडी से पढ़ाई पूरी करने के बाद, सीकरी ने थिएटर में काम करना जारी रखा और एक दशक से अधिक समय तक ‘एनएसडी रिपर्टरी कम्पनी’ से जुड़ी रहीं। वहां, उन्होंने ‘संध्या छाया’, ‘तुगलक’ और ‘आधे अधूरे’ जैसे कई मशहूर नाटक किए। इसके बाद सीकरी ने मुंबई को रुख किया और 1978 में ‘किस्सा कुर्सी का’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। 1986 में आई फिल्म ‘तमस’ में उनकी अदाकारी के लिए उन्हें अपने करियर का पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। 1989 में उन्हें ‘संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया। इसके बाद 1994 में आई फिल्म ‘मम्मो’ के लिए भी उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। अदाकारा ने टेलीविजन पर भी अपनी अदाकरी का लोहा मनवाया उन्होंने ‘सांझा चूल्हा’, ‘कभी कभी’, ‘जस्ट मोहब्बत’, ‘सीआईडी’, ‘बनेगी अपनी बात’ जैसे कई धारावाहिक किए, लेकिन ‘बालिका वधू’ में निभाए उनके ‘दादी सा’ के किरदार को काफी लोकप्रियता मिली। इसके साथ-साथ वह लगातार फिल्में भी करती रहीं और 2018 में आई फिल्म ‘बधाई हो’ के लिए उन्हें तीसरी बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

नेत्रहीन युवती से विवाह के लिए अकेले ले गया बारात

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अपने नहीं, गाँववाले आये साथ
ललितपुर : उत्तर प्रदेश के ललितपुर में एक युवक ने मोहब्बत की मिसाल पेश की। युवक ने एक नेत्रहीन युवती वंदना से शादी की। एक नजर में वंदना उसे पसंद आई तो उसने उसके साथ शादी करने की बात अपने घर पर की। लेकिन घरवाले राजी नहीं हुए। फिर भी उसने शादी करने की बात कही तो भाई और माँ ने घर से निकाल दिया। फिर क्या था…दूल्हा बनकर मोहन अकेले ही वंदना के घर के बाहर पहुंच गया। मोहन का वंदना के प्रति प्यार देख गांव वालों ने दोनों की शादी धूमधाम से कराई।
ललितपुर के मड़ावरा के मदनपुर गाँव में रहने वाले दिव्यांग बब्बू रायकवार की बेटी वंदना दोनों आंखों से जन्म से ही अंधी है। पिता ने बेटी की शादी के लिए कई बार कोशिश की, लेकिन किसी ने बेटी का हाथ नहीं थामा। फिर पिता ने उम्मीद ही छोड़ दी थी। बेटी को मोहन जैसा जीवनसाथी मिलने से पिता भी खुश हैं। वह कहते हैं कि भगवान ने मोहन को उनकी बेटी के लिए भेजा है। मध्य प्रदेश के सागर जिले के मड़ावन गांव का रहने वाल मोहन पेशे से कारीगर है।
मोहन का परिवार इस शादी के खिलाफ था। कई बार परिवार को मनाने के बाद भी वो जब कामयाब नहीं हुआ तो अपने दोस्तों के संग अकेला ही बारात लेकर निकल आया। उसने वंदना के साथ सात फेरे लिए और हमेशा के लिए अपना बना लिया। शादी समारोह में अपनों की कमी गांव के लोगों ने पूरी कर दी। गांव वालों ने धूमधाम से दोनों की शादी कराई।
मोहन ने बताया कि वो वंदना को संसार की सभी खुशियां देना चाहता है। शादी के बाद वंदना को खाना बनाने और घर का काम करना नहीं पड़ेगा। वो खाना बनाना और घर का काम करना जानता है। वो खुद वंदना के लिए खाना बनाएगा। उसने बताया कि वो एक महीने बाद पत्नी को अपने साथ मऊ ले जाएगा। मऊ में घर का बंदोबस्त करने के लिए उसके ठेकेदार ने एक लाख रुपये दिए हैं।
ऐसे हुआ दोनों का मिलन
मोहन ने बताया कि एक महीने पहले उसके स्वर्गीय पिता के दोस्त करन सिंह ने उसे फोन पर वंदना के बारे में बताया था। इसके बाद वो वंदना को देखने मदनपुर आया था। यहां पहली नजर में ही वंदना उसे अच्छी लगी। वंदना से बातचीत की तो कहीं से रिश्ता न आने की परेशानी उसके चेहरे से साफ झलक रही थी। उसने वंदना से शादी करने का फैसला कर लिया। मोहन ने घर पहुंचकर अपने परिवार से इस बारे में बात की तो, उन्होंने साफ मना कर दिया। घर से निकाले जाने के बाद वो सीधे पिता के दोस्त करन सिंह के घर मड़ावन पहुँच गया। मड़ावन से वो बारात लेकर वंदना के घर पहुँचा।

