मौन-गूँज” हिन्दी भाषा की अंतर्राष्ट्रीय वेब पत्रिका तथा वेबसाइट का लोकार्पण

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मौन-गूँज” हिन्दी भाषा की अंतर्राष्ट्रीय वेब पत्रिका (साहित्य एवं सामाजिक सरोकारों की त्रैमासिकी) तथा मौन गूँज वेबसाइट का विधिवत रूप से विमोचन दिनांक गत 18 अक्टूबर को हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक तरीके से संस्थापक एवं मुख्य सम्पादक डॉ.मीनाक्षी सिंह द्वारा दीप प्रज्ज्वलन तथा डॉ. प्रतिभा गर्ग की सरस्वती वंदना से किया गया। तत्पश्चात सभी अतिथियों ने पत्रिका का मुखपृष्ठ दिखाते हुए विमोचन का कार्य सम्पन्न किया।
विमोचन कार्यक्रम के शुभारंभ में मुख्य संपादक एवं संस्थापक डाॅ. मीनाक्षी सिंह  ने विशिष्ट अतिथियों का विस्तृत परिचय देते हुए भव्य रूप से उनका स्वागत किया। अपने स्वागत वक्तव्य में ही उन्होंने पत्रिका के उद्देश्यों की चर्चा करते हुए कहा कि इस पत्रिका के दो मुख्य उद्देश्य हैं- “हिन्द के साथ, हिंदी का विकास”, साथ ही, समाज के मौन, दलित, प्रताड़ित वर्ग की पीड़ा को मुखर करने के लिए एक सशक्त तथा समर्थ कलमकार वर्ग का संगठन जो सदियों से दबे-कुचले मौन को एक शाश्वत गूँज में परिवर्तित कर सके। समाज के दबे एवं शोषित वर्ग के विचारों, भावों, वेदनाओं और संवेदनाओं को मुखर एवं गूँजायमान करने का कार्य इस पत्रिका के माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि “मौन सृजन है, गूँज अभिव्यक्ति है”, उन्होंने बताया कि कोई भी संस्थान किसी एक आंख का स्वप्न नहीं होता अपितु कई स्वप्नों का विराट, विशाल पुंज होता है।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में देवेन्द्र कुमार बहल, प्रधान संपादक, अभिनव इमरोज, नयी दिल्ली ने डॉ.मीनाक्षी सिंह जी को प्रसिद्ध संस्थान “हिंदी भाषा सहोदरी” द्वारा प्रदत्त की गयी उपाधि साहित्य व्योम की “परी” की सार्वजनिक रूप से घोषणा की। इस अवसर पर उपस्थित विशिष्ट अतिथि डाॅ.अकेला भाई, सचिव, पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी, ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि यह पत्रिका समाज के उस वर्ग का प्रतिनिधित्व करना चाहती है जिसकी आवाज सदियों से मौन रही है, उन्होंने मुख्य संपादक को हरसंभव सहायता का आश्वासन देते हुए कहा कि साहित्य के विकास में पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़ी रहेगी।
इस कार्यक्रम में माननीय अजय भाटिया, अपर पुलिस अधीक्षक ने भी विचार व्यक्त करते हुए अपने अनुभवों को साझा किया कि साहित्य की सेवा करते हुए पत्रकारिता में किस प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने पुलिस की नौकरी के साथ-साथ साहित्य-जगत में पत्रिका के संपादन एवं संचालन की बारीकियों को साझा किया।
इस कार्यक्रम में डाॅ. रचना निगम, संपादक एवं प्रकाशक, नारी अस्मिता, बड़ौदा, ने कहा कि यह गौरव का क्षण है कि आज हिन्दी साहित्य जगत में अंतर्राष्ट्रीय वेब पत्रिका का शुभारंभ किया गया वह भी शोषित तथा प्रताड़ित वर्ग के हित का प्रण लेकर। उन्होंने कहा कि “मौन-गूँज” का नाम ही काफी है इसके उद्देश्य को प्रकट करने के लिए। समाज के उस मौन वर्ग की आवाज को गूँजायमान करना अपने आप में परिलक्षित करता है कि पत्रिका की क्या भूमिका रहने वाली है। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रोफेसर शैलेन्द्र कुमार सिंह, नेहु, शिलांग ने भारत के विभिन्न प्रांतों में हिंदी के स्वरूपों के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए “मौन गूँज” के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला तथा पत्रिका की पंच लाइन “हिन्द के साथ, हिंदी का विकास” पर विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत की।
विशिष्ट अतिथियों में “मौन गूँज” के संरक्षक एवं संपादक माननीय श्री प्रकाश सिंह का रिकॉर्डेड वक्तव्य कार्यक्रम में प्रेषित किया गया।  कार्यक्रम में बोलते हुए डाॅ.घनश्याम भारती जी, अतिथि संपादक,मौन गूँज, ने पत्रिका के बारे में विस्तार से बताया।
कार्यक्रम का संचालन कुशल मंच संचालक तथा प्रसिद्ध लेखिका अरुणा उपाध्याय ने “मौन गूँज” की प्रतिभाशाली सदस्य तथा लेखिका निधि अग्रवाल तथा संध्या श्रीवास्तव के सहयोग से किया। उनकी मधुर वाणी एवं प्रभावी मंच संचालन कला से सभी अतिथिगण बहुत प्रभावित हुए । कार्यक्रम में संपादक एवं संस्थापक के “मौन गूँज” की व्याख्या “मौन सृजन है, गूँज अभिव्यक्ति है, मौन स्त्रोत है, गूँज शक्ति है” ने हर वक्ता तथा श्रोता को बहुत ही गहरे तक प्रभावित किया। यह मात्र शब्दों का समूह नहीं है अपितु यह पंक्तियाँ दीपक बन पत्रिका के मार्गदर्शक सिद्धान्त के रुप में संपादन-मंडल एवं रचनाकार सदस्यों को अनवरत प्रेरित करते रहेंगे ।
सभी अतिथियों के जवाबी वक्तव्य के रूप में अपनी बात रखते हुए डॉ. मीनाक्षी सिंह ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम के द्वितीय चरण में, पत्रिका में शामिल किए गए रचनाकारों को प्रकाशित रचनाओं का पाठ करने के लिए आमंत्रित किया गया जिनमें मुकेश पोपली, छाया वर्मा, सुषमा कनुप्रिया, निधि अग्रवाल, डॉ प्रतिभा गर्ग जी, संध्या श्रीवास्तव, बिनोद कुमार मिश्र तथा कल्पना त्रिपाठी उपस्थित रहे तथा अपने रचना पाठ के माध्यम से उन्होंने पाठकों का ध्यान आकर्षित किया।
अंततः निधि अग्रवाल  तथा संध्या श्रीवास्तव के सहयोग से अरुणा उपाध्याय ने समाप्ति की ओर बढ़ते हुए कार्यक्रम का सार ज्ञापित किया एवं कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा की तथा पाठकों से यह निवेदित किया कि मौन गूँज की वेबसाइट http://moungoonj.com/ पर जाकर पत्रिका ज़रूर पढ़ें तथा प्रवेशांक पर अपनी प्रतिक्रिया दें।

 

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