गहरा है नवरात्रि और ज्योतिष का सम्बन्ध

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ज्योतिर्विद् सुनीता सुराणा, मुम्बई

इस महीने में नवरात्रि है हिन्दू धर्म में वर्ष में चार नवरात्र आते हैं। माघ, चैत्र, आषाढ़ और अश्विन माह। चैत्र माह की नवरात्रि को बसंत नवरात्रि और अश्विन माह की नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि कहते हैं। बाकी बची दो आषाढ़ और पौष-माघ माह की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं। दुर्गा पूजा में इस नवरात्रि का अभिनन्दन चार नवरात्रियों में कुल 36 होते हैं। इन दिनों में शारीरिक और मानसिक रूप से पवित्र और शुद्ध बने हुए हैं।
1) हमारे शरीर में 9 छेद हैं। दो आंख, दो कान, नाक के दो छेद, दो गुप्तांग और एक मुंह। उक्त नौ भागों को पवित्र और शुद्ध करेंगे तो मन निर्मल होगा और छठी इंद्रिय को जाग्रत करेगा। नींद में यह सभी इंद्रियां या छेद लुप्त होकर बस मन ही जाग्रत रहता है। वर्ष की 36 नवरात्रियों में उपवास रखने से अंग-प्रत्यंगों की पूरी तरह से आंतरिक सफाई के साथ ही मन में पवित्रता का जन्म होता है।
2) इन नौ दिनों में कम से कम 9 तरह के संयम की जरूरत होती है।
1.आहार पे संयम: इसमें मांस खाना, तामसिक और राजसी भोजन करना मना है। सात्विक भोजन एक समय कर सकते हैं अन्यथा फलाहार ही लें।
2. मद्यमान: इन दिनों में किसी भी प्रकार का नशा ना करें। जैसे मद्यपान, सिगरेट, तम्बाकू आदि।
3.ब्रह्मचर्य पालन: इन दिनों में ब्रह्मचर्य का पालन न करना पाप माना जाता है।
4. सकारात्मक सोच विचार: यह पवित्र दिन होते हैं। इन दिनों में पूरे नौ दिनों तक माता की भक्ति में ही रहने से किसी भी प्रकार के नकारात्मक विचार नहीं आते हैं। मानसिक ध्यान करें।
5. वाणी पर संयम: कई लोग इन 9 दिनों मौन रहते हैं। मौन नहीं रह सकते हैं तो कम से कम मुंह से किसी भी प्रकार के कटु वचन, बुरे वचन या गाली का प्रयोग ना करें।
6. मानसिक संयम: नवरात्रि के नौ दिनों में क्रोध, काम, लोभ, आसक्ति, रोना, और अन्य किसी भी प्रकार के उद्वेगपूर्ण भाव नहीं रखना चाहिए। मन को संयम में रखें।
7. वर्जित साधनाएँ: नवरात्रि की इन पवित्र ९ रातों में तांत्रिक कई तरह की अघोर साधना करते हैं, जो सामान्य लोगों के लिए, उचित नहीं हैं, इसीलिए इससे बचें।
8.पूजा कर्म की विधि का ज्ञान: यदि आप माता की साधना, पूजा आदि करना नहीं जानते हैं तो भक्ति सर्वोपरि है। बेवजह की गलतियों से बचें । इसका ध्यान रखें। 9)पूजा स्थल और घर में स्वच्छता का खास ख्याल रखें।
व्रत रखने वाले व्यक्ति को गंदे या बिना स्नान किए वस्त्र नहीं पहनना चाहिए। खाने में अनाज और नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। दुर्गा चालीसा, मंत्र, सप्तशती पाठ या चण्डी पाठ के नियमों का पालन करते हुए नवरात्रों में व्यक्ति को दाढ़ी, नाखून व बाल नहीं कटवाने चाहिए।

सम्पर्क – युग्म एस्ट्रो कन्सल्टेंसी

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