सॉफ्टवेयर बाजार में भारत का दबदबा, इस साल 56 हजार करोड़ के कारोबार की उम्मीद

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नयी दिल्ली : इंटरनेशनल डेटा कॉरपोरेशन (आईडीसी ) ने नयी रिपोर्ट जारी की है। इसके अनुसार 2021 के अंत तक भारतीय सॉफ्टवेयर बाजार ( 7.6 बिलियन डॉलर) 56 हजार करोड़ रुपये तक पहुँचने का अनुमान लगाया है। भारत का सॉफ्टवेयर बाजार 2020 में लगभग 52 हजार करोड़ रुपये (7 बिलियन डॉलर) आंका गया था, जो कि 2019 की तुलना में साल-दर-साल 13.4 प्रतिशत ज्यादा है।
एशिया में भारत की हिस्सेदारी 17.5 प्रतिशत रही
2020 में पूरे एशिया/प्रशांत (जापान और चीन को छोड़कर) (APEJC) में सॉफ्टवेयर मार्केट में भारत की हिस्सेदारी 17.5 प्रतिशत थी। माइक्रोसॉफ्ट,ओरेकल और एसएपी जैसी सॉफ्टवेयर कंपनी साल 2020 के दौरान भारतीय बाजार में सबसे आगे रहीं।

अगले 4 साल में 11.6 प्रतिशत विकास का अनुमान
आईडीसी का अनुमान है कि भारत का समग्र सॉफ्टवेयर मार्केट 2020 से 2025 तक 11.6 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) से बढ़ने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय इंटरप्राइजेज टेक्नोलॉजी में निवेश करना जारी रखेगा जो उन्हें ऑपरेशन करने में सुधार होगा और कर्मचारी की काम करने की कैपासिटी में सुधार के लिए इनोवेशन को बढ़ावा देने में मदद करेगा और बदले में बिजनेस को गति मिलेगी।
आईडीसी को उम्मीद है कि प्लेटफॉर्म-एज-ए-सर्विस (पीएएएस) और सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (एसएएएस) मार्केट के सभी सॉफ्टवेयर मार्केट में 2020 में 36.8 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 57.1 प्रतिशत हो जाएगा।

आईटी और सेल्स सेक्टर में इंक्रीमेंट सामान्य से ज्यादा
रिपोर्ट के मुताबिक महामारी से कारोबार में आईटी का महत्व बढ़ा है। वहीं, लॉकडाउन के बाद से सेल्स वाली नौकरियों में नियुक्ति बढ़ी है। यह रिपोर्ट अहमदाबाद, बेंगलुरू, चंडीगढ़, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई और पुणे में 17 सेक्टरों के 2,63,000 प्रोफाइल्स के एनालिसिस पर तैयार की गयी है। इसमें कहा गया है कि सेल्स सेक्टर में 9.82 प्रतिशत और आईटी सेक्टर 8.55 प्रतिशत का इंक्रीमेंट मिला, जो कि सामान्य इंक्रीमेंट (7.12 प्रतिशत ) से ज्यादा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की चार दशक पुरानी आईटी सर्विसेज इंडस्ट्री से जुड़े टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योर्स ने हजारों स्टार्टअप्स शुरू किए हैं। यह स्टार्टअप उच्च दर्जे के सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन उपलब्ध करा रहे हैं। इसमें बिलिंग से लेकर ग्राहक सपोर्ट जैसी सेवाएं शामिल हैं। यह स्टार्टअप क्लाउड के जरिए सब्सक्रिप्शन के आधार पर सर्विस देते हैं। चार्जबी इंक जैसे कई स्टार्टअप ग्लोबल स्तर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं, फ्रेशवर्क्स जैसे स्टार्टअप शेयर बाजारों में लिस्ट हो रहे हैं।
(साभार – दैनिक भास्कर)

सफाईकर्मी आशा ने दो बच्चों की जिम्मेदारी निभाते हुए पास की आरएएस परीक्षा

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जोधपुर : राजस्थान की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षा ( आरएएस -2018) में एक सफाईकर्मी आशा कंडारा ने सफलता हासिल कर सबको हैरान कर दिया है। सफाईकर्मी आशा कंडारा युवाओं के लिए मिसाल बनकर उभरी हैं। आशा कंडारा जोधपुर नगर निगम में बतौर सफाईकर्मी कार्यरत हैं। अपने इस काम के साथ ही वह राजस्थान प्रशासनिक सेवा जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफल हुईं। इस परीक्षा में आशा कंडारा ने 728वीं रैंक हासिल की है। पिछले कई सालों से आशा नगर निगम में अस्थाई सफाईकर्मी के तौर पर कार्यरत है। उनके दो बच्चे हैं, जिनकी जिम्मेदारी वह पूरा करती हैं। इसके बावजूद उन्होंने कभी पढ़ाई का दामन नहीं छोड़ा। वह दिन में सफाईकर्मी का काम करती थीं और रात में पढ़ाई करती थीं।
अपने सपनों को पूरा करने के लिये आशा ने कड़ी मेहनत की राह को चुना और आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई। उन्होंने आरएएस परीक्षा के तीनों चरणों प्री एग्जाम, मुख्य एग्जाम और इंटरव्यू पास कर सफलता का परचम लहरा दिया। बता दें कि 8 साल पहले उनकी उन्होंने पति से मतभेदों के कारण अलग रहने का फैसला किया। वह अपने बच्चों का पालन पोषण खुद ही करती थीं. नगर निगम में अभी तक वह अस्थाई सफाईकर्मी की नौकरी करती थी। इस दौरान उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्हें 12 दिन पहले ही नगर निगम में स्थाई नौकरी की सौगात मिली थी। आशा बताती हैं कि जब वह नगर निगम में काम करने के लिए जाती थीं तो नगर निगम में बैठे अफसरों को देखकर उसके मन में भी अफसर बनने का इच्छा पैदा हूई। इसके बाद उन्होंने स्नातक किया और आरएएस की तैयारी शुरू की। आखिरकार उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और उनका सपना पूरा हो गया।

फेसबुक 2022 तक कंटेंट क्रियेटर्स को करेगा 1 बिलियन डॉलर का भुगतान

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नयी दिल्ली : फेसबुक 2022 के अंत तक अगले अपने सोशल मीडिया माध्यमों पर कंटेट क्रिएट करने वालों को कुल एक बिलियन डॉलर (करीब 7454 करोड़ रुपये) का भुगतान करेगा। कंपनी ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा है कि वह लाइव ऑडियो रूम्स और बुलेटिन के साथ स्टार्स और अफिलिएट जैसे क्रिएटिव टूल्स को विकसित करने में लगी है। ऐसे में कंपनी फेसबुक और इन्स्टाग्राम के ऐसे क्रिएटर्स को भी भुगतान करना चाहती है जो अपनी कम्युनिटी की बेहतरी के लिए कंटेंट क्रिएट कर रहे हैं। फेसबुक ने एक बोनस प्रोग्राम लाने का भी एलान किया है। कंपनी लोगों के लिए अच्छा कंटेंट लाने वाले क्रिएटर्स को इस प्रोग्राम के तहत बोनस देगी। फेसबुक के मुताबिक बोनस से क्रिएटर्स को यह समझने में मदद मिलेगी कि उनके लिए कौन-सा कंटेंट सबसे अच्छा परफॉर्म कर रहा है। कम्पनी ने कहा है कि बोनस प्रोग्राम सीजनल होगा और समय के साथ उसमें विस्तार देखने को मिलेगा। कुछ बोनस प्रोग्राम निमंत्रण के जरिए कुछ क्रिएटर्स के लिए पहले से उपलब्ध हैं।
फेसबुक की इस घोषणा से यह स्पष्ट हो गया है कि दिग्गज सोशल मीडिया कंपनी रिकॉर्डेड वीडियो, लाइव स्ट्रीमिंग और अन्य तरह के कंटेट क्रिएट करने वालों को कितना अधिक तवज्जो दे रही है। साथ ही कंपनी उन प्रमुख सोशल मीडिया नेटवर्क कंपनियों में शुमार हो गई है, जिन्होंने यूजर इंगेजमेंट करने वाले कंटेट क्रिएटर्स में सीधने निवेश का एलान किया है। गौरतलब है कि स्नैपचैट, यू ट्यूब और टिकटॉक इस ऐसी घोषणाएँ पहले ही कर चुकी हैं। अभी मौजूद बोनस प्रोग्राम केवल निमंत्रण के जरिए उपलब्ध हैं। इससे क्रिएटर्स को ज्यादा यूजर्स को इंगेज करने से जुड़ी समझ विकसित करने के साथ कुछ ज्यादा कमाई करने का भी मौका मिल जाता है।

नहीं रहे पूर्व क्रिकेटर यशपाल शर्मा

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नयी दिल्ली : पूर्व क्रिकेटर और 1983 विश्व विजेता भारतीय टीम के सदस्य रहे यशपाल शर्मा नहीं रहे। उनका 66साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। यशपाल शर्मा के निधन पर पूर्व कप्तान कपिल देव अपने आंसू नहीं रोक पाए। एक टीवी चैनल पर बात करते हुए कपिल रोने लगे। शर्मा भारतीय टीम के सिलेक्टर भी रहे। शर्मा ने भारत के लिए 37 टेस्ट मैचों में 1606 रन बनाए। उनका हाईएस्ट 140 रहा और औसत 33.45 रन था। वहीं वनडे क्रिकेट में उन्होंने 42 मैचों में 28.48 के औसत से 883 रन बनाए।
भारतीय चयनकर्ता रहे
यशपाल शर्मा साल 2003 से 2006 तक भारतीय टीम के चयनकर्ता रहे। यह भारतीय क्रिकेट के लिए थोड़ा अजीब वक्त था। उन्होंने तब टीम के कोच ग्रेग चैपल के खिलाफ अपनी आवाज उठाई थी और सौरभ गांगुली का समर्थन किया था। साल 2008 में वह दोबारा चयनकर्ता बने। वह उत्तर प्रदेश की रणजी टीम के कोच भी रहेय़
1983 विश्व कप के हीरो थे शर्मा
1983 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम ने वेस्टइंडीज के खिलाफ जीत के साथ शुरुआत की। इसमें शर्मा की अहम भूमिका थी। जब वह क्रीज पर उतरे तो टीम का स्कोर तीन विकेट पर 76 रन था जो जल्द ही पांच विकेट पर 141 रन हो गया। शर्मा ने 120 गेंद पर 89 रन की पारी खेली। उन्होंने अच्छे शॉट तो लगाए ही साथ ही विकेट के बीच अच्छी दौड़ भी लगाई। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आक्रामक 40 रन हों या फिर इंग्लैंड के खिलाफ मुश्किल हालात में खेली गई 61 रन की पारी। शर्मा ने टूर्नामेंट में 34.28 के औसत से 240 रन बनाए। भारत ने अंत में विश्व कप अपने नाम किया।
दिलीप कुमार के थे प्रशंसक
यशपाल शर्मा दिलीप कुमार के बहुत बड़े प्रशंसक थे। उन्होंने कहा भी था कि दिलीप कुमार ने उनका कॅरियर बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। दिलीप कुमार ने पंजाब का रणजी मैच देखने के बाद शर्मा के लिए बीसीसीआई में राजसिंह डुंगरपुर से बात की थी। यशपाल शर्मा इस बात के लिए दिलीप कुमार का बड़ा अहसान मानते थे।